कानपुर से आईआईटी की पढ़ाई फिर जापानी लड़की से शादी, अब मिला देश की बुलेट ट्रेन का जिम्मा

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   12 Sep 2017 2:27 PM GMT

कानपुर से आईआईटी की पढ़ाई फिर जापानी लड़की से शादी, अब मिला देश की बुलेट ट्रेन का जिम्मादेश की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के सलाहकार बने आईआईटीयन संजीव सिन्हा

नई दिल्ली। देश में बुलेट ट्रेन परियोजना को चलाने का जिम्‍मा जापान रेलवे ने एक भारतीय को सौंपा है। इनका नाम संजीव सिन्‍हा है। संजीव भारत में राजस्‍थान के रहने वाले हैं और पिछले 20 साल से जापान में रह रहे हैं। उन्‍होंने आईआईटी से पढ़ाई की है। वह गोल्‍डमैन सैक्स समेत कई ग्‍लोबल फर्म के लिए काम कर चुके हैं।

आपको बता दें कि इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का भूमि-पूजन कार्यक्रम अहमदाबाद में 14 सितंबर को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होना है।

मैं दो देशों के बीच सेतु का काम करूंगा

इस हाई स्पीड रेल परियोजना को पूरा करने में करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। परियोजना के लिए सलाहकार के तौर पर अपनी नियुक्ति के बाद सिन्हा ने कहा, 'मैं दो देशों के बीच सेतु का काम करूंगा। यह एक प्रतिष्ठाजनक परियोजना है, लेकिन काफी उलझाने वाली है। राजनीतिक इच्छा को वास्तविक कार्यान्वयन में परिवर्तित करने के लिए बहुत कुछ लगता है।

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बैंक से लोन लेकर पिता ने आईआईटी में कराई पढ़ाई

देश की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के सलाहकार बने आईआईटीयन संजीव सिन्हा बाड़मेर के रहने वाले हैं। बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली ही कोशिश में आईआईटी में सिलेक्शन हो गया। पिता ग्रिफ में नौकरी करते थे, लेकिन सैलरी कम होने से बैंक से कर्ज लेकर बेटे की आईआईटी की पढ़ाई पूरी करवाई।

जापानी लड़की को बनाया हमसफर

राजस्थान के बाड़मेर शहर की अंबेडकर कॉलोनी निवासी वीरेंद्र सिन्हा के दो बेटे संजीव और राजीव हैं। राजीव सिन्हा सूरत के एक बैंक में एजीएम है। मां उषा रानी का 14 साल पहले निधन हो गया। पिता वीरेंद्र सिन्हा अकेले रहते हैं। वे जून में ही संजीव से मिलने टोक्यो गए थे। वहां पर बेटे और बहू के साथ एक महीने तक रहने के बाद बाड़मेर लौट आए। आईआईटीयन संजीव ने जापान में जापानी लड़की को बनाया हमसफर। उनकी एक बेटी है।

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बेटे की कामयाबी पर पूरे देश को फख्र है

पिता वीरेंद्र सिन्हा ने कहा कि उनके बेटे की कामयाबी पर पूरे देश को फख्र है। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटा देश की पहली बुलेट ट्रेन का सलाहकार बनेगा। वीरेंद्र कहते हैं कि संजीव शुरू से ही जिद्दी था। शुरुआती पढ़ाई से ही उसका परफार्मेंस बेहतरीन था। दसवीं बोर्ड में टॉपर रहा और बारहवीं बोर्ड में स्टेट मेरिट में 8वें नंबर पर रहा। इसके बाद आईआईटी में पहले ही कोशिश में सिलेक्ट हो गया। कानपुर में पांच साल की मेहनत के बाद आईआईटीयन बन गया। वहां से जापान के टोक्यो चले गए। वहां पर कई कंपनियां में काम करने के बाद टाटा में एग्जिक्यूटिव बने।

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संजीव के नाम दर्ज हैं ये रिकॉर्ड्स

  • राजस्थान के बाड़मेर जिले से पहले आईआईटीयन बनने का रिकार्ड संजीव के नाम दर्ज है। उनका जन्म 21 जनवरी 1973 को बाड़मेर में हुआ।
  • आठवीं तक की पढ़ाई बाल मंदिर स्कूल में की। इसके बाद सीनियर सेकंडरी स्कूल गांधी चौक से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। 1989 में आईआईटी में सिलेक्शन हो गया।
  • खास बात यह है कि संजीव ने पढ़ाई के दौरान कोचिंग नहीं ली। सेल्फ स्टडी के जरिए ही पढ़ाई की और हमेशा अव्वल रहे।

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बुलेट ट्रेन परियोजना 2023 तक पूरी होने की उम्मीद

संजीव सिन्हा के मुताबिक, 285 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेनों को रातोंरात नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए सावधानी भरी प्लानिंग की जरूरत होती है। बता दें कि भारत सरकार 508 किलोमीटर की इस परियोजना के मई, 2023 तक पूरी होने की उम्मीद कर रही है।

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