यह मूर्तिकार पुआल से बनाता है कलाकृतियां, देश-विदेशों में होती है डिमांड

अंजनी मिश्रा, कम्‍युनिटी जर्नलिस्‍ट

अमेठी (उत्‍तर प्रदेश)। यूपी के अमेठी जिले से 25 किलोमीटर की दूरी पर एक पूरबगौरा धर्मगदपुर गांव है। इस गांव में रहने वाले मूर्तिकार की चर्चा देश-विदेशों में हो रही है। इस मूर्तिकार की बनाई हुई कलाकृति को लोग अपने घर और ऑफिसों के साज सजावट के लिए उपयोग कर रहे हैं। इनकी कलाकृति की देश ही नहीं विदेशों से भी भारी डिमांड आ रही है।

मूर्तिकार ओम प्रकाश बताते हैं कि यह कलाकृति धान के पुआल और पेपर से बनाया जाता है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इसके लिए बकायदा कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। अपने देश के साथ ही इसकी विदेशों में भी खूब मांग हो रही है। यही कलाकारी हमारे जीवन यापन का मुख्‍य साधन है।

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वहीं दूसरे मूर्तिकार राम गोपाल ने बताया कि हम इन मूर्तियों को बनाने के लिए म‍िट्टी का उपयोग नहीं करते हैं। हम कागज और धान के पुआल का प्रयोग करते है। इससे मूर्तियों का वजन हल्‍का रहता है। इसे आसानी से उठा कर इधर-उधर रखा जा सकता है। इसके गिरने पर टूटने फूटने का डर भी नहीं होता है। वहीं अगर मिट्टी की मूर्ति होती तो पहले वह वजन में भारी होती और उसे ए‍क जगह से दूसरे स्‍थान रखना भी मुश्‍किल होता। वहीं गिरने पर उसे टूटने का खतरा भी बहुत अधिक होता है।

इसलिए लोग इन हैंडक्राफ्ट मूर्तियों की डिमांड करते हैं उन्‍होंने बताया कि हम लोगों को जंगली जानवरों की मूर्ति बनाने का बहुत शौक है। इसलिए हम मूर्ति में शेर, हिरण, ऊंट, हाथी, डायनाशोर बनाते हैं। इसी मूर्ति बनाने के काम से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।

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वहीं ओम प्रकाश का कहना है कि हम हैंडीक्राफ्ट और अखबार व धान के पुआल से इस कलाकृतियों को बनाते हैं। इन जानवरों की मूर्तियों की बिक्री भारत के साथ-साथ अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड में बहुत होती है। इसके अलावा भारत में हैदराबाद, राजस्थान, मथुरा, उत्तराखंड, ओडिशा, एमपी जैसे प्रदेशो में खूब खरीददारी हो रही है।

उन्‍होंने बताया कि इन मूर्तियों को देखकर ऐसा लगता है कि मानों अभी बोल उठेंगे। इन मूर्तियों को देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। इसके लिए बकायदा यहां प्रदर्शनी लगाई जाती है। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए भी लोगों की भारी इक्‍ट्ठा होती है।

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