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रिलायंस पावर प्लांट के जिस ऐश डैम को अधिकारियों ने रिपोर्ट में सही बताया था, उसके टूटने से छह की मौत, मवेशी बहे, फसलें बर्बाद

Mithilesh DharMithilesh Dhar   10 April 2020 8:30 PM GMT

मध्य प्रदेश के जिला सिंगरौली में स्थिति रिलायंस पावर प्लांट का ऐश डैम (राखड़ बांध) टूटने से छह लोगों की मौत हो गई है जबकि दो लोगों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। डैम टूटने से आस-पास के कई घरों में जहरीला मलबा भर गया है, कई एकड़ की फसलें भी बर्बाद हो गई हैं, कई मवेशी भी बह गये।

सिंगरौली के बैढ़न थाना क्षेत्र से लगभग 15 किमी दूर सासन स्थित रिलायंस समूह के 3960 मेगावाट वाले अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट का सिद्धीखुर्द (हिर्रवाह) में बना राखड़ बांध शुक्रवार (10 अप्रैल 2020) शाम लगभग चार बजे टूट गया। पास का गांव हर्रहवा मलबे से पट गया है। मलबे से दो शवों को तो तुरंत निकाला लिया गया। एक शव दो दिन बाद मिला, एक की तलाश अभी भी जारी है। के तीन शव बात निकाले गये हैं। जिनकी पहचान अभिषेक कुमार शाह (08) और दिनेश साहू (35) के रूप में हुई है। चार लोग अभी भी लापता हैं।

लंबे सयम से विस्थापितों के हक की लड़ाई लड़ रहे रहे संदीप शाह अक्टूबर 2019 में रिलायंस के इसी पावर प्लांट के मेन गेट के बाहर कई मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। उसमें एक मांग यह भी थी कि सिद्धीखुर्द में रिलायंस पावर प्रोजेक्ट के डैमेज ऐश डैम को ठीक कराया जाये अन्यथा इससे बहुत बड़ा हादसा हो सकता है।

इसके बाद 25 अक्टूबर 2019 को सिंगरौली जिला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जिला लोक निर्माण विभाग, एसडीएम और तहसीलदार तकनीकी अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में इस ऐश डैम को एक दम ठीक बताया और कहा कि इसके टूटने की संभावना एक दम नहीं है। तब इसे और ऊंचा करने की बात भी हुई थी।

अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे संदीप।

संदीप गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "मेरे धरने पर बैठने के बाद जिलाधिकारी और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत हुई। उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से जिला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दूसरे विभागों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऐश डैम ठीक है, वह नहीं टूटेगा। इसके बाद रिलायंस कंपनी के अधिकारियों ने जिलाधिकारी के सामने कहा था कि ऐश डैम नहीं टूटेगा और अगर टूटता है तो पूरी जिम्मेदारी हमारी होगी।"

"जिले के कई विभागों ने अपनी जांच के बाद कहा था कि ऐश डैम की ऊंचाई को बढ़ाया जायेगा, लेकिन ऊंचाई नहीं बढ़ाई गयी और यह हादसा हो गया। अब देखिये इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।" संदीप आगे कहते

सासन पावर प्लांट ऐश डैम को सही कराने की मांग अक्टूबर 2019 में की गई थी, लेकिन तब कई विभागों ने इसे सही बताया था।

संदीप शुक्रवार को देर रात तक घटनास्थल पर ही थे। रात लगभग साढ़े 12 बजे जब हमारी उनसे बात हुई तो उन्होंने बताया कि कम से कम आठ लोग अभी भी लापता हैं। लॉकडाउन होने वजह से सभी लोग घरों में ही थे। सैकड़ों मवेशी भी बह गये हैं। बांध के निचले हिस्से में लगी कई एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है।

घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी केवीएस चौधरी ने मीडिया को बताया, "जो लोग फंसे है उन्हें निकालने की कोशिश जारी है। इसके वाराणसी से एनडीआरएफ की टीम को मदद के लिए बुलाया गया है। एनटीपीसी और एनसीएल से भी मदद मांगी गई है। फसलों का कितना नुकसान हुआ है इसका आंकलन हम कल करेंगे। बार-बार लापरवाही के बाद भी कंपनी ने इसकी सुधि नहीं ली। हादसे के कंपनी की लापरवाही जिम्मेदार है। हम कंपनी पर सख्त कार्रवाई करेंगे।"

ऐश डैम का जहरीला मलबा रिहंद बांध में जा रहा।

ऐश डैम (राखड़ बांध) में बिजली संयंत्रों में कोयले के जलने के बाद निकली राख जिसे फ्लाई ऐश भी कहा जाता है, को जमा किया जाता है।

ऐश डैम का मलबा नालियों से होते हुए रेणुका नदी पर बने रिहंद बांध में चला गया है। इस बांध से सिंगरौली-सोनभद्र के लगभग 20 लाख लोगों को पीने की पानी की सप्लाई होती है।

पर्यावरण संरक्षण और वनों एवं प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए बने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम (एनजीटी) के अधिनियम के अनुसार ऐश डैम में जो मलबा होता है उसमें भारी धातु जैसे-आर्सेनिक, सिलिका, एल्युमिनियम, पारा और आयरन होते हैं, जो दमा, फेफड़े में तकलीफ, टीबी और यहां तक कि कैंसर तक का कारण बनते हैं।

मलबे से महिला को निकालने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया।

सुप्रीम कोर्ट में वकील और पर्यावरणविद् अश्वनी कुमार दूबे कहते हैं, "ये तीसरी घटना है जब रिहंद बांध में फ्लाई ऐश को बहाया गया है। एनजीटी ने मेरी की याचिका में इसे लेकर तमाम दिशा-निर्देश दिये हैं और कहा कि फ्लाई ऐश नदी में नहीं जाना चाहिए। यह बहुत बड़ी घटना है। आश्चर्य वाली बात तो यह है कि चार साल पहले इंडस्ट्री लगी और ऐश डैम टूट गया। सच तो यह कि कंपनियां किसी भी नियम का पालन नहीं कर रही हैं, जबकि सिंगरौली अति प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है।"

गांवों में घुसा मलबा।

घटना के बाद क्षेत्रीय विधायक रामलल्लू वैश्व भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा, "यह सब लापरवाही से हुआ है। मैंने छह महीने पहले प्रशासनिक अधिकारियों और रिलायंस प्रबंधन को आगाह किया था कि राख बांध के ऊपर से पानी छलकता है, इसके चलते किसी भी समय बांध टूट सकता है। लेकिन इस पर ध्यान ही नहीं दिया गया।"

इस मामले पर रिलायंस सासन अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट के सीनियर मैनेजर (सीएसआर) नागेंद्र सिंह ने कंपनी का पक्ष रखते हुए गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "सासन अल्ट्रा पावर प्लांट में राखड़ डैम की दीवारें बहुत मजबूत हैं। यह हादसा कैसे हुआ इस पर हम जांच कर रहे हैं। जिला प्रशासन की टीम यहां पहुंच चुकी है। उनसे जो आदेश मिलेगा हम वही करेंगे।"

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नागेंद्र सिंह ने आगे कुछ और बताने से यह कहते हुए मना कर दिया कि बाकी की जानकारी कंपनी के बड़े अधिकारी देंगे। हमें इतना ही पता है।

अक्टूबर में ऐश डैम की जांच रिपोर्ट बनाने में शामिल एसडीएम सिंगरौली ऋषि पवार से इस मुद्दे पर बात करने की पूरी कोशिश की गई लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही मैसेज का जवाब दिया।


सिंगरौली जिला प्रशासन ने शनिवार शाम एक विज्ञप्ति जारी करके बताया कि रिलायंस पावर प्लांट सासन को ऐश डैम को लेकर चार अक्टूबर 2019, 22 अक्टूबर 2019, 30 अक्टूबर 2019 और फिर 12 दिसंबर 2019 को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया था, लेकिन प्लांट प्रबंधन ने समय पर उचित कार्यवाही नहीं की जिस कारण यह हादसा हुआ।

विज्ञप्ति में प्लांट प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की भी बात की गई है साथ में बताया गया कि रिलायंस परियोजना व्यस्क मृतक को 10 लाख रुपए और मृतक बच्चों के परिजन को पांच लाख रुपए, परिवार के सदस्य के नौकरी और आश्रित परिजन को 7,950 रुपए का निर्वहन भत्ता दिया जायेगा।

सोनभद्र-सिंगरौली के लोगों के लिए काल बनते ऐश डैम रहा है बांध

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थिति सिंगरौली-सोनभद्र पट्टी में कोयले पर आधारित 10 पावर प्लांट हैं, जो 21,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं। सोनभद्र जिले के शक्तिनगर क्षेत्र स्थित भारत के सबसे बड़ी बिजली उत्पादन संयंत्र नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) विंध्याचल का शाहपुर स्थित विशालकाय ऐश डैम (राखड़ बांध) छह अक्टूबर, 2019 को टूट गया था। तब भी कई मवेशी बह गये थे, कइ एकड़ की फसल भी बर्बाद हो गई थी।

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रीवा के क्षेत्रीय अधिकारी आरएस परिहार इस घटना को पर्यावरण के लिए बड़ा नुकसान मानते हैं। वे कहते हैं, "एनटीपीसी विंध्याचल (सिंगरौली) की त्रासदी एस्सार की हुई घटना से बहुत बड़ी थी। इससे क्षेत्र का इकलौता पीने के पानी का स्रोत डैमेज हुआ। प्लाई ऐश डैम का गड्ढा बहुत पुराना था जिस कारण यह दुर्घटना हुई। लगभग 35 लाख मीट्रिक टन प्लाई राख जमा थी जो नालों से होकर रिहंद बांध में चली गई थी जो इससे पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है।"

वर्ष 2019 में ही आठ अगस्त को एस्सार पावर प्लांट का राखड़ डैम तेज बारिश की वजह से टूट गया था। इसकी चपेट में आने से सैकड़ों मवेशियों की मौत हो गई थी और 450 किसानों की 198 एकड़ की फसल चौपट हुई थी। इससे पहले 13 अप्रैल 2014 को भी सिंगरौली के एस्सार पावर प्लांट का ऐश डैम टूट गया था। इसकी जद में आये खेत आज भी बंजर हैं।

सिंगरौली सीरीज की खबरें यहां पढ़ें-

सिंगरौली पार्ट 1- बीस लाख लोगों की प्यास बुझाने वाली नदी में घुली जहरीली राख, कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा
सिंगरौली पार्ट 2- राख खाते हैं, राख पीते हैं, राख में जीते हैं
सिंगरौली पार्ट 3- मौत का पहाड़, सांसों में कोयला और जिंदगी में अंधेरा
सिंगरौली पार्ट 4- लोगों को जागरूक करने वाला पर्यावरण का सिपाही अब बैसाखी के सहारे चल रहा

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