रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित हुए रवीश कुमार, कहा- 'हर जंग जीतने के लिए नहीं लड़ी जाती'

रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित हुए रवीश कुमार, कहा- हर जंग जीतने के लिए नहीं लड़ी जातीरवीश कुमार को रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

"हर जंग जीतने के लिए नहीं लड़ी जाती... कुछ जंग सिर्फ इसलिए लड़ी जाती हैं, ताकि दुनिया को यह बताया जा सके, कोई है, जो लड़ रहा है..." ये लाइन पत्रकार रवीश कुमार ने उस समय कहीं जब उन्हें रेमॉन मैगसेसे पुरस्कार से मनीला में सम्मानित किया गया।

एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा, "जब से रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार की घोषणा हुई है, मेरे आसपास की दुनिया बदल गई है। जब से मनीला आया हूं, आप सभी के सत्कार ने मेरा दिल जीत लिया है। आपका सत्कार आपके सम्मान से भी ऊंचा है। आपने पहले घर बुलाया, मेहमान से परिवार का हिस्‍सा बनाया और अब सम्मान के लिए यहां सब जमा हुए हैं।"

रवीश कुमार ने कहा, "आमतौर पर पुरस्कार के दिन देने वाले और लेने वाले मिलते हैं और फिर दोनों कभी नहीं मिलते हैं। आपके यहां तो ऐसा नहीं है, आपने तो इस एहसास से भर दिया है कि जरूर कुछ अच्छा किया होगा, तभी आपने चुना है। हम सब सामान्य लोग हैं, आपके प्यार ने मुझे पहले से ज्यादा जिम्मेदार और विनम्र बना दिया है।"


रवीश कुमार ने कहा कि दुनिया असमानता को हेल्थ और इकोनॉमिक आधार पर मापती है, मगर वक्त आ गया है कि हम ज्ञान असमानता को भी मापें। आज जब अच्छी शिक्षा खास शहरों तक सिमटकर रह गई है, हम सोच भी नहीं सकते कि कस्बों और गांवों में ज्ञान असमानता के क्या खतरनाक नतीजे हो रहे हैं। जाहिर है, उनके लिए व्हॉट्सएप यूनिवर्सिटी का प्रोपेगंडा ही ज्ञान का स्रोत है। युवाओं को बेहतर शिक्षा नहीं पाने दी गई है, इसलिए हम उन्हें पूरी तरह दोष नहीं दे सकते।

उन्‍होंने कहा कि इस संदर्भ में मीडिया के संकट को समझना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर मीडिया भी व्हॉट्सएप यूनिवर्सिटी का काम करने लगे, तब समाज पर कितना बुरा असर पड़ेगा। अच्छी बात है कि भारत के लोग समझने लगे हैं, तभी मुझे आ रही बधाइयों में बधाई के अलावा मीडिया के 'उद्दंड' हो जाने पर भी चिंताएं भरी हुई हैं। इसलिए मैं खुद के लिए तो बहुत खुश हूं, लेकिन जिस पेशे की दुनिया से आता हूं, उसकी हालत उदास भी करती है।


रवीश कुमार ने कहा, "क्या हम समाचार रिपोर्टिंग की पवित्रता को बहाल कर सकते हैं? मुझे भरोसा है कि दर्शक रिपोर्टिंग में सच्चाई, अलग-अलग प्लेटफॉर्मों और आवाजों की भिन्नता को महत्व देंगे। लोकतंत्र तभी तक फल-फूल सकता है, जब तक खबरों में सच्चाई हो। मैं रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार स्वीकार करता हूं, इसलिए कि यह पुरस्कार मुझे नहीं, हिन्दी के तमाम पाठकों और दर्शकों को मिल रहा है, जिनके इलाके में ज्ञान असमानता ज्यादा गहरी है, इसके बाद भी उनके भीतर अच्छी सूचना और शिक्षा की भूख काफी गहरी है।

उन्‍होंने कहा कि बहुत से युवा पत्रकार इसे गंभीरता से देख रहे हैं। वे पत्रकारिता के उस मतलब को बदल देंगे, जो आज हो गया है। मुमकिन है, वे लड़ाई हार जाएं, लेकिन लड़ने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है। हमेशा जीतने के लिए ही नहीं, यह बताने के लिए भी लड़ा जाता है कि कोई था, जो मैदान में उतरा था।

गौरतलब है कि रेमन मैगसेसे पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिये प्रदान किया जाता है। इसे एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। यह रमन मैगसेसे पुरस्कार फाउन्डेशन द्वारा फ‍िलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रमन मैगसेसे की याद में दिया जाता है।

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