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राजस्थान: कोरोना संकट के बीच 17 जिलों में फैली टिड्डियां बर्बाद कर रहीं हैं फसलें

संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने भी आशंका जताई है कि इस बार टिड्डियों का हमला बीते हमले से तीन गुना ज्यादा हो सकता है।

राजस्थान: कोरोना संकट के बीच 17 जिलों में फैली टिड्डियां बर्बाद कर रहीं हैं फसलें

माधव शर्मा

जयपुर (राजस्थान)। एक बार फिर राजस्थान में टिड्डियों का हमला हुआ है, पिछले कुछ ही दिनों में राजस्थान के 17 जिलों में टिड्डियां फैल चुकी हैं। सात जिले तो ऐसे हैं, जहां पहली बार टिड्डियां पहुंची हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में टिड्डियां भारत में आएंगी और बड़ा नुकसान करेंगी। 11 अप्रैल से अब तक 38 हजार हेक्टेयर भूमि टिड्डी हमले से प्रभावित हो चुकी है। हवा के रुख के साथ उड़ रहे टिड्डी दल फिलहाल दक्षिणी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में प्रवेश कर चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने भी आशंका जताई है कि इस बार टिड्डियों का हमला बीते हमले से तीन गुना ज्यादा हो सकता है। इससे पहले मई 2019 से फरवरी 2020 तक 12 जिलों में टिड्डियों का हमला हुआ था। सबसे ज्यादा प्रभावित सात जिलों में करीब 2.25 लाख हेक्टेयर पर एक हजार करोड़ रुपए की फसल का नुकसान किया। क्योंकि राजस्थान में अब फसल बुवाई मानसून के बाद ही होगी इसीलिए इस बार फसलों का नुकसान कम हो रहा है, लेकिन सब्जी, हरा चारा और कैर-सांगरी जैसी वनस्पति को टिड्डी काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

राजस्थान सरकार ने मई 2019 से फरवरी 2020 तक हुए टिड्डी हमलों से प्रभावित 6 जिलों (बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, जालौर और पाली) के किसानों को मुआवजा दिया। इन जिलों के 59, 878 किसानों को 90.16 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया। करीब 1,43,268 हेक्टेयर कृषि भूमि पर 33 प्रतिशत से ज्यादा फसल खराब हो गई थी। हालांकि आधिकारिक आंकड़े 12 जिलों में टिड्डी हमले की बात करते हैं, लेकिन मुआवजा सिर्फ 6 जिलों में ही दिया गया।


क्या कर रहे हैं कृषि और टिड्डी नियंत्रण एवं अनुसंधान विभाग

टिड्डी नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी एवं राजस्थान कृषि विभाग में संयुक्त निदेशक (पौध संरक्षण) डॉ. सुआलाल जाट ने बताया, "पिछले साल टिड्डी 12 जिलों में आई थी। इस बार पाकिस्तान की सीमा से लगे जिलों के अलावा अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़, राजसमंद, बूंदी, सीकर और झुंझुनूं में पहली बार पहुंची हैं। आगे हवा का रुख तय करेगा कि ये किस तरफ जाएंगी। कृषि विभाग नियंत्रण की हर कोशिश कर रहा है। विभाग की ओर से 45 माइक्रोनियर मशीनें और 600 ट्रेक्टर कैमिकल स्प्रे के लिए दिए हुए हैं। राजस्थान कृषि विभाग ने केन्द्र की टीम को सर्वे के लिए 70 गाड़ियां भी उपलब्ध कराई हुई हैं। साथ ही पांच करोड़ रुपए व्हीकल्स और 3 करोड़ रुपए केमिकल स्प्रे के लिए आवंटित किए हैं. जरूरत होने पर और भी राशि उपलब्ध कराई जाएगी।"

एरियल सर्वे के सवाल पर जाट कहते हैं कि ये भारत सरकार का निर्णय है। खुद मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री ने कई बार इसकी मांग की है, लेकिन अभी तक केन्द्र सरकार की ओऱ से इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

वहीं, टिड्डी नियंत्रण संगठन (एलडब्ल्यूओ) के जोधपुर स्थित मुख्यालय में उपनिदेशक केएल गुर्जर ने विस्तार से गांव कनेक्शन से इस बारे में बात की। उन्होंने बताया, "तेज हवाओं के कारण फिलहाल टिड्डी मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच और उज्जैन की तरफ चली गई है.राजस्थान में बीकानेर में 19 मई को एक दल देखा गया है जो जोधपुर की तरफ आ रहा है। फिलहाल हवा उत्तर से दक्षिण की तरफ है इसीलिए अभी उत्तरी राजस्थान से दक्षिणी राजस्थान की तरफ इनका रुख है। अगर हवा की दिशा बदलेगी तो ये उसी दिशा में बढ़ेगी। अब तक हम 29,814 हेक्टेयर भूमि पर हम केमिकल स्प्रे कर चुके हैं। इस बार अभी तक टिड्डियों के आठ स्वार्म (एक टिड्डी स्वार्म में लाखों की संख्या में टिड्डी होते हैं) आ चुके हैं।'

गुर्जर आगे बताते हैं, "जलवायु स्थितियों के चलते इस बार समय से पहले ही ईरान और बलूचिस्तान में इमेच्योर टिड्डी भारत की तरफ माइग्रेट कर चुकी है। इसीलिए इतनी संख्या में टिड्डी आए हैं। हमें आंकड़े बता रहे हैं कि ईरान और पाकिस्तान में संख्या घट रही है। एक महीने तो ये रहेगा, उसके बाद संख्या में गिरावट होगी। फिलहाल राजस्थान में जो टिड्डी आ रही हैं वे पिंक (टिड्डियों के बच्चे) हैं। अगले 10 दिन में ये पीले यानी वयस्क होंगे। इसीलिए प्रजनन के लिए शायद ये वापस रेगिस्तानी इलाकों की तरफ वापस आएंगी।"

इस बार अभी तक राजस्थान के सरहदी जिलों जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बीकानेर के अलावा टिड्डी नागौर, अजमेर, पाली, सिरोही, सीकर, भीलवाड़ा, चित्तौड़, राजसमंद, बूंदी, सीकर और झुंझुनूं जिलों में भी पहुंच चुके हैं। अजमेर जिले में करीब 50-55 साल बाद टिड्डियां घुसी हैं। इससे किसानों में उनकी फसलों को लेकर डर सताने लगा है।

सांसद-विधायक भी चिंतित

कोरोना वायरस के कारण लगे लॉक डाउन की मार के बाद प्रदेश के आधे जिलों में टिड्डियों की मार भी लोग झेल रहे हैं। बीते दिनों सीएम अशोक गहलोत की सांसद और विधायकों के साथ हुई वीडियो कांफ्रेसिंग में जनप्रतिनिधियों की टिड्डियों को लेकर चिंता सामने आई। विधायकों ने सीएम से अपने क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के उपायों की मांग सीएम के सामने रखी। इस वीडियो कांफ्रेसिंग का विरोध करने वाले नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल नागौर में टिड्डी हमले का जायजा लेने भी पहुंचे। वे कहते हैं, "किसानों पर बेमौसम बारिश के बाद टिड्डी दल का आक्रमण दोहरी मार है। टिड्डियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में ही रोकने की योजना बननी चाहिए। मामले को लेकर भारत सरकार के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व राज्य के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से फोन पर भी बात की हैं और मांग की है कि इस पर जल्दी काबू पाया जाए।"

राजस्थान के पूर्व कृषि मंत्री और भाजपा नेता प्रभूलाल सैनी कहते हैं, "राज्य सरकार को कोशिश करनी चाहिए कि किसानों को कम से कम नुकसान हो। पश्चिमी राजस्थान में कई जगह किसानों ने बाजरा बो दिया गया है। बाड़मेर में अनार की फसल को भी टिड्डी नुकसान पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार को ऐसे किसानों की तुरंत आर्थिक मदद करनी चाहिए।'

पिछली बार 1993 के बाद सबसे बड़ा टिड्डी हमला था

भारत सरकार के टिड्डी नियंत्रण एवं अनुसंधान विभाग के अनुसार, टिड्डियों का अब तक का सबसे बड़ा हमला 1993 में हुआ था। इस साल करीब 172 बार टिड्डियों के झुंडों ने फसलों और वनस्पति को नुकसान पहुंचाया। विभाग ने 1993 में करीब 3.10 लाख हेक्टेयर भूमि का उपचारित किया था। इससे पहले 1964 से लेकर 1989 तक अलग-अलग साल में 270 बार टिड्डी दलों ने भारत का रुख किया था। इसमें 1968 में 167 बार टिड्डी दल राजस्थान और गुजरात में आए थे। मई 2019 से फरवरी 2020 तक दो हजार से ज्यादा टिड्डी स्वार्म भारत में घुसे थे। 11 अप्रैल से अब तक 8 स्वार्म आ चुके हैं। हालांकि इस बार अब तक टिड्डियों को आना जारी है इसीलिए स्वार्म की संख्या कितनी पहुंचेगी इसकी कोई सही आंकलन नहीं किया गया है।

भुखमरी की कगार तक पहुंचा सकते हैं टिड्डी

टिड्डी हमेशा से इंसानों के लिए अभिशाप की तरह ही रहे हैं। लाखों की संख्या में एक दल में रहने के कारण इनके खाने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। कई हेक्टेयर फसलों को टिड्डी दल एक दिन में ही खत्म कर देते हैं। औसतन टिड्डियों का एक छोटा झुंड एक दिन में दस हाथियों, 25 ऊंट या 2500 व्यक्तियों के बराबर खा सकता है। टिड्डी पत्ते, फूल, बीज, तने और उगते हुए पौधों को खाती है। टिड्डियों का प्रकोप कई साल तक भी रहता है। ज्यादा मात्रा में खाने के कारण टिड्डी पूरे फसल चक्र को ही बर्बाद कर देते हैं। जिसके कारण उत्पादन कम होता है और भुखमरी तक की स्थिति आ जाती है।

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