राजस्थान: अलग से पेश होगा कृषि बजट, जमीन की कुर्की से परेशान किसानों को कर्ज़ माफी का इंतजार

राजस्थान में प्रति किसान पर करीब 1 लाख 13 हजार रुपए का कर्ज़ है। कर्ज़ न चुकाने पाने वाले किसानों की जमीनें नीलाम हुई हैं। राजस्थान में 23 फरवरी को कृषि का बजट आ रहा है, माना जा अगले साल होने वाले चुनावों को देखते हुए अशोक गलहोत किसानों को कर्जमाफी का तोहफा दे सकते हैं।

Somu AnandSomu Anand   22 Feb 2022 6:44 AM GMT

राजस्थान: अलग से पेश होगा कृषि बजट, जमीन की कुर्की से परेशान किसानों को कर्ज़ माफी का इंतजार

राजस्थान हर किसान परिवार पर करीब एक लाख 13 हजार रुपए का बैंक कर्ज़ है। फोटो- गांव कनेक्शन

जयपुर/दौसा/अलवर/अजमेर (राजस्थान)। राजस्थान में कृषि बजट अलग से पेश होगा। इसलिए साल 2022-23 के बजट में किसानों को कर्ज़माफी समेत कई उम्मीदे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी जमीन कुर्की से संबंधित ब्यौरा मांगा है।

राजस्थान में 23 फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश किया जाएगा, जिसमें कृषि बजट अलग से होगा। राजस्थान में साल 2023 के आखिर में चुनाव हैं। इस कृषि बजट के जरिए सरकार किसानों को साधने की कोशिश करेगी। 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार बनने के दस दिनों के अंदर किसानों की कर्जमाफी की बात कही थी। सरकार बनने के बाद राजस्थान सरकार ने किसानों का सहकारी बैंकों वाला कर्जा तो माफ कर दिया लेकिन कॉमर्शियल बैंकों का कर्ज़ बढ़ता जा रहा है।

सहकारी बैंकों के 25 लाख किसानों के 14 हजार करोड़ रुपये माफ करने के बावजूद 35 लाख किसानों का 60 हजार करोड़ अभी भी बाकी है। राजस्थान के 1 लाख 35 हजार 151 किसानों पर संपति कुर्की का संकट मंडरा रहा है। इन सभी किसानों का लोन बैंक ने एनपीए में डाल दिया है। इसमें से 9000 किसानों की जमीन नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जिस पर राज्य सरकार के निर्देश के बाद रोक लगी है। इसलिए इन किसानों को इस कृषि बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुर्की से संबंधित ब्यौरा मांगकर संकेत दिए हैं।

राजस्थान में अलवर जिले के किसान जयराम गुर्जर अपने शहीद बेटे की तस्वीर के साथ। फोटो- सोमू आनंद

जानिए क्या है कुर्की और कर्ज़ का मुद्दा

राजस्थान में किसानों पर बढ़ता कर्ज़ और उसकी वसूली के लिए बैंकों के नोटिस और जमीनों की कुर्मी (नीलामी) बड़ा मुद्दा बन चुका है। जनवरी में दौसा जिले के किसान कजोड़ मीणा की जमीन लोन न चुका पाने की वजह से नीलाम कर दी गई थी। मामला सुर्खियों में आया तो सरकार की किरकिरी हुई। इसके बाद राजस्थान सरकार ने नीलामी को निरस्त कर दिया और प्रदेश में 5 एकड़ से कम कृषि भूमि के नीलामी रोकने के निर्देश जारी कर दिए।

कजोड़ मीणा ने 2017 में खेत में बोरिंग के लिए ढाई लाख रुपए का लोन लिया था, लेकिन बोरिंग फेल हो गई। बोरिंग के पैसे तो बर्बाद हुए ही सिंचाई न होने से फसल भी नहीं हुई। किसान के बेटे पप्पू मीणा गांव कनेक्शन को बताते हैं, "बोरिंग फेल हो गया और खेतों में पानी की कमी की वजह से फसल भी अच्छी नहीं हुई। नतीजतन हम लोन तो दूर, उसका ब्याज़ भी नहीं चुका पाए। बैंक ने उन पर दबाव बनाना शुरू किया। लेकिन इससे पहले कि मेरे पिता कोई उपाय करते, उनकी मौत हो गई। बैंक ने एक महीने पहले नीलामी का नोटिस दिया तो हम एसडीएम के पास गए और कर्ज चुकाने के लिए दो महीने का वक़्त मांगा। हमें लगा कि फसल कटेगी तो कर्जा चुका देंगे। नीलामी वाले दिन भी हमें कोई सूचना नहीं थी। हमारी 15 बीघे जमीन मात्र 46 लाख 51 हजार में नीलाम कर दी गई। अगले दिन के अखबार में हमें जमीन नीलामी की खबर मालूम हुई।"

मृतक किसान की जमीन की नीलामी की खबर वायरल होने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत, भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा समेत कई बड़े नेता परिवार से मिलने पहुंचने लगे। बाद में सरकार ने दबाव में आकर कजोड़ मीणा के जमीन की नीलामी निरस्त कर दी गयी। पप्पू मीणा का परिवार इस दशहत में जी रहा है कि आज नीलामी टली है लेकिन बैंक का कर्ज़ तो बढ़ता जा रहा है, उसका क्या होगा?

दौसा जिले के किसान रमेश मीणा, जिन्होंने अपनी जमीन को नीलामी से बचाने के लिए साहूकार से 90 हजार रुपए का लोन लिया।

दौसा वाले मामले के बाद भले ही राज्य सरकार ने नीलामी रोकने के निर्देश दिए हों, लेकिन इससे पहले सैकड़ों किसानों की जमीनें नीलामी हो चुकी थीं। ऐसे किसानों की स्थिति बदतर हो गई है। अलवर के थानागाजी में 12 जनवरी को 6 किसानों की जमीन नीलाम हुई थी। इन किसानों के जमीन की नीलामी एसडीएम की अनुपस्थिति में हुई। किसानों का आरोप है कि भूमाफियाओं की मिली भगत से काफी कम कीमत पर जमीन नीलाम कर दी गईं।

जयराम गुर्जर उनमें से एक हैं। साल में 2010 में उनके पिता ने बैंक ऑफ बड़ौदा से 1.44 लाख लोन लिया था।, जो बढ़कर 6.71 हो गया और फिर उनकी 15 बीघे जमीन नीलाम कर दी गई।

62 वर्षीय जयराम गुर्जर गांव कनेक्शन को बताते हैं, "हमारे पिता मंगलराम गुर्जर ने बैंक ऑफ बड़ौदा से 2010 में 1.44 लाख रुपये लोन लिया था। कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई। मेरे एक भाई को कैंसर हो गया है। हम बड़ी मुश्किल से उनका इलाज करवा रहे हैं। मेरा बेटा सेना कैम्प में शहीद हो गया। और छोटे भाई को लकवा मार गया है। हमारे सामने खाने का संकट है। हमें उम्मीद थी कि सरकार हमारा कर्जा माफ कर देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमें 1 लाख 44 हजार के बदले 6 लाख 71 हजार की रकम चुकाने को कहा गया, लेकिन हमारी आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं थी। इसलिए हमारी 15 बीघे जमीन नीलाम कर दी गई। अब हम साहूकार से लोन ले रहे हैं। अपनी जमीन बचाने का अब यही उपाय बचा है।"

नीलामी बाद इन किसानों को एक और मौका दिया गया है। अब वे नीलामी की प्रक्रिया में लगा खर्च, इश्तेहार का खर्च और कर्ज की पूरी राशि जमा कर अपनी जमीन वापस ले सकते हैं।

जयराम गुर्जर के ही पड़ोसी किसान 40 वर्षीय मातादीन गुर्जर की जमीन भी 12 जनवरी को नीलाम हो गई। वे बताते हैं, "पानी की कमी के कारण फसल अच्छी नहीं होती। पहले हम प्याज की और गेहूं की खेती करते थे, लेकिन पानी की कमी के कारण अब दोनों फसल उपजाना संभव नहीं है। खेती के अलावे परिवार चलाने के लिए और कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में आदमी खाए या लोन चुकाए।" वे आगे कहते हैं "कहने को तो यह देश किसानों और जवानों का देश है लेकिन यहां न तो किसानों की सुनी जा रही है और न ही जवानों की"।

मातादीन के मुताबिक उन्होंने अपने खेत बचाने के लिए साहूकार से 5 रुपये सैकड़ा यानि 100 रुपए पर 5 रुपए महीने के ब्याज पर कर्ज़ लिया है ताकि कर्ज़ चुका अपनी जमीन बचा सकें। हालांकि 5 रुपए प्रति सैकड़ा ब्याज बहुत ज्यादा है। मातादीन कहते हैं, "आगे जो होगा, देख लेंगे लेकिन फिलहाल तो जमीन बच जाएगी न।"

खेती के लिए बैंक और बैंक का कर्ज़ चुकाने के लिए साहूकार, फिर साहूकार से पीछा छुड़ाने के लिए बैंक से कर्ज, राजस्थान के लाखों और किसान इस चक्र में फंसे हुए हैं।

दौसा जिले के 46 वर्षीय किसान रमेश मीणा की जमीन नीलामी के आदेश अगस्त 2021 में दिए गए थे। तब रमेश ने साहूकार से ऋण लेकर बैंक का 90,000 रुपये कर्जा चुकाया था। रमेश उस कर्जे का ब्याज आज तक भर रहे हैं। वे कहते हैं कि इसके अलावे हमारे पास कोई रास्ता नहीं था।

लादूराम गुर्जर का परिवार।

हर किसान पर 113865 रुपए का कर्ज़ और 9156 रुपए की मासिक आय

राजस्थान में एक बड़ी आबादी गांवों में रहती है। कृषि गणना 2015-16 के अनुसार प्रदेश में 76.55 लाख किसान हैं। जिनमें 16.77 लाख लघु किसान और 30.71 लाख सीमांत किसान हैं। मोटे तौर पर देखें तो प्रदेश के कुल आबादी का करीब 60 फीसदी लोग कृषि पर निर्भर हैं। प्रदेश में औसतन हर किसान पर 1 लाख 13 हजार रुपए का कर्ज़ है। सितंबर 2021 में आए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के मुताबिक साहूकारों से ऋण लेने के मामले में राजस्थान तीसरे स्थान पर है। ये रिपोर्ट ये भी बताती हैं कि किसान परिवार की औसत मासिक आय 9,156 रुपए है।

पानी की कमी से किसान परेशान

किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत, फसल का सही मूल्य न मिलने और पानी की कमी जैसी समस्याओं की वजह से खेती लगातार घाटे का सौदा होता जा रहा है। खेती-किसानी से बमुश्किल इतनी आमदनी ही हो पाती है जिससे पेट भरा जा सके। ऐसे में अगर किसी परिवार के साथ कोई दुर्घटना या बीमारी हो जाये तो उस परिवार के सामने जीवन यापन का गंभीर संकट आ जाता है। ऐसी स्थितियों में कई किसान आत्महत्या कर लेते हैं।

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कर्ज़ में डूबे अजमेर जिले में कुम्हरिया गांव के 48 वर्षीय किसान लादूराम गुर्जर अपना इलाज कराने गुजरात गए थे, वापस लौटे तो पता चला उनकी जमीन नीलामी की कोशिश हुई। सदमे में आए लादूराम ने आत्महत्या की कोशिश, घर वालों की नींद खुल गई तो वो बच गए लेकिन पत्नी रात पूरी रात जग कर उनकी रखवाली करती हैं। उन्हें डर है कि लादूराम फिर कोई ऐसा लदम न उठा लें। 4 बच्चों और बीमार पति के देखभाल की जिम्मेदारी अब सिर्फ उन पर है।

लादूराम के भतीजे ने गांव कनेक्शन को बताया, "उन्होंने ( लादूराम) आईसीआईसीआई बैंक की 2017 में 1 लाख 20 हजार रुपये लोन लिया था। लोन लेने के कुछ समय बाद लादूराम को सुगर की बीमारी हो गई। उनका इलाज चलने लगा और आमदनी ठप हो गई। बैंक का दबाव बढ़ता रहा और बैंक ने नीलामी का नोटिस भेज दिया। हमने बैंक से बात कर के सैटलमेंट को राजी कर लिया था। फिर पता नहीं किसकी मिली भगत से हमारी गैरहाजिरी में नीलामी करने की कोशिश की गई। जिस दिन नीलामी की प्रक्रिया हो रही थी, उस दिन लादूराम इलाज के लिए गुजरात गए हुए थे। लौटे तो जान देने की कोशिश की।"

राजस्थान में यह ऐसा एकलौता मामला नहीं

दौसा के किसान बाबू लाल बैरवा ने 2017 में सहकारी बैंक से 20,000 रुपये लोन लिए थे। बाद में अपनी बेटी की शादी के लिए साहूकार से ऋण लिया। बाबू लाल पर तीन लाख रुपये का कर्ज हो गया था। बैंक और साहूकारों का ऋण न चुका पाने की वजह से बाबूलाल ने आत्महत्या कर ली। हालात इतने बद्तर हो गए कि बाबूलाल के पूरे परिवार को अपना पेट पालने के लिए गांव छोड़ना पड़ा।

हरियाणा से सटे श्रीगंगानगर के किसान सोहनलाल मेघवाल ने 2019 में आत्महत्या कर ली। सोहनलाल पर सिंडिकेट बैंक का 1 लाख 23 हजार समेत कुल तीन लाख रुपये का कर्ज था। उसके पास मात्र 6 बीघे जमीन थी, जिसकी फसल से वह लोन नहीं चुका पाया। अपने सुसाइड नोट में कर्जमाफी के झूठे वायदे को अपनी मौत का कारण बताया था।

किसानों की मांग, कर्जमाफी के लिए ठोस कदम उठाए सरकार

अजमेर के किसान गोविंद प्रजापत कहते हैं कि किसानों के साथ सरकार ने धोखा किया है। इस कर्जमाफी के वायदे के कारण की हमने कांग्रेस को वोट किया लेकिन अब तक उन्होंने वादा पूरा नहीं किया है। इसलिए हमारी जमीन नीलाम हो रही है।

किसान सभा के नेता पूर्व विधायक अमरा राम कहते हैं, "कृषि बजट अलग से पेश करने से तब तक कोई फायदा नहीं होगा जब तक कृषि क्षेत्र के लिए बजट न बढ़ाया जाए। चुनाव के समय किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था लेकिन 3 साल बीत जाने के बावजूद वादा पूरा नहीं किया है। हमनें सरकार से मांग की है कि कृषि बजट में किसानों की सम्पूर्ण कर्जमाफी का प्रावधान किया जाए।"

उन्होंने आगे कहा, "सरकार पेट्रोल-डीजल और बिजली पर सबसे अधिक शुल्क वसूल रही है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। पहले इसका समाधान करना चाहिए।"

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजाराम मील चाहते हैं कि सरकार किसानों की कर्जमाफी के लिए ठोस कदम उठाए। मील कहते हैं, "हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार किसानों का कर्जा माफ करेगी। किसानी धीरे-धीरे घाटे का सौदा होता जा रहा है। इसलिए किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य, बैंकों के नियमों में पारदर्शिता और नीलामी पर रोक जैसे आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है।"

देश में किसानों पर कर्ज़

एक मुश्त ऋण माफी योजना को लेकर सीएम ने की थी बैंकों से अपील

राजस्थान में कर्ज़माफी का मुद्दा पिछले कई वर्षों से गरमाया हुआ है। पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार ने साल 2018 में चुनाव से पहले 30 लाख किसानों का कुल करीब 8500 करोड़ का कर्जमाफ किया था। जिसके तहत एक किसान का 50 हजार रुपए का कर्ज़माफ हुआ था। फिर सस्ता में आने के बाद गहलोत सरकार ने सहकारी बैंकों का 14000 करोड़ का कर्ज़ माफ किया (जिसमें से 6000 करोड़ वसुंधरा सरकार के समय के थे।) बाजवूद इसके 30 नवंबर 2018 को एनपीए घोषित राष्ट्रीयकृत बैंकों का 6018 करोड़ रुपए कर्ज़ माफ नहीं हुआ, जिसे लेकर किसान परेशान हैं।

दिसंबर 2021 में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की 151वीं बैंठक और नाबार्ड की राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी 2022-23 को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा था कि राष्ट्रीयकृत बैंकों को किसानों के लिए एक मुश्त कर्ज़माफी पर काम करना चाहिए। जिसमें सैटलमेंट के जरिए बैंक 90 फीसदी लोन माफ करें और 10 फीसदी का भुगतान राज्य सरकार करेगी। स्टेट बैंक ऐसा कई पहले कई जगह कर चुकी है।

16 फरवरी को भी सीएम गहलोत ने एक कार्यक्रम में कहा कि देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। किसानों की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने विगत तीन वर्षों में एक से बढ़कर एक निर्णय लिए हैं और कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। राज्य सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में अलग से कृषि बजट लाने जा रही है।

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