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एससी-एसटी एक्ट : पांच वर्षों में 25 फीसदी मामलों में ही आरोप सिद्ध हुए 

नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट को लेकर अदालत से निकला विवाद सड़कों पर हंगामे के बाद संसद तक पहुंच गया है। भारत बंद के एक दिन बाद संसद में इस एक्ट को लेकर सरकार ने इस संबंध में कुछ आंकड़ों जारी किए हैं। सरकार के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में करीब दो लाख ऐसे मामले दर्ज किए गए, जिसमें से 25 फीसदी में दोष सिद्ध हो सका।

मंगलवार को एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट एससी एसटी एक्ट (SC / ST Act) मामले में सुनवाई कर रहा था वहीं संसद में भी सवाल जवाब का सिलसिला जारी थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 से लेकर 2016 तक पांच वर्षों में दलितों के खिलाफ हुए अपराध के 192577 मामले दर्ज किए गए, जिसमें से 25 फीसदी केस में दोषी सिद्ध हुए। सरकार के मुताबिक इस दौरान अनुसूचित जातियों के खिलाफ 32353 मामले दर्ज हुए, जिसमें से 20 प्रतिशत मामलों में ही दोष सिद्धि हो हुई।

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लोकसभा में भगीरथ प्रसाद के लिखित उत्तर में गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने बताया ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012, 2013, 2014, 2015 और 2016 में दलितों के खिलाफ अपराध के कुल 192577 मामले दर्ज किए गए। इनमें 70 फीसदी से अधिक मामलों में आरोप पत्र दाखिल हुए जिसमें करीब 25 फीसदी मामलों में दोष सद्धि हुआ। उन्होंने कहा कि अनुसिचित जातियों के खिलाफ मामलें में 75 फीसदी आरोप पत्र दाखिल हुए और 20 फीसदी से अधिक मामलों में ही आरोपी दोषी ठहराए गए।

वर्ष 2012, 2013, 2014, 2015 और 2016 में दलितों के खिलाफ अपराध के कुल 192577 मामले दर्ज किए गए। इनमें 70 फीसदी से अधिक मामलों में आरोप पत्र दाखिल हुए जिसमें करीब 25 फीसदी मामलों में दोष सद्धि हुआ

वहीं इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सु्प्रीम कोर्ट ने कहा कि एसएसी एसटी एक्ट के कानून के प्रावधानों को हमने नरम नहीं किया बल्कि निर्दोष व्यक्तियों की गिरफ्तारी के मामले में उनके हितों की रक्षा की है। कोर्ट ने साफ किया कि एससी-एसटी कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल निर्दोष लोगों को आतंकित करने के लिए नहीं किया जा सकता है। इनपुट भाषा