इस दवा से नहीं होता है कैंसर, अफवाहों से बचें : डॉ. अबीर सारस्वत

कब्ज दूर करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा रेनिटिडाइन में कैंसर पैदा करने वाले तत्व मिलने की खबरें आ रही हैं

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   5 Oct 2019 5:46 AM GMT

लखनऊ। "आजकल रेनिटिडिन नाम की दवा के बारे में कुछ खबरें आ रही हैं कि इस दवा में कैंसर पैदा करने वाला कैमिकल नाइट्रोसेमीन पाया गया है। कुछ लोगों ने तो इस दवा को खाना भी बंद कर दिया है। लेकिन सच्चाई यह है की जिन रेनिटिडिन दवा में नाइट्रोसेमीन के मिलने की बात की जा रही है वह तय मानक में ही मिला है, जो मानव शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं है। " यह कहना है लखनऊ के प्रसिद्ध चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अबीर सारस्वत का।

रेनिटिडिन कब्ज की एक चर्चित दवा है। बहुत से लोग इसका प्रयोग करते हैं। भारत में कैडिला फार्मा, जेबी केमिकल्स, डॉ. रेड्‌डी और सन फार्मा जैसी कंपनियां करीब 180 ब्रांड नाम से रेनिटिडिन टैबलेट बनाती हैं। इनमें एसिलॉक, पैनटेक, रेनटेक, जेनटेक जैसे मशहूर ब्रांड शामिल हैं। कुछ दिन से सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कुछ भ्रामक खबरें आ रही हैं, जिससे बहुत से लोग डरे हुए हैं। कुछ लोग जो इसको नियमित खाते थे वे इसे खाना छोड़ दिए हैं।

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सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन जो भारत में दवाइयों की गुणवत्ता, सुरक्षा और क्षमता को नियंत्रित करता है उसने इस दवा को जांच करने के लिए विशेषज्ञ समिति के पास भेज दिया है। अब यह समिति रेनिटिडिन के साथ-साथ अलग-अलग ब्रांड नाम से बिक रही इसी दवा की जांच करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अमेरिका के यूएसएफडीए और यूरोप के ईएमए ने इस दवा पर प्रतिबंध नहीं लगाया है लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय ड्रग कंट्रोलर वीजी सोमानी ने लोगों को सजग रहने को कहा है। साथ ही इस दवा को लेकर अपने डॉक्टर से सलाह लेने के लिए कहा है।

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रेनिटिडिन दवा में जिस कैमिकल नाइट्रोसेमीन के मिलने की बात की जा रही है वह एक कॉमन कैमिकल है। यह दूषित पानी, बीयर, मांस-मछली में भी पाया जाता है। और इतनी मात्रा में पाया जाता कि इसका अधिक सेवन करने पर इंसान बीमार हो सकता है। इसके साथ ही यह सैंपू, साबुन और डिटर्जेंट में भी पाया जाता है।

डॉ. अबीर सारस्वत

" आज तक जिन रेनिटिडिन की दवाओं में यह कैमिकल पाया गया है वह इतनी ही मात्रा में पाया गया है जो मनाव शरीर को नुकसान न पहुंचाती हो। यूएसएफडी ने एक आम जनता को एक नोटिस जारी किया है जिसमें उसने कहा है कि जो लोग रेनिटडिन ले रहे हैं वे उसे लेते रहे, दवा को बंद करने की कोई जरुरत नहीं है। यह इतना खतरनाक मसला नहीं है और इसे समस्या का समाधान किया भी जा रहा है। भारत के ड्रग कंट्रोलर ने भी देश में इस दवा बनाने वाली कंपनियों से कहा है कि वे इस दवा की टेस्टिंग करा लें। कई कंपनियों ने जांच करा भी ली है। कुछ ही दिन में जांच रिपोर्ट आ जाएगी, जिस कंपनी की दवा में यह कैमिकल बढा हुआ मिलेगा वह कंपनी इसे रिप्लेस कर देगी।" डॉ. अबीर ने आगे बताया।

जो लोग इस दवा को लंबे समय से प्रयोग कर रहे हैं क्या उन्हें कैंसर की जांच कराने के सवाल पर डॉ. अबीर का कहना है, " जो लोग इसे लंब समय से खा रहे उन्हें कैंसर की जांच कराने की काई जरुरत नहीं है। सिर्फ रेनिटिडिन ही नहीं कुछ और दवाओं में यह कैमिकल मानक से सिर्फ कुछ अधिक मात्रा में पाया गया था, लेकिन जांच में किसी को कैंसर होने की पुष्टि नहीं हुई थी। "

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