देश में हर साल सांप के काटने से मरते हैं 50 हजार लोग, ऐसे कर सकते हैं सांपों से बचाव

दुनिया भर में हर साल सर्पदंश से लगभग एक लाख लोग मारे जाते हैं। इनमें से आधी मौतें अकेले भारत में होती हैं। भारत में होने वाली 97 प्रतिशत मौतें ग्रामीण इलाकों में होती हैं।

देश में हर साल सांप के काटने से मरते हैं 50 हजार लोग, ऐसे कर सकते हैं सांपों से बचाव

लखनऊ के लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ग्रामीण इलाके से आया वह मरीज वेंटीलेटर पर लेटा एक-एक सांस की लड़ाई लड़ रहा था। वह देश के लगभग उन एक लाख लोगों में से एक है जो हर साल सांप के काटने का शिकार बनते हैं। अगर खुशनसीब रहा तो वह बच जाएगा वरना भारत में हर साल सर्पदंश से होने वाली 50 हजार मौतों में महज एक आंकड़ा बनकर रह जाएगा। हैरानी की बात है कि सांप के काटने से भारत में हर साल 50 हजार मौतें होती हैं और इनकी चर्चा तक नहीं होती।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल सर्पदंश से लगभग एक लाख लोग मारे जाते हैं। इनमें से आधी मौतें अकेले भारत में होती हैं। भारत में मौत के ये आंकड़े ज्यादा भी हो सकते हैं क्योंकि आज भी भारत में सांप के काटने के बाद लोग अस्पताल की जगह झाड़-फूंक कराने भागते हैं। सांप का जहर तेज असर करता है और मरीज के परिजनों को अपनी गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता। ये मौतें कहीं दर्ज नहीं हो पातीं।

97 प्रतिशत मौतें ग्रामीण इलाकों में होती हैं

मशहूर सर्पविज्ञानी और भारत में स्नेक मैन नाम से मशहूर रोमुलस व्हिटकर की एक रिपोर्ट पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ सांइस नाम के जर्नल में 2011 में छपी थी। इसके मुताबिक, भारत में हर साल सांप के काटने से 45,900 से 50,900 लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 97 प्रतिशत मौतें ग्रामीण इलाकों में होती हैं। मरने वालों में 59 प्रतिशत पुरुष और 41 प्रतिशत महिलाएं होती हैं। ये घटनाएं साल में जून से सितंबर के बीच होती हैं। जिन प्रदेशों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं उनमें उत्तर प्रदेश (8,700) आंध्र प्रदेश (5,200) और बिहार (4,500) सबसे ऊपर हैं।


जो बच गए वे विकलांग हो गए

लेकिन चिंता सर्पदंश से होने वाली मौतों से ही नहीं है इनसे होने वाली विकलांगता से भी है। देश में लगभग सांप के एक लाख हमले होते हैं इनमें जो लोग बच जाते हैं उनके वे अंग स्थाई रूप से प्रभावित हो जाते हैं जहां सांप ने काटा था। सांप का जहर हाथ या पैर के उस हिस्से को गला देता है। जान बचाने के लिए प्रभावित हिस्से को काटना तक पड़ जाता है। आमतौर पर सर्पदंश का शिकार किसान होते हैं और इस तरह की विकलांगता का असर उनके परिवार की उत्पादकता पर पड़ता है।

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भारत के चार जहरीले सांप

जानकारों के अनुसार, भारत में सांप की लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 15 प्रजातियों के सांप जहरीले होते हैं। इन 15 में से भी महज चार सांपों के काटने से 98 प्रतिशत मौतें होती हैं। ये चार सांप हैं कोबरा, रसल वाइपर, करैत और सॉ स्केल्ड वाइपर। महज सांप के काटने के तरीके और सांप के रंग, रूप, आकार, प्रकार के आधार पर नहीं कहा जा सकता कि वह जहरीले हैं या बिना जहरवाले, क्योंकि कुछ सांप शत्रुओं से बचाव के लिए जहरीले सांपों की तरह दिखते हैं। वहीं कुछ सांप देखने में साधारण और छोटे लगते हैं लेकिन उनका जहर बहुत घातक होता है। इसलिए बेहतर है कि सांप से बचाव किया जाए।

सांपों से बचने की कुंजी

सांपों के मामलों के जानकार रोमुलस व्हिटकर कहते हैं, आमतौर पर सांप खुद इंसानों से डरते हैं और तभी हमला करते हैं जब उन्हें ऐसा लगे कि उन पर खतरा है। हम सांप की आदतों, उनके रहन-सहन के बारे में जानकर इस तरह के हमलों से बच सकते हैं और ऐसी मौतों को बहुत हद तक कम कर सकते हैं। रोमुलस ने बिग फोर या डेडली फोर नाम से कुख्यात भारत के चार जहरीले सांपों से बचने के तरीके सुझाए हैं:


1. कोबरा: अपना फन काढ़े हुए कोबरा या काले नाग को हर भारतीय पहचानता है। लेकिन समाज में फैली अपनी छवि के विपरीत कोबरा खुद इंसानों से डरते हैं और जरा सी आहट होते ही बचने की कोशिश करते हें।

अगर उन्हें खतरा महसूस होता है तो वह हमला करने से पहले फन फैलाकर और फुंफकार कर चेतावनी देते हैं। अगर इससे भी बात न बने तो वह पहला नकली हमला करते हैं। रोमुलस ने स्लोमोशन वीडियो में सांप के हमले को कैद कर देखा है कि सांप पहली बार मुंह बंद रखता है। इससे भी बात न बने तो वह काट लेता है।

कैसे बचें: कोबरा का मुख्य आहार हैं चूहे। चूहे भोजन की तलाश में हमारे खेतों और घरों में आ जाते हैं और इनके पीछे-पीछे कोबरा सांप। गांवों में किसानों के घर खेतों के पास ही होते हैं। इसलिए भोजन खोजने के लिए चूहे और उनके पीछे कोबरा आसानी से इंसानों के बीच रहने लगते हैं।

अगर कोबरा के हमले से बचना है तो घरों से चूहों को बाहर निकालें और खेतों में चूहों के बिलों से सावधान रहें। अंधेरे में न निकलें या टार्च लेकर निकलें।


2. रसल वाइपर: बिग फोर का यह सदस्य बड़े दांतों और तेज जहर वाला सांप है। इसके आकार की वजह से लोग इसे सैंड बोया या अजगर समझ लेते हैं। इसकी पहचान है इसकी पीठ पर लोहे की सांकल जैसी बनी हुई आकृति।

इनका मटमैला रंग होता है, ये छोटे चूहों, मेढ़कों, छिपकलियों, दूसरे सांपों और कीड़े-मकौड़ों की तलाश में पत्तियों के बीच छिपे बैठे रहते हैं। जैसे ही किसी का पैर इन पर पड़ा ये अपनी जान बचाने के लिए हमला कर बैठते हैं।

कैसे बचें: रसल वाइपर पत्तियों के बीच छिपकर बैठता है इसलिए जिस इलाके में ये रहते हों वहां रास्ते से पत्तियां हटा देनी चाहिए। चूंकि यह रात में ज्यादा सक्रिय रहता है इसलिए बिना टार्च के या दूसरी रोशनी के घर से बाहर न जाएं।


3. करैत: बिग फोर का तीसरा सदस्य करैत देखने में खतरनाक नहीं लगता। इसी के जैसे कई दूसरे कम जहरीले सांप भी होते हैं। लेकिन करैत का जहर बहुत ज्यादा घातक होता है। ये आमतौर पर रात में निकलते हैं और अक्सर जमीन पर सोते हुए इंसान इनका शिकार बनते हैं।

गर्मियों में बहुत से लोग जमीन पर सो जाते हैं, यह सांप भी कीड़े-मकौड़ों की तलाश में सोए हुए इंसान के पास पहुंच जाता है। गलती से अगर इस पर हाथ या पैर पड़ जाए तो यह आत्मरक्षा में काट लेता है। करैत के काटने में बहुत कम या कभी-कभी तो बिल्कुल दर्द नहीं होता और अक्सर सोते-सोते ही इंसान की मौत हो जाती है।

कैसे बचें: इनसे बचने का सीधा तरीका है जमीन पर सोने से बचेँ। अगर सोना ही हो तो अपने आसपास मच्छरदानी जैसी रुकावट बना लें, उसे अच्छी तरह से चारों तरफ से दबा लें। इस तरह करैत के हमलों से बचा जा सकता है।


4. सॉ स्केल्ड वाइपर: यह आकार में चारों से काफी छोटा होता है लेकिन गजब का फुर्तीला। यह खुले में सूखे इलाके में छिपा रहता है और शरीर को जलेबी जैसे आकार में मोड़कर रखने से और छोटा नजर आता है। छोटा आकार का होने की वजह से यह घास और पत्तियों के बीच दिखाई नहीं देता।

कुछ लोग अक्सर इसके आकार की वजह से यह मानकर उठा लेते हैं कि यह ज्यादा खतरनाक नहीं है। खेत-खलिहान में काम करते हुए किसान और बाहर घास में खेलते हुए बच्चे भी इसके निशाने पर रहते हैं।

कैसे बचें: कहीं भी हाथ डालने से पहले गौर से देख लें कि वहां कोई सांप तो नहीं छिपा। घर में जूता वगैरह पहनने से पहले उसमें झांककर देख लें।

कुल मिलाकर चार सूत्र आपको इन चार खतरनाक सांपों के हमलों से बचा सकते हैं:

1. चूहों को घर से दूर रखें

2. सूखी पत्तियों पर न चलें

3. रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें और जमीन पर न सोएं

4. घास या पत्तियों में हाथ डालने से पहले देखें


अगर सांप काट ही ले तो क्या करें और क्या न करें:

सांप काटने के अधिकांश मामलों में मरीज को सही समय पर डॉक्टरी इलाज मिले तो उसे बचाया जा सकता है। लेकिन दूर-दराज गांवों से नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने में लगा समय, डॉक्टर की जगह झाड़-फूंक या ओझा से इलाज कराना, एंटीवेनम की कमी ये कुछ ऐसी वजहें हैं जिनकी वजह से सांप के काटने से देश में इतनी मौतें होती हैं।

सांप अगर काट ले तो क्या करें जब हमने लखनऊ के लोहिया अस्पताल के फिजिशयन डॉ. एस. सी. मौर्या से पूछा तो उन्होंने बताया, " सबसे पहले जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है उससे शांत रहने को कहें। वह ज्यादा चले-फिरे नहीं ऐसा करने से शरीर में जहर जल्दी फैलता है। निकट के सरकारी अस्पताल में जल्द से जल्द पहुंचे। आम धारणा के विपरीत जिस हिस्से को काटा है उसे बांधें नहीं, न ही उसमें चीरा लगाएं। इससे हालत और खराब हो सकती है। बचाव के लिए जरूरी है कि रात में टार्च लेकर बाहर जाएं, जमीन पर न सोएं और शौच के लिए बाहर न जाएं।"

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