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राजस्थान JEN भर्ती परीक्षा 2020 पेपर लीक मामला : नाउम्मीदी और जांच के आश्वासन की गफलत में फंसे हजारों युवा

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले 15 दिनों से हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। यह सभी अभ्यर्थी राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित जेईएन भर्ती परीक्षा 2020 (JEN Exam) में पेपर लीक होने का होने का आरोप लगा रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली हुई है।

Avdhesh PareekAvdhesh Pareek   28 Dec 2020 7:37 AM GMT

राजस्थान JEN भर्ती परीक्षा 2020 पेपर लीक मामला : नाउम्मीदी और जांच के आश्वासन की गफलत में फंसे हजारों युवाजयपुर में जेईएन भर्ती परीक्षा 2020 में पेपर लीक होने का होने का आरोप लगाते हुए हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे। फोटो : अवधेश पारीक

"पिछले चार साल से तैयारी करने के बाद जब पेपर देने जाते हैं तो अगले दिन पता चलता है कि पेपर एक दिन पहले ही लीक हो गया था ... ऐसे में हमारा भविष्य अब उस गहरे अंधकार में दिखता है जहां उम्मीद की एक किरण भी धुंधली लगती है"... ये बात कहने के बाद 24 साल के युवा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट आनंद कुछ सोच में पड़ जाते हैं।

आनंद ही नहीं उनके अलावा देवेश, लोकेश, पीरामल ... ऐसे ना जाने कितने युवा हैं जिनके चेहरों पर फिलहाल भविष्य को लेकर नाउम्मीदी की लकीरें कोई भी बंद आंख से देख सकता है।

जहां देश के किसान तीन कृषि कानूनों पर दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब एक महीने से डेरा डाले हुए हैं वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले 15 दिनों से राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित जेईएन भर्ती परीक्षा 2020 (JEN Exam) में पेपर लीक होने का होने का आरोप लगाते हुए हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर आंदोलनरत हैं।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा होने से कुछ घंटे पहले ही पेपर सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर आ गया था जिसके कारण इस परीक्षा में बडे स्तर पर धांधली हुई है।

जयपुर में प्रदर्शन करते जेईएन भर्ती परीक्षा 2020 के अभ्यर्थी। फोटो : अवधेश पारीक

पहले उस भर्ती परीक्षा को समझिए जिस पर मचा है बवाल

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की तरफ से जूनियर इंजीनियर (JEn) के पदों पर 1098 पदों पर राजस्थान के विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए मार्च 2020 में नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें बोर्ड ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (Public Works Department), जल संसाधन विभाग (Department of Water Resources), जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department ) और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (Rajasthan State Agricultural Marketing Board) इन चार विभागों में सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल संकाय में डिग्री प्राप्त (ग्रेजुएट्स) और डिप्लोमाधारकों के लिए पदों का वितरण किया।

बताया जा रहा है कि इन पदों पर भर्तियों के लिए पूरे राजस्थान से करीब 40-50 हजार युवाओं ने आवेदन किया था।

कोरोना महामारी के कारण भर्ती संबंधी प्रक्रिया में हुई देरी के बाद जुलाई में आवेदन संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद वहीं जेईएन भर्ती के इन पदों के लिए बोर्ड ने ऑनलाइन परीक्षा के लिए 29 नवंबर से 26 दिसंबर तक अलग-अलग तारीखें तय की।

परीक्षा के लिए तय की तारीख।

फिर अब परीक्षा रद्द करने की मांग कौन कर रहे हैं ?

अब भर्ती परीक्षा के लिए जो अभ्यर्थी 6 दिसंबर को उपस्थित हुए उनमें सिविल संकाय के अभ्यर्थियों का यह आरोप है कि परीक्षा से पहले पेपर व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर आ गया था।

परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी मुकेश मीणा 'गांव कनेक्शन' को बताते हैं, "हम सिविल डिग्री वालों का पेपर 6 दिसंबर को सुबह 10 से 12 होना था लेकिन उसी दिन सुबह 8 बजे ही हमारे दोस्तों के पास और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में पेपर के स्क्रीनशॉट्स शेयर होने लगे।"

वहीं एक अन्य अभ्यर्थी सुमित बताते हैं, "ऐसा नहीं है कि सिर्फ सिविल वालों का ही पेपर लीक हुआ है, परीक्षा देने वाले राजस्थान के करीब 40-50 हजार युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ हुआ है।"

सुमित कहते हैं, "हमारी सिर्फ एक ही मांग है कि इस पूरे धांधली प्रकरण की निष्पक्ष जांच हों और जिस भी सेंटर से पेपर आउट हुआ उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और परीक्षा 6 महीनों के भीतर दोबारा आयोजित हो।"

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों में सबसे ज्यादा सिविल संकाय से हैं उसका कारण छात्र बताते हैं कि सबसे ज्यादा भर्तियां सिविल वालों के लिए ही थी। कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा निकाली गई जेईएन भर्ती में सबसे ज्यादा पद सिविल संकाय के थे जिनमें सिविल डिग्रीधारकों के लिए 533 पदों पर और सिविल डिप्लोमाधारकों के लिए 375 पदों पर भर्ती निकाली गई थी।

वहीं कुछ अभ्यर्थियों ने नाम सार्वजनिक ना करने की शर्त पर परीक्षा में धांधली को लेकर कुछ व्हाट्सऐप स्क्रीनशॉट्स भी गांव कनेक्शन के साथ साझा किए हैं जिनके आधार पर वह पेपर लीक होने का आरोप लगा रहे हैं, हालांकि पुलिस अभी इन वायरल स्कीनशॉट्स की सत्यता की भी जांच कर रही है।

सिविल डिग्रीधारकों के लिए 533 पदों पर और सिविल डिप्लोमाधारकों के लिए 375 पदों पर भर्ती निकाली गई थी।

परीक्षा आयोजित करवाने वाले बोर्ड का क्या कहना है ?

इस पूरे मसले पर हमने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. बी.एल. जाटावत से संपर्क करने की कई कोशिशें की लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया और आखिर में हमारा नंबर ब्लैकलिस्टेड कर दिया।

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जाटावत ने कहा कि अन्य सभी परीक्षाओं की जेईएन भर्ती परीक्षा दौरान बोर्ड ने पूरी सतर्कता बरती है और नियमों की पालना की है।

आगे वह कहते हैं कि अभी तक पेपर लीक होने के कोई भी पुख्ता सबूत बोर्ड को नहीं मिले हैं जिससे यह पता लग सके कि पेपर परीक्षा से पहले आउट हुआ है।

वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पेपर के स्क्रीनशॉट पर वह बोले कि वह मनिपुलेट किया हुआ है और उसमें समय के साथ छेड़छाड़ की गई है।

छात्रों के सड़क पर उतरने के बाद अब मामला कहां तक पहुंचा ?

छात्रों के सड़क पर उतरने के बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की तरफ से 14 दिसंबर को इस मसले पर संज्ञान लिया गया और सांगानेर पुलिस थाना, जयपुर पूर्व में एक एफआईआर दर्ज करवाई गई और सिविल संकाय डिग्रीधारकों की परीक्षा संबंधी आगे की प्रक्रिया पुलिस जांच होने तक रोक दी गई।

उधर भरतपुर पुलिस ने JEN परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह को दबोचा है जिनसे आठ मोबाइल और दो कार जब्त की है। पुलिस का कहना है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से 6 दिसंबर को आयोजित हुई परीक्षा में कुछ लोगों द्वारा परीक्षार्थियों से रुपए लेकर पेपर आउट व अन्य गड़बड़ी की सूचना जयपुर एसओजी (SOG) से मिलने के बाद कार्रवाई की गई है।

हालांकि जब गांव कनेक्शन ने जब एसओजी डीजी अशोक राठौड़ से इस पूरे मसले पर बात की तब उन्होंने बताया, "हम अभी जांच कर रहे हैं, एक दो दिन में आपके सामने पूरी रिपोर्ट रखेंगे।"

उधर विपक्ष के कई नेताओं ने इस प्रकरण पर राज्य सरकार को घेरते हुए छात्रों के समर्थन में ट्वीट किए हैं तो राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने सैकड़ों अभ्यर्थियों के साथ बीते दिनों रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज किया।

इस दौरान सांसद मीणा ने ना सिर्फ जेईएन भर्ती परीक्षा बल्कि राज्य में होने वाली सभी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।

बीते दिनों राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने सैकड़ों अभ्यर्थियों के साथ रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज किया। फोटो : गाँव कनेक्शन

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के बारे में

बोर्ड को वेबसाइट पर नजर डालें तो अपने बारे में बोर्ड कहता है कि प्रासंगिक भर्ती नियमों के अनुसार लिखित परीक्षा, ट्रेनिंग और इंटरव्यू आयोजित करके सक्षम, सुयोग्य और कुशल व्यक्तियों की भर्ती करना हमारा उद्देश्य है।

वहीं बोर्ड चयन और भर्ती की पद्धतियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने और परीक्षा संबंधी सभी निष्पक्ष तरीकों को अपनाकर चयन का वादा करता है।

आपको बता दें कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) (जो अब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड है) की स्थापना 29.01.2014 में हुई। बोर्ड मूल रूप से ग्रेड पे 3600/- रुपये और 3600/- रुपये से कम के पदों के संबंध में सीधी भर्ती के द्वारा उम्मीदवारों का चयन करता है।

लेकिन बीते कई महीनों से परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर बोर्ड की साख दांव पर है क्योंकि इससे पहले पटवारी परीक्षा मामला, राजस्थान स्टेट फार्मासिस्ट भर्ती लिखित परीक्षा और लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा में भी अभ्यर्थी धांधली का मसला समय-समय पर उठाते रहे हैं।

राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड की पारदर्शिता के इस पैटर्न को राजस्थान यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर सीबी यादव कमजोर सिस्टम और बैखोफ धांधली गिरोह की मिलीभगत के तौर पर देखते हैं।

प्रो. सीबी यादव कहते हैं, "सिर्फ इस एक परीक्षा की बात नहीं है, पेपर लीक करने वाले गिरोह पूरे राजस्थान में सक्रिय हैं, वह सरकार की आईटी टेक्नोलॉजी से एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, उनके मंसूबे इतने बुलंद है कि गिरोह के लोग परीक्षा सेंटरों के बाहर तक मौजूद रहते हैं।"

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