परामर्शदाता कंपनियों ने की रीयल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मांग

रीयल एस्टेट परामर्शदाता कंपनियों ने केंद्र सरकार से आगामी बजट में रीयल एस्टेट क्षेत्र को उधोग का दर्जा देने की मांग की है.

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परामर्शदाता कंपनियों ने की रीयल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मांगप्रतीकात्मक तस्वीर (ट्वीटर)

नई दिल्लीः रीयल एस्टेट बाजार के बारे में परामर्श सेवा देने वाली कंपनियों ने इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने वित्त मंत्री से यह मांग करते हुए कहा कि इस साल के बजट में मकानों पर जीएसटी का बोझ कम किए जाने की भी मांग की। इसके अलावा आवास ऋण पर सालाना डेढ़ लाख रुपए तक के मूल धन के भुगतान पर आयकर में अलग से कटौती का प्रावधान करने की भी सिफारिश की गई है।

रीयल एस्टेट क्षेत्र की सलाहकार कंपनी नाइट फ्रेंक ने आयकर कानून की धारा 80सी के तहत आवास ऋण के मूल की वापसी पर अलग से डेढ लाख रुपये तक की कर छूट दिये जाने की मांग की है। उसका कहना है कि आवास क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये सरकार को आवास ऋण की मूल राशि के डेढ़ लाख रुपए तक के वार्षिक भुगतान पर अलग से कर छूट देनी चाहिये। इससे रीयल एस्टेट क्षेत्र में मांग बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।

नाइट फ्रेंक ने बजट पूर्व सिफारिश में कहा है कि इस क्षेत्र में अभी काफी मांग है और गैर- बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) के संकट से स्थिति और जटिल हुई है। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने सस्ते मकानों की योजनाओं में जीएसटी पर जमीन की कीमत के लिए एबेटमेंट की दर मौजूदा एक तिहाई से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है।


(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

  

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