उत्तर प्रदेश: क्यों अमेठी के इन गांवों में कोई नहीं ब्याहना चाहता अपनी बेटी

अमेठी देश के चर्चित इलाकों में एक है। चुनावी सरगर्मियों के बीच लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के नेताओं के फिर चक्कर लगना शुरु हो गए हैं। लेकिन राजनीतिक रुप से हाईप्रोफाइल अमेठी में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां पीने के पानी की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक खराब पानी के चलते उनके यहां लड़कों की शादियों में मुश्किलें आती हैं।

Rohit UpadhyayRohit Upadhyay   7 Dec 2021 9:40 AM GMT

उत्तर प्रदेश: क्यों अमेठी के इन गांवों में कोई नहीं ब्याहना चाहता अपनी बेटीअमेठी जिले के जंगल रामनगर ग्राम पंचायत के कई गांव खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। फोटो- रोहित उपाध्याय

भूसूपार, अमेठी (उत्तर प्रदेश)। "हमारे गांव का पानी इतना खराब है कि कोई अपनी बहन-बेटी की शादी यहां नहीं करना चाहता है। इतने साल हो गए, हम सारे गांव वाले नेताओं से कई बार मिलकर अपनी परेशानी बता चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। हमें समझ नहीं आता है कि हम अपने भविष्य पर ध्यान दें या पानी की समस्या पर अटके रहें।" ये कहना है शिवशंकर वर्मा (24 वर्ष ) का जो अमेठी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले भूसूपार गांव के निवासी हैं।

अमेठी विधानसभा क्षेत्र में आने वाली जंगल रामनगर ग्राम पंचायत में भुसूपार और कुर्मी का पुरवा सहित आस-पास के कई गांवों में ज़मीन से खारा पानी निकलता है, जिसकी वजह से ग्रामीण परेशान हैं। पीने के पानी की दूसरी कोई सुविधा न होने से कई बार मजबूरन लोगों को खारा पानी पीना पड़ता है, जिसकी वजह से गांव में रहने वाले लगभग हर इंसान के दांत पीले नजर आते हैं। कुछ लोगों को पेट दर्द की शिकायत रहती है तो कई लोगों को डायरिया तक हो जाता है। खाना पकाने में अगर खारे पानी का इस्तेमाल किया जाए तो दाल नहीं पकती है या फिर खाना बेस्वाद बनता है।

गांव के ही 67 वर्षीय लल्लन यादव बताते हैं, "न तो इस पानी से हम नहा सकते हैं और न ही इसका इस्तेमाल हम खाना पकाने में कर सकते हैं। इस पानी से दाल अगर बनाने की कोशिश हम करते हैं तो घंटों उबालने के बाद भी दाल नहीं पकती है।'

लल्लन यादव की बात को आगे बढ़ाते हुए भूसूपुार गांव की ही फूलकली (53 वर्ष ) बताती हैं कि अगर कोई इस पानी को पी लेता है तो उसका पेट खराब हो जाता है।

नीतेश जो अपने घर में हैंडपंप होने के बावजूद रोज 2 किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाते हैं। फोटो- रोहित उपाध्याय

पानी के इर्दगिर्द घूमती है दिनचर्या

लखनऊ से करीब 130 किलोमीटर दूर अमेठी से भूसूपार गांव के लोगों के मुताबिक उनके पास साफ पानी का एक ही विकल्प है, दूसरे गांवों से पानी लाना।

भूसूपार और कुर्मी का पुरवा समेत दूसरे गांवों में जो लोग रहते हैं उनकी दिनचर्या पानी के इर्द-गिर्द घूमती है। बच्चों को घर से दो किलोमीटर दूर साइकिल से पानी लाने जाना पड़ता है, जिस वजह से कई बार वे स्कूल भी देरी से पहुंचते हैं, घर की महिलाओं का बहुत सारा वक्त पानी लाने में निकल जाता है और वे घर के दूसरे ज़रूरी काम नहीं कर पाती हैं।

कुर्मी का पुरवा गांव के नितेश (10 साल) रोज़ 2 किलोमीटर साइकिल चलाकर पानी लाने दूसरे गांव जाते हैं। नितेश ने बताया कि इसकी वजह से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है, वे कई बार स्कूल के लिए लेट हो जाते हैं।

अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पीने के साफ पानी की कमी की भयावहता का अंदाज़ा इसी बात से लग जाता है कि उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 63 जिलों के पानी में निर्धारित सीमा से अधिक फ्लोराइड है और 25 जिले उच्च आर्सेनिक से प्रभावित हैं।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के 2019 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 18 जिले ऐसे हैं जहां के भूजल में फ्लोराइड और आर्सेनिक दोनों की मात्रा बहुत ज्यादा है। भारतीय मानक ब्यूरो' (बीआईएस) पेयजल मानक आईएस 10500:2012 के मुताबिक पीने के पानी में फ्लोराइड की 'स्वीकार्य' सीमा 1 मिलीग्राम/लीटर निर्धारित की गई है, लेकिन एक सुरक्षित जल स्रोत का अभाव होने की स्थिति में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम/लीटर तक हो सकती है। इसी तरह, पीने के पानी में आर्सेनिक की मात्रा के लिए 0.01 मिलीग्राम/लीटर की सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन पेयजल स्रोत के अभाव की स्थिति में इसकी मात्रा भी 0.05 मिलीग्राम/लीटर तक हो सकती है। लेकिन, उत्तर प्रदेश में कुछ इलाके ऐसे हैं जहां फ्लोराइड का स्तर निर्धारित सीमा से कहीं ज्यादा है।

जल संसाधन मंत्रालय के अतंर्गत केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा तैयार ग्राउंड वॉटर ईयर बुक 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार मथुरा जिले के बलदेव ब्लॉक में फ्लोराइड का स्तर 5.9 मिलीग्राम/लीटर तक दर्ज किया गया है।

अमेठी में स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक यहां फ्लोराइड की समस्या नहीं है। जिला अस्पताल अमेठी में सीनियर कंसलटेंट डॉ. महेंद्र कुमार तिवारी गांव कनेक्शन को बताते हैं, "दांतों का पीलापन खारे पानी की वजह से नहीं बल्कि पानी में फ्लोराइड की मात्रा के चलते है, लेकिन अमेठी में हमें अभी तक फ्लोरोसिस का कोई केस नहीं मिला है।"

वो आगे बताते हैं, "अगर पानी खारा है तो सोडियम कंटेट (नमक की मात्रा) ज्यादा होने से शरीर में सूजन, गुर्दे की दिक्कत के अलावा वो सभी समस्याएं हो सकती है तो नमक की मात्रा ज्यादा होने से होती है।"

फ्लोरोसिस वो बीमारी होती है जिसमें फ्लोराइड युक्त पानी लगातार पीने से दांत पीले पड़ जाते हैं और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

भूसूपार और कुर्मी का पुरवा समेत आसपास के गांवों में पानी के बारे में बात करने पर उपजिलाधिकारी संजीव कुमार मौर्या ने कहा उनकी हाल में ही यहां तैनाती हुई, ये मामला उनके संज्ञान में नहीं है लेकिन वो इसकी जांच करवाएंगे।'

उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं। विकास गिनाने और आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज है। 2019 से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी यहां से लोकसभा सांसद है। इससे पहले 2004 से लेकर 2019 तक राहुल गांधी यहां से सांसद रहे हैं। इसके अलावा सोनिया गांधी से लेकर राजीव गांधी और संजय गांधी तक अमेठी का संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लेकिन हाईप्रोफाइल अमेठी के कुछ गांव अभी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं।

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फूलकली के मुताबिक जो इस पानी को पी लेता है उसका पेट खराब हो जाता है। फोटो- रोहित उपाध्याय

अमेठी में जलजीवन मिशन के तहत 4.25 फीसदी घरों में पानी

जलजीवन मिशन की वेबसाइट के हर घर तक नल से जल मामले में अमेठी 75 जिलों में नीचे से पांचवें पायदान पर है। अनुसार 6 दिसंबर 2021 तक आंकड़ों के अनुसार जिले के 3,10,578 कुल हाउस होल्ड में से सिर्फ 13,200 घरों में पाइप लाइन से पानी पहुंचा है। यानि कुल घरों के अनुपात में महज 4.25 फीसदी है।

जंगल रामनगर तहसील में भुसूपुर के आसपास के गांवों में भी नल से पानी की आपूर्ति होती है। पाइप लगाई गई हैं, हालांकि उसको भी लेकर कई सारी दिक्कतें हैं जैसे गंदे पानी की सप्लाई होती और कभी-कभार सप्लाई होती है। लेकिन कुर्मी का पुरवा के लोगों को वो भी नसीब नहीं।

गांव कनेक्शन से बात करते हुए एसडीएम संजीव कुमार मौर्य ने कहा, "जल जीवन मिशन कई गांव चिन्हित किए गए हैं। वहां पर जमीन भी तय हो गई है। वाटर टैंक बनाकर पानी सप्लाई करेंगे। जल्द ये काम शुरु होगा।"

खबर प्रकाशित होने के बाद गांव कनेक्शन को टि्वटर पर दिए गए डीएम अमेठी के अधिकारिक ट्वीटर हैंडल से बताया गया कि जंगल रामनगर ग्रामीण पेयजल योजना 1981-82 में निर्मित हुई थी, जिसमें 6 गांवों के 24 मजरे शामिल थे। वर्तमान में योजना आंशिक रुप से संचालित है , जिसमें 108 गृह संयोजन के माध्यम से आपूर्ति की जा रही है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल दिया जाना प्रस्तावित है, जिसमें उक्त योजना का पुर्नगर्ठन किया है।

10 हजार मतदाता वाली है ये ग्राम पंचायत

जंगलराम नगर ग्राम पंचायत अमेठी की बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल है। यहां की आबादी 20 हजार से ज्यादा है, जिसमें 10 हजार से मतदाता हैं।

मौजूदा ग्राम प्रधान राहुल वर्मा के पिता और प्रतिनिधि बृजलाल वर्मा ने बताया कि पंचायत के 5 गांवों पानी भूसुपार, कुर्मीपुरवा, गोडवा, उतरहिया में दिक्कत है, जिनमें 2000 से ज्यादा लोग रहते हैं। कुछ जगह नल से पानी की सप्लाई हो रही है। इन गांवों में पानी के लिए सर्वे हुआ है।"

वहीं पूर्व प्रधान प्रधान उर्मिला के पति और प्रधान प्रतिनिधि रहे जगदीश प्रसाद के मुताबिक पानी की दिक्कत कम से कम 10 गांवों में है, जहां के 5000 लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावित होते हैं।

वो फोन पर बताते हैं, "भूसूपार, कुर्मी का पुरवा, सेमरावा और पूरे परसादी समेत 10 गांव में खारे पानी की दिक्कत है। जो इंडिया मार्के हैंडपंप लगे हैं उनसे भी खारा पानी निकलता है। हमारे यहां करीब 70 फीसदी इलाके में जलनिगम पानी की सप्लाई करता है लेकिन वो पानी कई जगह पहुंचता नहीं है। इन गाँवों पानी की समस्या के लिए हमने लेटर दिया था, सपा सरकार में विधायक (गायत्री प्रजापति अब जेल में) के समय में टंकी के लिए सर्वे हुआ था, दोबारा भी सर्वे हुआ अभी बात चल रही है।"

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लल्लन यादव के मुताबिक उनके गांव का पानी ऐसा ही की दाल ही नहीं पकती है। खारे पानी के चलते खेती और पशुपालन भी प्रभावित हो रहा है। फोटो- रोहित उपाध्याय

दूषित पानी का आजीविका के साथ ही खेती और पशुपालन पर भी असर

ऐसा नहीं है कि खारे पानी से सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती है या फिर केवल वक्त ज़ाया होता है। गांव के अधिकतर लोगों की रोज़ी-रोटी खेती और पशुपालन पर निर्भर है। खारे पानी की वजह से खेती और पशुपालन में भी समस्याएं आती हैं।

शिवशंकर (24 वर्ष) ने अपने खेतों की तरफ इशारा करते हुए बताया कि कई बार ऐसा हुआ है जब खारे पानी से सिंचाई के बात गेहूं और सरसों जैसी फसलों की कोमल पत्तियों को नुकसान पहुंचता है और मिट्टी बढ़िया (उपजाऊ) होने के बावजूद अच्छी पैदावार नहीं हो पाती है। इसी तरह उन्होंने बताया कि गाय और भैंस भी खारा पानी नहीं पीती हैं।

सरकारी रवैये से नाराज़ लल्लन यादव कहते हैं, "ये किसी एक पार्टी की बात नहीं है यहां स्मृति ईरानी भी आती हैं, राहुल गांधी भी आते हैं और विधायक गरिमा सिंह भी आती हैं। गांव वालों ने मिलकर कई बार इन नेताओं को एप्लीकेशन (प्रार्थना पत्र) देकर समस्या से अवगत कराया लेकिन कोई नहीं सुनता है। वोट मांगने सभी नेता आते हैं लेकिन जीतने के बाद कोई भी वापस देखने नहीं आता है।

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