भोपाल गैस हादसे के 34 साल: 'बीमार हुए तो ससुराल वालों ने छोड़ दिया'

भोपाल (मध्य प्रदेश)। प्रमिला शर्मा की ज़िंदगी में उस वक्त अंधेरा छा गया जब शादी के बाद ससुराल वालों ने ले जाने से मना कर दिया। एक के बाद एक दो-दो हादसों का दंश झेल प्रमिला टूट सी गईं, लेकिन जिंदगी तो जीनी ही है।

"जब हमारी शादी हुई उसके बीमार पड़ी तो बीमारी से डर के ससुराल वालों ने छोड़ दिया। तब से हम अपने माता-पिता के पास ही हैं," भोपाल गैस हादसे को झेल चुकी प्रमिला ने बताया। गैस हादसे के बाद प्रमिला की तबीयत खराब रहने लगी, और शादी के बाद एक बार बीमार पड़ीं तो मानों ससुराल वालों को बहाना सा मिल गया।

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"जब तबियत खराब हुई तो ससुराल वालों ने माता-पितासे कहा कि घर ले जाओ वहां गैस कांड का हास्पिल है, आसानी से इलाज हो जाएगा। उसके बाद ससुराल वाले लेकर नहीं गए," प्रमिला शर्मा ने अपनी दुख भरी कहानी सुनाई।

दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक जगत के हादसे भोपाल गैस लीक कांड में करीब 3500 लोग मारे गए थे, और दो लाख लोग प्रभावित हुए थे। यह हादसा यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में मिथाइल आइसो सायनाइड गैस के रिसाव से हुआ था।

दो दिसंबर, 1984 की रात के हादसे याद करते हुए प्रमिला ने बताया, "उस रात खाना खा के हम लो सोने की तैयारी कर रहे थे, उसी समय चीखने और चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। बाहर निकल कर देखा तो भगदड़ मच रही थी।"

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प्रमिला ने बताया, "हमारे घर में आठ लोग थे, सभी को दिक्कत होने लगी। भागते समय किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उस समय क्या करें? उस वक्त से लेकर अभी तक हम लोग बीमारियों से ही जूझ रहे हैं।" भोपाल गैस पीड़ितों के बच्चों से कोई शादी करने को तैयार नहीं होता, डर रहता है कि लड़का-लड़की की बीमारी के साथ-साथ बच्चों को भी बीमारी रहेगी।


"हम गैस पीड़ित आपस में ही शादियां करते हैं, बाहरी कोई हमसे शादी करने को तैयार नहीं होता। सभी को डर रहता है," गैस के रिसाव से पीड़ित हाजिरा बी ने कहा। आज से 34 साल पहले हुए हादसे के अंश आज भी इनकी ज़िंदगी को जहन्नुम बनाए हुए हैँ। उचित मुआवजे और इलाज के लिए ये गैस पीड़ित आज भी लड़ाई लड़ रहे हैं।

"तबीयत खराब होने से पापा की नौकरी छूट गई। मजदूरी बनती नहीं, बीमारी इतनी बडी है कि प्राइवेट इलाज से ही आराम मिलता है। सरकारी अस्पताल में पूरी दवाइयां भी नहीं मिल पातीं," प्रमिला ने बताया।

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