सैनिकों के इस गाँव में बहनें अपने भाई की तस्वीर और पेड़-पौधों को बांधती हैं राखी

सैनिकों के इस गाँव में बहनें अपने भाई की तस्वीर और पेड़-पौधों को बांधती हैं राखी

पुष्पेंद्र वैद्य, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

राजगढ़ (मध्यप्रदेश)। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार जिसका इंतजार भाई-बहन बेसब्री से करते हैं, लेकिन इस गाँव में बहनें पेड़-पौधों और अपने भाइयों की फोटों में राखी बांधती हैं, क्योंकि उनके भाई आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा करते हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 274 किलोमीटर की दूरी पर राजगढ़ जिले के रामगढ़ और लखोनी गांव में हर चौथे घर का एक युवक फौज में जरूर भर्ती होता है। पूरे राजगढ़ जिले में इन दोनों गांवों को वीरों की भूमि के नाम से जाना जाता है। रक्षाबंधन के दिन इस गांव की बहनें अपने भाइयों की जगह उनकी फोटों या पेड़ों को राखी बांधकर त्यौहार मनाती हैं और अपने भाइयों से सीमा पर रहकर देश की सेवा करने का वचन लेती हैं।


28 साल तक सेना में सेवा दे चुके रामगढ़ के रहने वाले सुबेदार भंवरसिंह के परिवार के कई लोग सेना में हैं । वो कहते हैं, "मैंने यह नौकरी परिवार के पालन पोषण के लिए नहीं बल्कि जिस मिट्टी में जन्म लिया है उस मिट्टी का कर्ज चुकाने के लिए की है।"

रामगढ़ निवासी मोडसिंह सोनगिरा के दो बच्चे हैं, दोनों फौज में हैं। उसी गांव फूल सिंह डांगी के भी दो बच्चे हैं और दोनों फौज में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे हैं।


लखोनी से 35 और रामगढ़ से आज भी करीब 150 सैनिक जम्मू, लेह, गुवाहाटी, सियाचीन जैसे कठिन जगहों पर सेवाएं दे रहे हैं। कई ऐसे पूर्व फौजी हैं जो रिटायरमेंट के बाद गांव में रहकर गांव के अन्य युवाओं को सेना में जाने के लिए तैयारियों में मदद करते हैं।

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रिटायर्ड सूबेदार भंवरसिंह का कहते हैं, "यहां की मिट्टी ही कुछ ऐसी है कि हर युवा देश की सेवा से जुड़ना चाहता है। रामगढ़ सहित आसपास के सैकड़ों लोग सेना में है और अभी भी युवा सेना में जाने के लिए तत्पर है। वे मेहनत करते रहते है। जहां जरूरत लगती है हम भी उन्हें तैयारियों में मदद करते हैं।


दोनों गांवों से हर साल कई युवा फौज में भर्ती होते हैं। युवा सालभर फौज में जाने के लिए तैयारी करते हैं। कई घर तो ऐसे हैं जहां पीढ़ियों से फौज में जाने का सिलसिला जारी है। ग्रामीण बताते हैं कि रामगढ़ में हर चौथे घर से एक युवा देश सेवा में लगा हुआ है। यही हाल लखोनी गांव का भी है। जहां आज भी हर साल दस से बारह लोग भारतीय सेना में भर्ती होते है। रामगढ़ से ही करीब 250 से अधिक लोग सेना में भर्ती हो चुके हैं।

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