सीमेंट के बने टैंकों में करें मछली पालन, सरकार भी दे रही अनुदान

सीमेंट के बने टैंकों में करें मछली पालन, सरकार भी दे रही अनुदान

लखनऊ। मछली पालन शुरू करने के लिए अब आपको बड़े-बड़े तालाब और ज्यादा पानी की जरूरत नहीं है। रिसर्कुलर एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) तकनीक की मदद से सीमेंट के टैंक बनाकर मछली पालन कर सकते हैं। इस तकनीक के लिए केंद्र सरकार मदद भी करती है।

आरएएस (RAS) वह तकनीक है, जिसमें पानी का बहाव निरंतर बनाए रखने लिए पानी के आने-जाने की व्यवस्था की जाती है। इसमें कम पानी और कम जगह की जरूरत होती है। सामान्य तौर पर एक एकड़ तालाब में 20 हजार मछली डाली हैं तो एक मछली को 300 लीटर पानी में रखा जाता है जबकि इस सिस्टम के जरिए एक हजार लीटर पानी में 110-120 मछली डालते है। इस हिसाब से एक मछली को केवल नौ लीटर पानी में रखा जाता है।


देश में मछली खाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 में भारत में मछली की खपत चार गुणा बढ़ जाएगी। ऐसे में इस व्यवसाय को शुरू करने में भी कई संभावनाएं है।

इस तकनीक से होने वाले लाभ के बारे में मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश के सहायक निदेशक डॉ हरेंद्र प्रसाद ने बताया, ''अगर कोई मछली पालक इस तकनीक से मछली पालन करना चाहता है तो उसके लिए 625 वर्ग फीट और 5 फीट गहराई का सीमेंट का बना टैंक बनाने होंगे। इसमें एक टैंक में 4 हजार मछली पाली जा सकती है। प्रदेश में कई मछली पालकों ने इस सिस्टम को लगाया भी गया है और इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं।''

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आरएएस तकनीक को भारत सरकार ने नीली क्रांति के अंर्तगत रखा है और पूरे देश में इस परियोजना को लागू करने की योजना बनाई है। इस तकनीक के लिए मिलने वाले अनुदान के बारे में डॉ हरेंद्र प्रसाद बताते हैं, "भारत सरकार द्वारा नीली क्रांति के अंतर्गत 'रिसरकुलर एक्वाकल्चर सिस्टम' के नाम से योजना भी शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत मत्स्य पालक को 50 लाख की यूनिट कॅास्ट की दर से एक लघु इकाई का प्रोजेक्ट लगाने का प्रावधान है। '


इस योजना में मिलने वाले अनुदान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ प्रसाद आगे बताते हैं, ''केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस परियोजना के अंर्तगत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत अनुदान की राशि दी जाती हैऔर कमजोर वर्ग जिसके अंर्तगत महिला, एससी, एसटी सम्मिलित हैं, उन्हें 60 प्रतिशत अनुदान राशि दी जाती है। 20 लाख रुपए के प्रोजेक्‍ट में से लाभार्थी को 5 लाख रुपए देना होगा। बाकी 7 लाख 50 हजार रुपए केंद्र सरकार और 3 लाख 75 हजार रुपए राज्‍य सरकार द्वारा सब्सिडी के तौर पर दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार 3 लाख 75 हजार रुपए का बैंक लोन भी दिलाएगी।''

बाराबंकी से करीब आठ किलोमीटर दूर जहांगीराबाद ब्लॉक के मिश्रीपुर गाँव के परवेज खान पिछले चार वर्ष पहले इस तकनीक को अपनाया था और आज वह तकनीक से अच्छा लाभ भी कमा रहे हैं। इस तकनीक की मदद से परवेज ने ढ़ेड एकड़ में 25x25 फीट के 38 टैंक बनाए हुए हैं। इन टैंकों में करीब चार लाख पंगेशियस मछली है।

iबाराबंकी के जहांगीराबाद क्षेत्र के मिश्रीपुर गाँव में परवेज खान के आरएएस सिस्टम का निरीक्षण उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही।


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इस तकनीक के बारे में परवेज खान बतातें हैं, ''एक एकड़ के तालाब में 15 से 20 हज़ार पंगेशियस मछलियां पाली जाती हैं। लेकिन इस तकनीक के एक एकड़ के तालाब में 8 से 10 टन मछली पाली जा सकती है। इसमें जो पानी होता है उसको फेका नहीं जाता है टैंक में ट्रीटमेंट के आधार उस पानी दुबारा प्रयोग किया जाता है पानी की बचत होती और उत्पादन भी ज्यादा होता है।''

यहां कर सकते हैं संपर्क-

उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड

तृतीय तल, लेखराज मार्केट -2 इन्दिरा नगर, लखनऊ

0522- 2740483, 2740067, 2740414




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