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सोनम वांगचुक का बायकाट मेड इन चाइना अभियान, देशवासियों से अपील, चीनी सामान का करें बहिष्कार

प्रतिष्ठित मैगसेसे अवार्ड विजेता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर बायकाट मेड इन चाइना अभियान शुरू किया है, लद्दाख से उन्होंने देश के लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

भारत और चीन में बढ़ते तनाव के बीच प्रतिष्ठित मैगसेसे अवार्ड विजेता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर बायकाट मेड इन चाइना अभियान शुरू किया है। अपने इस अभियान में वांगचुक बता रहे हैं कि कैसे हथियारों से नहीं, बल्कि देश के नागरिक साथ मिलकर चीन को जवाब दे सकते हैं। पढ़िए उनके ही शब्दों में, उनकी कही बात ...

नमस्कार, सलाम और जुले, मैं हूँ सोनम वांगचुक, लद्दाख से ... आप में से कुछ हमें जानते होंगे, हमारे शिक्षा सुधार के कामों के बारे में या फिर पर्यावरण के काम में, आइस स्तुपा आर्टिफीसियल ग्लेशियर जैसे कामों के लिए, या फिर आई लिव सिम्पली जैसे ग्लोबल मूवमेंट्स के लिए, जो कि सादा जीवन अपना कर क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए लोगों को प्रेरित करती है।

मगर दोस्तों आज मैं इन चीजों के बारे में नहीं, बल्कि आप लोगों को एक बहुत ही जरूरी सन्देश देने के लिए आया हूँ, जो चीन और भारत के बीच अभी जो टकराव और तनाव की स्थिति बनी है, इसके बारे में आपकी क्या जिम्मेदारी है।

मैं लद्दाख में हूँ और आप देख रहे हैं सिन्धु नदी को बहते हुए देख रहे हैं यहाँ, और वो जो पहाड़ियां हैं, उनके पीछे नुब्रा और चांगतांग के वो इलाके हैं जहाँ पर यह तनाव बढ़ता जा रहा है, हजारों सैनिक वहां ले जाए जा चुके हैं, सुनने में आया है कि चीनी वायु सेना के जहाज भी वहां तैनात किये गए हैं, और एक घंटे पहले भारतीय वायु सेना के जहाज भी मेरे ऊपर मंडरा रहे थे।

सामान्यता जब सीमा पर तनाव होता है तो हम आप जैसे नागरिक यह सोचकर सो जाते हैं रात को कि सैनिक इसका जवाब दे देंगे, मगर मैं आज आप लोगों को यह जरूरी बात बताना चाहता हूँ कि इस बार सिर्फ सैनिक जवाब नहीं, दो तरफ़ा जवाब हो और उसमें नागरिक जवाब भी हो, तो आप जैसे नागरिक दिल्ली, मुंबई और बंगलोर और अनेक शहरों से क्या कर सकते हैं इसमें, यह समझने के लिए पहले हमें समझनी होगी चीन की यह हरकत और वो ऐसा क्यों कर रहा है?

सोनम वांगचुक ने देश के लोगों से बायकाट मेड इन चाइना अभियान से जुड़ने की अपील की।

आपने देखा होगा कि यह सिर्फ भारत के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि पिछले कई हफ़्तों से चीन यह दक्षिणी चीन सागर में वियतनाम, ताइवान और अब हांगकांग के साथ भी छेड़खानी कर रहा है, और मेरा यह विश्लेषण है कि वो यह सब किसी देश के साथ दुश्मनी से ज्यादा अपने अन्दर की समस्याओं को सुलझाने के लिए कर रहा है।

आज चीन को सबसे बड़ा डर है तो अपनी जनता से डर है, उनकी 140 करोड़ की आबादी जो कि एक बंधुआ मजदूर की तरह बिना मानवाधिकारों के चीनी तानाशाह सरकार के लिए काम करते हैं, और उसे धनी बनाते हैं, जब वो नाराज हो जाए तो फिर एक क्रांति की सी परिस्थिति बन पड़ती है और इससे चीन बहुत डरता है।

आज कोरोना के प्रकोप के बाद चीन में फैक्ट्रियां बंद हैं, एक्सपोर्ट्स बंद हैं और बेरोजगारी 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, लोग बहुत नाराज हैं, क्रांति हो सकती है, तख्तापलट हो सकता है, इसीलिए चीन अपने पड़ोसियों से दुश्मनी करके अपनी जनता को अपने साथ जोड़ने में लगा हुआ है, और यह पहली बार नहीं कर रहा है, 1962 में जब भारत के साथ जंग की तो वो जंग भी उसने अपनी जनता को संभालने के लिए की थी, तब चार साल का आकाल और भुखमरी हुई थी और इससे ध्यान हटाने के लिए यह जंग की थी।

चीन के लिए अपनी जीडीपी और जो खुशहाली है, उसे बढ़ाते रहना बहुत ही जरूरी है, और जिस दिन जीडीपी घट जाये वहां की जनता क्रांति के लिए तैयार है, मैं तो कहता हूँ कि इस बार भारत की बुलेट पॉवर से भी वॉलेट पॉवर काम आएगी, जो नागरिक पैसा खर्च करते हैं चीन के सामान को खरीदने में, ज़रा सोचिए हम आप भारतीय उद्योग को मार कर चीन से मूर्तियों से कपड़ों तक हर साल पांच लाख करोड़ के सामान खरीदते हैं और फिर ये पैसा आगे जाकर हमारे सीमा पर हथियार और बन्दूक बनकर हमारे सैनिकों के मौत का कारण बन सकते हैं, तो इसलिए अगर हमारे देश के 130 करोड़ लोग और तीन करोड़ भारतीय जो बाहर के देशों में हैं, सब मिलकर भारत में और बल्कि दुनिया भर में एक बायकाट मेड इन चाइना मूवमेंट या अभियान शुरू करते हैं, तो आज दुनिया भर में चीन के प्रति रोष है, हो सकता है कि सारी दुनिया साथ आये और इतने बड़े स्तर पर चीनी व्यापार का बायकोट हो, कि चीन को जिसका सबसे बड़ा डर था वही हो, यानी कि उसकी अर्थव्यवस्था डगमगाए और उसकी जनता रोष में आये, विरोध और तख्तापलट।

और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो कितनी बदनसीबी की बात होगी भारत के लिए, जरा सोचिए, एक तरफ हमारी सेना सीमा पर जंग लड़ रही होगी, और दूसरी तरफ हम आप चीनी सामान मोबाइल से लेकर कंप्यूटर, कपड़ों से लेकर खिलौनों तक, को खरीद कर उनकी सेना को पैसा भेज रहे होंगे, चीन की सेना को।

भारतीय इंटरनेट उपभोक्ताओं के बीच 44 चीनी मोबाइल एप्पस काफी लोकप्रिय हुए हैं। इन एप्पस में Like, Helo, UC Browser, TikTok, ShareIT शामिल हैं। फैक्टर डेली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय स्मार्टफोन्स पर चीनी एप्पस हावी हैं। भारत में गूगल प्ले स्टोर पर टॉप 100 मोबाइल एप्पस में से 50 फीसदी चीनी एप्पस हैं।

ये तो हुई हार्डवेयर की बात, दूसरी तरफ हमारे युवा चीनी सॉफ्टवेयर्स, एप्पस, गेम्स, जैसे टिकटोक, शेयरईट, इन सब में मस्त उन्हें दूसरी तरफ से करोड़ों-करोड़ों का पैसा भेज रहे होंगे, तो इसलिए बहुत जरूरी है कि हम एक नागरिक जवाब जरूर दें और इसे एक अभियान बनाये ग्लोबल मूवमेंट की तरह, यह बायकाट मेड इन चाइना का जो अभियान है वो भारत के लिए भी एक वरदान साबित होगा, जैसे कि हमारे भारतीय प्रधानमंत्री ने एक विज़न हमें दिया था, स्वावलंबन का, सेल्फ रिलायंस, वो तब हो सकता है जब हमारे अपने उद्योग फले-फूलें और जब हम बायकाट करते हैं इन सामान का तो अपने देश के उद्योग का, उत्पाद का हम प्रयोग करेंगे और उससे मजदूरों को रोजगार मिलेगा और सारा देश खुशहाल होगा, बजट होगा कि हम और अच्छी तरह से टक्कर ले सकें सीमा पर भी।

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तो इसके लिए मैं आप लोगों से अपील करता हूँ जहाँ तक एप्पस और सॉफ्टवेयर की बात है तो हमारे युवाओं को एक हफ्ते में उन्हें अनइंस्टाल करना चाहिए, बायकाट मेड इन चाइना, सॉफ्टवेयर इन अ वीक एंड हार्डवेयर इन अ इयर, क्योंकि साजो-सामान के लिए वक़्त लगेगा, हमारे अपने देश से और बाहर से विकल्प निकलने तक, तो इसे हम एक साल के अन्दर कर सकते हैं, तो यह हम न सिर्फ अपना प्रतिज्ञा करें, बल्कि 100 और लोगों को इसके बारे में समझाएं, शेयर करें सोशल मीडिया पर और हमारी जो मीडिया है वो जनता तक, देश के कोने-कोने तक पहुंचाए और जैसे ही इसका असर दिखने लगेगा, इंटरनेट से एप्पस लाखों में करोड़ों में अनइनस्टॉल होंगे, तो चीन को सन्देश साफ़ जाएगा, और यही एक तरीका उसे मेज पर पहुँचा सकता है जहाँ बातचीत हो शान्ति की।

देश में लॉकडाउन का सबसे ज्यादा फायदा चीनी ऐप टिकटॉक को हुआ है। लॉकडाउन में यह एप्प सबसे ज्यादा बार डाउनलोड किया गया। इकनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2020 के मुकाबले इस एप्प का डाउनलोड लॉकडाउन के दौरान 20% की तेजी से बढ़ा है।

तो जाते-जाते मैं यह बता दूँ कि मैं क्या करने जा रहा हूँ, इस फ़ोन पर जो भी चीनी एप्पस हैं, उन्हें तो मैं एक हफ्ते में हटा रहा हूँ, बल्कि यह फ़ोन जो कि चीन में बना है, इसे भी मैं एक हफ्ते में अपनी जिंदगी से अलग कर रहा हूँ और एक साल के अन्दर हर वो चीज जिस पर मेड इन चाइना लिखा है उसे जिंदगी से निकालने जा रहा हूँ।

हमें चीन से, चीनी लोगों से कोई समस्या नहीं है, चीनी सरकार और उनके रवैयों से समस्या है, जब तक चीन में ऐसा परिवर्तन न हो, हमें ऐसा करना होगा, और आप लोगों से मैं अपील करता हूँ कि आप अपने शहरों में, अपने मोहल्ले में ऐसे इवेंट्स करें जहाँ लोग प्रतिज्ञा करें कि चीनी सामान का बहिष्कार करें जब तक चीन में परिवर्तन न हो।

और मैं सालों से कहता रहा हूँ कि 21वीं सदी में देश के लिए जान देने की नहीं, बल्कि जिंदगी देने की जरूरत है, तो आप भी निभाइएगा अपना रोल ... जय हिन्द ...

(सोनम वांगचुक प्रतिष्ठित मैगसेसे अवार्ड विजेता हैं और उन्हें सरकारी स्कूल व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सरकार, ग्रामीण समुदायों और नागरिक समाज के सहयोग से 1994 में ऑपरेशन न्यू होप शुरू करने का श्रेय भी प्राप्त है)

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