तस्वीरों में देखिए एशिया के सबसे बड़े पशु मेले सोनपुर की कुछ झलकियां Photo

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अंकित मिश्रा, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

वैशाली (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना से लगभग 25 किमी दूर विश्वप्रसिद्ध छपरा जिले के हरिहर क्षेत्र में (सोनपुर) एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगा हुआ है। इस मेले को देखने के लिए देश-विदेश लोग पहुंचते हैं। यह मेला 11 दिसंबर तक चलेगा।


यह मेला बिहार के सोनपुर में गंगा और गंडक नदी के संगम पर कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है और एक महीने तक चलता है। कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ गंगा-गंडक में पवित्र स्नान के लिए पहुँचते हैं। इस मेले के संदर्भ में कहा जाता है कि पहले यहां राजा-महाराजा या उनके मंत्री हाथी, घोड़ा खरीदने पहुंचते थे।


हरि और हर के भूमि पर लगने वाले इस मेले का धार्मिक आख्यान यह है कि गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) के बीच हुए युद्ध में गज की पुकार पर यहां भगवान श्रीहरि पधारे थे। ग्राह का वध कर भक्त गज की रक्षा की थी। हरि के हाथों मरकर जहां ग्राह को मोक्ष की प्राप्ति हुई वहीं गज को नया जीवन मिला। ऐसे में वर्तमान समय में भी जहाँ इस मेले में कुछेक पशुओं को छोड़कर ज्यादातर पशु-पक्षियों के क्रय-विक्रय पर पाबंदी है। उसके बावजूद भी हाथियों का पौराणिक स्नान हाथीपालक निभा रहे हैं जिसमें राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस शर्त के साथ नरमी बरतती है कि हाथी स्नान के साथ मेले में हाथियों को बस दिखावे के लिए रखा जा सकता है।


एक जमाने में यह मेला जंगी हाथियों का सबसे बड़ा केंद्र था। मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य (345 ई०पू०-298ई०पू०),मुगल सम्राट अकबर और 1857 के गदर के नायक वीर कुंवर सिंह ने भी यहां से हाथियों की खरीद की थी। अंग्रेज रॉबर्ट क्लाइव ने यहां घोड़ों का बड़ा अस्तबल भी बनवाया था। पहले यह मेला जहां हाजीपुर में लगता था और लोग हरिहरनाथ के दर्शन को सोनपुर जाते थे वहीं मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर यह मेला सोनपुर में ही आयोजित होने लगा। स्थानीय लोग इस मेले को छतरपुर का मेला भी पुकारते हैं।






आधुनिक समय में कृषि में पशुओं की निर्भरता कम हुई है। इसके साथ ही पाबन्दी ने भी पशुओं की आवक कम की है। आधुनिक मशीनों, जानकारियों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जरूरत बढ़ी है जिससे यह मेला अब अपने नवीन रूप में साथ लाया है। किसानों के लिए उचित मूल्य पर उन्नत किस्म के बीज के स्टॉल, ट्रैक्टर, फसलों को बचाने की जानकारी, हस्तकला, सरकारी योजनाओं की जानकारी, विभिन्न तरह की प्रदर्शनियां, बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, खिलौनों की दुकान,ऊनी कपड़ों की दुकान,राज्य और देश के विभिन्न कोने की चीजें लगी हैं।
















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