रैप सॉन्ग: हसदेव के जंगलों को बचाने का अनोखा तरीका

संगीत एक सार्वभौमिक भाषा है। विश्व स्तर पर, गायक पर्यावरण की हिफाजत के लिए आंदोलनों के समर्थन में संगीत का उपयोग कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अप्पी राजा ने राज्य के हसदेव के जंगलों में हो रहे कोयला खनन का विरोध करने के लिए अपना नवीनतम रैप हसदेव जारी किया है।

रैप सॉन्ग: हसदेव के जंगलों को बचाने का अनोखा तरीका

छत्तीसगढ़ में इकोलॉजिकली संवेदनशील हसदेव के जंगलों को कोयला खनन के लिए रास्ता बनाने के लिए नष्ट किए जाने का खतरा है। और स्थानीय आदिवासी समुदाय पिछले कई वर्षों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

अब गायक अप्पी राजा भी हसदेव बचाओ आंदोलन में शामिल हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने खनन परियोजना के खिलाफ अनोखे तरीके से उसके बारे में रैप करके अपना विरोध दर्ज कराया है। गाने का नाम हसदेव है।

"मैं लेखक नहीं हूं। मैं एक जंगल हूं और मेरा नाम हसदेव है ..." छत्तीसगढ़ के रहने वाले रैपर इन पंक्तियों से अपने गाने की शुरुआत करते हैं। इस गाने की पृष्ठभूमि में क्षेत्र के हरे भरे जंगल हैं। अप्पी राजा, जंगल की आवाज में बोलते हुए, मनुष्यों को प्रकृति का अपमान बंद नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हैं। जंगल वर्षों से खामोश है क्योंकि लोगों ने इस जमीन पर भयावहता फैला दी है। लेकिन अब और नहीं यह लौटने का वक्त है।

कहानी सुनें


अप्पी राजा रैप करते हैं, कोई भी व्यक्ति पैसे से साफ सुथरी हवा, शुद्ध पानी और उपजाऊ जमीन वापस नहीं खरीद सकता है, क्योंकि उसके पीछे एक तबाही का दृश्य सामने आता है जिसमें विस्फोटक जमीन को फाड़ते हैं और काला धुआं निकलता है, जो मीलों तक जहर फैलाता है। जब जमीन के प्राकृतिक संसाधन खत्म हो जाएंगे तो आने वाली पीढ़ियां क्या खाएंगी? रैपर पूछता है क्या बच्चे सिर्फ कोयला खाएंगे।

वह विनती करता है, जन जंगल जमीन को बचाओ। वह गाते हैं पानी के जखीरों, भूमि और जंगलों को बचाओ, नहीं तो ये दुनिया नरक बन जाएगी।

विरोध का माध्यम, संगीत

बगैर किसी कारण के संगीत को वैश्विक भाषा कहा जाता है, बहसों, चर्चाओं और वार्तालापों के विपरीत, जो लोगों के विशिष्ट समूहों का संरक्षण बन जाते हैं, और उन लोगों को छोड़ देते हैं जो इससे सीधे प्रभावित होते हैं, संगीत समावेशी और प्रभावी है।

संगीत का इस्तेमाल जमाने से विरोध की आवाज के शक्ल में होता रहा है, संगीत से बिना किसी उम्र, जाति या पंथ बाधाओं के जनता में काफी सफलता मिली है। जबकि रैप और हिप हॉप काफी वक्त से पश्चिमी दुनिया में विरोध असंतोष और विद्रोह का माध्यम रहे हैं। भारत में विरोध दर्ज कराने के लिए रैप उधार लिया गया है।

अगस्त 2015 में रिलीज होने के 48 घंटों के भीतर, ग्रैमी पुरस्कार विजेता निकी मिनाज के एनाकोंडा की धुन पर रैपर सोफिया अशरफ द्वारा गाया गया संगीत वीडियो कोडैकानल वॉट नॉट गाया गया, जिसे 300,000 बार देखा गया। इस विरोध प्रदर्शन मे यह मांग की गई थी की कोडाईकनाल के जंगलों में पारा के कचरे को डंप करने और अपने कर्मचारियों को खतरे में डाल कर किए गए कामों को ठीक किया जाए।

कुछ साल बाद जून 2018 में, इस वीडियो का सीक्वल कोडाईकनाल स्टिल वॉन्ट लॉन्च किया गया। इस बार, सोफिया अशरफ के साथ, कर्नाटक की गायक और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता टीएम कृष्णा और इंडी रॉकर अमृत राव ने भी गाया।

गायकों ने यूनिलीवर पर अपने पैर खींचने और पर्यावरणीय नस्लवाद का आरोप लगाया क्योंकि इसने पर्यावरण में पारा को साफ करने के लिए पर्याप्त नहीं किया था जो अभी भी पश्चिमी दुनिया में मानव और वन्यजीवों के निवास के लिए 'सुरक्षित' माने जाने वाले से कहीं अधिक था।

टीएम कृष्णा ने एक बार फिर चेन्नई के पन्नोर क्रीक पर औद्योगिक प्रदूषण के असर के बारे में पोरम्बोक गाने के लिए शास्त्रीय कर्नाटक शैली का इस्तेमाल किया है, जो बाढ़ सुरक्षा और जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। अंधाधुंध निर्माण के कारण, मीलों आर्द्रभूमि और नदियों और बैकवाटर के हिस्से को निगल लिया गया है, जिससे मछुआरों, जलीय जीवन, पक्षी जीवन और कीमती मैंग्रोव की आजीविका खतरे में पड़ गई है।

2016 में, घाना में हिप हॉप संगीतकारों के एक ग्रुप ने अपने मुल्क में प्रदूषण के बारे में कुछ करने का फैसला किया, जिसमें राजधानी अकरा को पृथ्वी पर सबसे प्रदूषित शहरों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर देश के जलाशयों को साफ नहीं किया गया तो देश में पीने योग्य पानी खत्म हो सकता है।

घाना के एक रैपर एली ने गोल्ड कोस्ट गीत के साथ एक अभियान की शुरुआत की, और अन्य संगीतकारों के साथ बातचीत में देश के युवा लोगों को शामिल किया किया गया।

गाँव कनेक्शन ने शराबबंदी के बारे में बोलने के लिए WHO (SERO) के साथ मेरी प्यारी जिंदगी नामक अपनी सहयोगी श्रृंखला में कुछ ऐसा ही किया। गाँव कनेक्शन के संस्थापक नीलेश मिसरा ने देश में बढ़ती शराब की बात कहने के लिए कहानी, कविता और कव्वाली के माध्यम का इस्तेमाल किया।

इस बीच अप्पी राजा का हसदेव वीडियो खूब व्यूज़ बटोर रहा है। क्या यह विनाश को रोकने के लिए काफी होगा, यह देखा जाना बाकी है। लेकिन बातचीत शुरू हो गई है।

अंग्रेजी में खबर पढ़ें

अनुवाद: मोहम्मद अब्दुल्ला सिद्दीकी

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.