रक्तरंजित : 14 साल की बच्ची , जो बलात्कार के बाद अब 5 महीने के बच्चे की मां है

रक्तरंजित : 14 साल की बच्ची , जो बलात्कार के बाद अब 5 महीने के बच्चे की मां हैअपने बेटे के साथ उमा (बदला हुआ नाम)

खेतों में, स्कूल या शौच के लिए जाते वक़्त बलात्कार ग्रामीण महिलाओं की रोज़मर्रा की सच्चाई है और ऐसे मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जो सुर्खियाँ और हैशटैग नहीं बन सके, ऐसे मामलों पर ध्यान लाने के लिए गाँव कनेक्शन एक विशेष सीरीज रक्तरंजित कर रहा है, पार्ट-3

बाराबंकी/लखनऊ। "जब मेरे पेट में दर्द हुआ तब अम्मा डॉक्टर के पास ले गई पता चला मैं गर्भ से हूं। उस दिन मुझे बहुत मारा गया, दो दिन भूखा रखा, "चौदह वर्षीय उमा (बदला हुआ नाम) बताती हैं। पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने की उम्र में उमा पांच महीने के बच्चे की अविवाहित मां है।

समाज में फिर से उसका अपमान न झेलना पड़े इसके लिए गाँव कनेक्शन की संवाददाता से उसने कचहरी में मुलाकात की। हल्के नीले रंग का सूट पहने, कमजोर शरीर पर अपने पांच महीने के बेटे को एक कंधे से दूसरे कंधे पर लाती हुए बोलती हैं, "घर में काम करने के लिए उसकी (आरोपी) की भाभी बुलाती थी। जब उसने पहली बार मेरे साथ रेप किया तो उसने कहा कि अगर किसी को बोला तो जान से मार देंगे। मेरे साथ वो रेप करता रहा मैंने डर से किसी को नहीं बोला।"

लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले के लोहियापुर गाँव में उमा अपनी विधवा मां और छोटी बहन के साथ हंसी-खुशी रहती थी। कभी-कभी पड़ोसी के घर काम में हाथ बंटाने के लिए जाती थी। उसे नहीं पता था कि जिसको वो भाई मानती है, वहीं उसके साथ दरिंदगी करेगा। महिलाओं के खिलाफ होने वाले ज्यादातर अपराध रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों के द्वारा ही किया जाता हैं।

रक्तरंजित भाग 1 - जब तक आप ये खबर पढ़ कर खत्म करेंगे, भारत में एक और बच्ची का बलात्कार हो चुका होगा

अपने 5 महीने के बच्चे के साथ रेप पीड़ित।

बिन ब्याही बेटी जब मां बनती है तब क्या बीतती है इसका दर्द हम ही जानते हैं।
कमलेशी, पीड़िता की मां

सीरीज का दूसरा भाग यहां पढ़िए- रक्तरंजित : परिवार अक्सर खुद ही दबाते हैं बलात्कार के मामले

उमा आगे बताती हैं, "मेरी पूरी बात बताने के बाद अम्मा उनके घर भी गई लेकिन उन्होंने छोटी जात के कह कर भगा दिया।" अपनी बेटी को न्याय दिलाने के उमा की मां ने 4 अगस्त 2017 को उसी के गाँव में रहने वाले पड़ोसी जिसे वो भैया कहती थी, एफआईआर दर्ज करवाई। अभी भी मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

पुलिस ने आरोपी और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया। दो दिन बाद पिता को छोड़ दिया और युवक को लॉकअप में भेज दिया। आरोपी के परिवार वालों ने अपने बेटे को नाबालिग बताया। जबकि उसकी मां के मुताबिक वो लड़का 20 वर्ष का है। नाबलिग होने के कारण आरोपी को आम जेल की बजाए किशोर सुधार ग्रह फैजाबाद भेज दिया गया। वहां पांच महीने रहने के बाद वो जमानत पर छूट गया।

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उमा से उसका बचपन छिनने वाला आज भी गाँव में खुलेआम घूम रहा है। "उसके परिवालों ने नाबालिग का प्रमाणपत्र झूठा बनवाया है। 3 अगस्त 2011 को बने उसके आधार कार्ड में जन्म तारीख 3 फरवरी 1997 है जबकि इस घटना के बाद 1 सितंबर 2017 को बने स्कूल सर्टिफिेकेट में 3 फरवरी 2000 लिखवाई गई है।" पिछले एक महीने से इस मामले को देख रहे बाराबंकी जिले के वकील किस्मत अली ने गाँव कनेक्शन को बताया।

उन्होंने कहा, "बच्ची को न्याय मिले इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों मे अगर पुलिस सख्त कारवाई करे, तो पीड़िताओं को न्याय जल्दी मिले। ज्यादातर मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है और धाराएं भी नहीं लगाती है।"

ग्रामीण इलाकों में रेप पीड़िताओं का सामाजिक तिरस्कार दर्द बढ़ाता है।

इस बीच रिश्तेदारों और गाँव वालों द्वारा लगातार किये गए अपमान के कारण उमा और उसके परिवार को गाँव भी छोड़ना पड़ा। "जैसे-जैसे इसके महीने बढ़े गाँव वालों के ताने बढ़ते गए। रास्ते में निकलते तो धीरे-धीरे लोग यही बाते करते इसी की बिटिया गर्भ से है। गाँव वालों ने रहना मुश्किल कर दिया था, "उमा की मां ने बताया। उमा को ताने न सुनने पड़े इसके लिए उसकी मां ने ढुकौली गाँव में किराए पर कमरा ले लिया है।

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"बिन ब्याही बेटी जब मां बनती है तब क्या बीतती है इसका दर्द हम ही जानते हैं।" इतना कहते ही उमा की मां कमलेशी की का गला भर आया। "28 नंवबर 2017 को बेटी ने लड़के को जन्म दिया। तब उसकी हालत बहुत खराब थी। खून (हीमोग्लोबिन) 4 प्वाइंट पहुंच गया था।" कमलेशी ने कहा।

बच्चे को जन्म देने के बाद कई प्रक्रियाओं में भी उमा को ज़िल्लत झेलनी पड़ी। "एक बार बच्चे को बुखार आ गया था तब डॉक्टर ने उसके पिता का नाम पूछा न बताने पर डॉक्टर ने बहुत चिल्लाया। तब उन्हें पूरी कहानी बताई।" कमलेशी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "डॉक्टरों की सलाह पर ही टीकाकरण के कागज पर उसके पिता के नाम की जगह रेप के आरोपी का नाम लिख दिया"

कमलेशी हर महीने कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटती है ताकि उसकी बेटी को न्याय मिल जाए और उसके बच्चे उसके पिता का नाम। बार-बार आंखों को ऊपर नीचे करते हुए धीमी-धीमी आवाज में उमा बताती हैं, "जब मां डॉक्टर ने बोला की गर्भ से हूं। तब से पढ़ाई छूट गई। मैं पांचवीं तक पढ़ाई की है।"

(अगर आपके के आस-पास कोई ऐसा मामला है तो हमें ऐसे मामलों के बारे में बताइये, हम पीड़िताओं को न्याय दिलाने का भरसक प्रयास करेंगे।)

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