जैविक तरीके से गंगा को साफ करने की तैयारी, तालाब के पानी टेस्ट सफल

जैविक तरीके से गंगा को साफ करने की तैयारी, तालाब के पानी टेस्ट सफलफाेटो - शुभम कौल 

गाजियाबाद। गंगा को साफ करने के लिए अब जैविक तरीका आजमाया जा सकता है। गंगा के साथ ही कई कई छोटी बड़ी नदियों, नालों और तालाबों के पानी को भी इस जैविक कल्चर के साफ किया जा सकेगा। इस बॉयो उत्पाद को विकसित करने में लगे राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के मुताबिक ये उपाय देश में पानी की बड़ी समस्या को हल कर सकेगा।

इस बारे में गांव कनेक्शन से विशेष बात करते हुए राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र, गाजियाबाद के निदेशक डॉ. कृष्ण चंद्र ने बताया, “देश में पानी की समस्या को देखते हुए हम लोग काफी समय से ऐसी कोशिश में जुटे थे, जिससे प्राकृतिक तरीके से पानी की साफ किया जा सके। पानी साफ करने वाले इस जैविक कल्चर के साथ ही हम लोग देश को जल्द प्राकृतिक तरीके से केला पकाने का भी उत्पाद तैयार कर रहे हैं।’

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पानी साफ करने वाले इस जैविक कल्चर के साथ ही हम लोगदेश को जल्द प्राकृतिक तरीके से केला पकाने का भी उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
डॉ. कृष्ण चंद्र, निदेशक, राष्ट्रीय जैविक कृषि केंद्र, गाजियाबाद

गाजियाबाद के कमला नेहरु नगर में स्थित राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र अपर निदेशक डॉ. जगत सिंह बताते हैं, “ स्वच्छ भारत मिशन के तहत वेस्ट डीकंपोजर की अपार सफलता के बाद संस्थान के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण चंद्र की 5 सदस्यीय टीम ये उत्पादन बना रही है। शोध का काम लगभग पूरा हो चुका है। रुके पानी (तालाब, झील, पोखर) में सफलता पूर्वक परीक्षण किया जा चुका है, बहते पानी अच्छे रिजल्ट के लिए कार्य जारी है।’

वो आगे बताते हैं, “इसमे वेस्ट डीकंपोजर के तरह ऐसे सूक्ष्म जीवाणु होंगे जो गंदे पानी की गंदगी खाकर तेजी से विकसित होंगे। इससे पानी की अघुलनशील गंदगी तालाब-नदी की तलहटी में जम जाएगी। ये बिल्कुल वैसे ही काम करेगा जैसे दही में जामन करता है। इससे गांव के तालाब के तालाब का पानी भी शुद्ध किया जा सकेगा।’

बनारस में गंगा।

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हालांकि अभी तक इस जैविक उत्पाद का कोई नाम तय नहीं हुआ है और न ही इसका औपचारिक ऐलान हुआ है। जनवरी 2018 में कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह भी इस केंद्र पहुंचे थे। संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक इसे जल्द शुरु किया जाएगा।

देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि मंत्रालय के संस्थान काम कर रहे गाजियाबाद के जैविक कृषि केंद्र पिछले कई महीनों से अपने कचरा अपघटक (वेस्ट डीकंपोजर) को लेकर सुर्खियों में है। 20 रुपए की इस एक शीशी से सैकड़ों ड्रम तरल खाद और तैयार हो सकती है। इसके छिड़काव से न सिर्फ फसल का अच्छा उत्पादन मिलता है बल्कि गोबर समेत दूसरे कृषि अवशेष जल्द ही खाद में बदल जाते हैं। वेस्ट डीकंपोजर से मृदा का सुधार बहुत तेजी से होता है। संस्थान का दावा है अब तक देश के 20 लाख किसानों को इसका फायदा मिल चुका है, जल्द इसे 20 करोड़ किसानों तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है।

ये बिल्कुल वैसे ही काम करेगा जैसे दही में जामन करता है। इससे तालाब का पानी भी शुद्ध किया जा सकेगा। ठहरे हुए पानी में परीक्षण सफल हो चुका है।
डॉ. जगत सिंह, अपर निदेशक

किसानों के उपयोग के लिए बनाया गया वेस्ट डीकंपोजर।

डॉ. जगत बताते हैं, अभी तक देश में केला और आम समेत कई फल प्रतिबंध के बावजूद हानिकारक रसायन कैल्शियम कारबाइड से पकाए जाते हैं, इसे कैंसर समेत कई बीमारियों का कारक भी बताया गया है। इसलिए हमारे संस्थान की कोशिश है कि लोगों को इसे बचाया जाए। फिलहाल आम और केलों को प्राकृतिक तरीके पकाने की विधि लगभग तैयार है, जल्द इसे भी लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ये वेस्ट डीकंपोजर की तरह काफी सस्ता और पर्यावरण हितकारी होगा।’

राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र स्वच्छ भारत अभियान के तहत वेस्ट डीकंपोजर से देश के 1400 से ज्यादा आदर्श गांवों में लोगों को सरल और सस्ती कंपोस्ट बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है। डॉ. जगत के मुताबिक वेस्ट डीकंपोजर से तैयार कल्चर की कुछ मात्रा (एक-2लीटर) शौचालय में डालने से बदबू नहीं आती है और मल जल्द ही खाद में परिवर्तित हो जाता है।

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