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मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान: 'माटी बोल पाती तो अपने साथ हो रहे अन्याय का विरोध करती'

कृषि तंत्रा और गाँव कनेक्शन की मृदा संरक्षण जागरूकता साइकिल रैली की जम्मू-कश्मीर से शुरुआत... मृदा जांच को बढ़ावा देने के लिए कन्या कुमारी तक चलेगी मुहिम

Ashwani DwivediAshwani Dwivedi   8 March 2021 8:15 AM GMT

मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान: माटी बोल पाती तो अपने साथ हो रहे अन्याय का विरोध करतीसाइकिल रैली में भाग लेते छात्र। (सभी तस्वीरें गांव कनेक्शन)

"विश्व के अन्य देशों में कृषि एक व्यवसाय है लेकिन हमारे देश मे कृषि आज भी व्यवसाय नहीं माना जाता। हम भारतीय धरती को अपनी मां मानते हैं और मां अब बीमार हो रही है और इसे बचाना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।" शेर-ए -कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू के कुलपति प्रो.जे पी शर्मा ने किसानों और छात्रों को संबोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। डॉ. मृदा संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक मुहिम के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कार्य कर रही संस्था कृषि तंत्रा और देश के सबसे बड़े ग्रामीण मीडिया प्लेटफॉर्म गांव कनेक्शन के संयुक्त तत्वाधान में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 11 राज्यों से होते हुए एक जागरूकता साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत तीन मार्च को शेर-ए- कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू के कुलपति प्रो शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर की। यह साइकिल रैली कश्मीर, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, आदि राज्यों से होते हुए 40 दिन के बाद कन्याकुमारी में समाप्त होगी।

शेर-ए -कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू के संकाय अध्यक्ष राजेश कटोच और डॉ अमरिंदर सिंह प्रतिभागियों को उपहार देते हुए।

कार्यक्रम में मौजूद किसानों और छात्रों को संबोधित करते हुए कृषि तंत्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप कोंडाजी ने कहा, "सदियों से चली आ रही पर्यावरण की धरोहर जो हमें विरासत में हमारे पूर्वजों से मिली हैं उस धरोहर का हमें सम्मान करना चाहिए, लेकिन पिछले सौ वर्षों में हमने मिट्टी, जल, वायु को हद से ज्यादा दूषित कर दिया है। मिट्टी अगर बोल पाती तो अपने साथ हो रहे अन्याय का विरोध जरूर करती और अगर नहीं भी करेगी तो आने वाली पीढ़ियों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।"

शेर-ए -कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू के कुलपति प्रो.जे पी शर्मा ने किसानों और छात्रों को संबोधित करते हुए।

संदीप कोंडाजी ने आगे कहा, "फायदे की इस दौड़ में हमने मिट्टी की सेहत खराब कर दी है। सही समय हम अब हम सजग हों और माटी की आवाज को सुनेंI" वे आगे कहते हैं।

संदीप कोंडाजी एक युवा उद्यमी हैं और माटी की जांच के लिए उन्होंने एक ऐसी मशीन विकसित की है जो माटी के 11 तत्वों की जांच करने में सक्षम हैI यह मशीन किसानों की सुविधा के लिए शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू में भी स्थापित की गयी है। यूनिवर्सिटी ने 500 किसानों को मुफ्त मृदा परिक्षण की सुविधा देने की घोषणा की है।

कार्यक्रम में आये छात्र और किसान।

कार्यक्रम में कुलपति जे पी शर्मा ने मौके पर मौजूद डॉ सुष्मिता, प्रो. राजेश कटोच और विश्विद्यालय के सभी संकाय अध्यक्षों, छात्र-छात्राओं और चट्ठा फार्म के सरपंच अवतार सिंह के नेतृत्व में आये किसानों को संबोधित करते हुए कहा,"यह जो साझी मुहिम कृषि तंत्रा और गाँव कनेक्शन रूरल मिडिया द्वारा शुरू की गयी है, आज वास्तव में इस तरह की मुहीम की जरूरत है और मिट्टी को बचाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी हैI ये पहल सराहना करने योग्य हैI

कुलपति जेपी शर्मा ने बताया, "जमीन की ऊपरी परत जिसे हम मृदा कहते हैं, इसका निर्माण करने में प्रकृति को काफी वक्त लगता है। इसकी सेहत का ख्याल रखना जरूरी है और जिस तरह से हम अंधाधुंध तरीके से रासायनिक खादों और दवाइयों का उपयोग कर रहे हैं, समय-समय पर मिट्टी परीक्षण कराकर मिट्टी की सेहत को जानना किसान भाइयों के लिए बेहद जरूरी हैI ताकि अच्छी उपज के साथ साथ मिट्टी की सेहत भी बरकरार रहेI"

चट्ठा फार्म पंचायत के किसानों ने पुष्प वर्षा कर किया साइकिल रैली का स्वागत

जागरूकता साइकिल रैली की शुरुआत जम्मू विश्वविद्यालय के प्रांगण से शुरु रैली के रास्ते में पड़ने वाली ग्राम पंचायत चट्ठा फार्म के किसानों ने रैली फूलों की बारिश की। इस मौके पर सरपंच अवतार सिंह ने कहा, "ये हम लोगों के लिए हर्ष का विषय है की हम इस रैली का हिस्सा बन सके हैं। किसान हित के लिए कृषि तंत्रा और गाँव कनेक्शन का अभियान सराहनीय है। देश भर के किसानों को इस तरह के कार्यकर में सक्रिय जनसहभागिता निभानी चाहिये।"

तस्वीरों में देखिये मृदा संरक्षण की साइकिल यात्रा





साइकिल रैली पर फूलों की बारिश की गई।


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