खुद से गर्भपात की दवाएं लेना हो सकता है खतरनाक

नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के एक शोध पत्र इंडियन जर्नल ऑफ एब्सट्रेक्ट एंड गायनेकोलॉजी के अनुसार बिना डॉक्टरी सलाह के गर्भपात की दवा खाने वाली 76 प्रतिशत महिलाओं को बाद में सर्जरी करानी पड़ी

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   27 Nov 2019 8:38 AM GMT

लखनऊ। कई बार महिलाएं बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से दवा लेकर अनचाहे गर्भ को गिरा देती हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ने एक शोधपत्र इंडियन जर्नल ऑफ एब्सट्रेक्ट एंड गायनेकोलॉजी में इस बात का दावा किया गया है।

सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली की प्रसूति रोग विभाग की एसोसिएट प्रो. डॉक्टर दिव्या पांडे ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया, " अस्पताल में अक्सर ऐसे मामले आते हैं जिसमें मरीज ने बिना डॉक्टर की सलाह से गर्भ गिराने वाली दवा खा ली जिसका असर यह हुआ कि उनकी तबियत और बिगड़ गई। ज्यादातर महिलाएं गर्भपात के लिए बिना किसी डॉक्टर से सलाह लिए गर्भपात की दवा ले लेती हैं और जान जोखिम में डाल देती हैं। एक डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं बता सकता कि किस बीमारी का क्या इलाज है।"


100 महिलाओं से बातचीत और उनके अनुभव के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि बिना डॉक्टरी सलाह के गर्भपात की दवा खाने वाली 76 प्रतिशत महिलाओं को बाद में सर्जरी करानी पड़ी, क्योंकि दवा खाने से भ्रूण पूरी तरह से निकल नहीं पाया था। वहीं 20 प्रतिशत महिलाएं मानसिक तनाव से पीड़ित हो गईं और 15 फीसदी सेपसिस नामक बीमारी की शिकार हो गईं।

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" बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात की दवा के बहुत नुकसान होते हैं। ज्यादातर मामलों में दवा खाने के बाद भ्रूण गर्भाशय से पूरी तरह अलग होकर बाहर नहीं आ पाता है, जिसकी वजह से गर्भाशय में संक्रमण हो जाता है। इस वजह से काफी ब्लीडिंग होती है। यह ब्लीडिंग कुछ दिन से लेकर कई हफ्तों तक होती है। ज्यादा ब्लीडिंग से महिलाएं कमजोर हो जाती हैं। इसके साथ ही गलत तरीके से दवा खाने पर महिला को दोबारा गर्भधारण करने में काफी समस्याएं आने लगती हैं। संक्रमण को दूर करने और फंसे हुए भ्रूण को निकालने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।" डॉक्टर दिव्या ने आगे बताया।

लखनऊ के पुरनिया की रहने वाली रेखा (बदला हुआ नाम) शादी के तुरंत बाद बच्चा नहीं चाहती थीं। लेकिन वह प्रेगनेंट हो गईं। ऐस में उन्होंने इंटरनेट पर देखकर मेडिकल स्टोर से दवा ले ली। दवा खाने के बाद उसकी हालत काफी गंभीर हो गई। परिजनों से उसे क्वीन मैरी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां काफी मशक्कत के बाद उसकी जान बचाई जा सकी।

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रेखा ने गाँव कनेक्शन को बताया, " शादी के बाद मैं तुरंत बच्चा नहीं चाहती थी, मैंने मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लिया। दवा खाने के कुछ घंटे के बाद ही ब्लीडिंग शुरूहो गई। शुरू में लगा कि यह नॉर्मल है, लेकिन ब्लीडिंग चार-पांच दिन तक रुकी नहीं। मेरी तबियत काफी खराब होने लगी। जब यह बात मेरे परिवार वालों को पता चली तो वे मुझे अस्पताल लेकर गए, जहां एक छोटे ऑपरेशन के बाद गर्भ में फंसे भ्रूण को निकाला गया। इस घटना के पांच साल बाद हम लोग बच्चा चाहते हैं, मैं दोबारा प्रेगनेंट नहीं हो पा रही हूं इसके लिए मेरा इलाज भी चल रहा है। "

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मनोवैज्ञानिक डॉ. शाजिया सिद्दीकी का कहना है, "बिना डॉक्टर की सलाह के खुद इलाज शुरू करने को साइबरकॉन्ड्रिया कहा जाता है। आजकल अक्सर देखने में आता है कि लोग बीमार होने पर प्राथमिक स्तर पर इंटरनेट का सहारा लेते हैं या किसी से पूछू कर दवा खा लेते हैं। जब स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है तभी डॉक्टर के पास जाते हैं। इंटरनेट पर आसानी से चिकित्सा जानकारी उपलब्ध हैं जिसके कई फायदे हैं, लेकिन सी बीमारियों में इंटरनेट की जानकारी सटीक नहीं हो सकती है। ऐसे में इंटरनेट से दवा लेने से बचना चाहिए।"

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