बिगड़ी जीवनशैली और बदला भोजन ग्रामीणों को बना रहा बीमार

ऐसे लोगों की संख्या गांव में अधिक है जिन्हें मालूम भी नहीं है कि वे मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   7 Oct 2019 12:06 PM GMT

बिगड़ी जीवनशैली और बदला भोजन ग्रामीणों को बना रहा बीमार

लखनऊ। "मैं तो खूब काम करती थी। पूरे घर के लोगों का खाना बनाना, जानवरों की देखभाल और खेती का काम भी मेरे जिम्मे था। काम करते-करते जान निकल जाती थी, फिर भी मुझे शुगर की बीमारी हो गई। लोग कहते हैं कि यह बीमारी शहर के लोगों को होती है, क्योंकि वे काम नहीं करते हैं। वे शुद्ध खाना भी नहीं खाते हैं। लेकिन पता नहीं मुझे कैसे यह बीमारी हो गई। हर महीने चार से पांच हजार रुपए इलाज में खर्च हो जाते हैं। इसी चिंता में मेरा ब्लड प्रेशर भी बढ़ गया है।"

यह कहना है उत्तर प्रदेश के जनपद उन्नाव के ब्लॉक अचलगंज की रहने वाली शशि त्रिवेदी (55 वर्ष)का। शशि देवी पिछले 25 साल से शुगर से पीड़ित हैं। अभी तक शुगर और ब्लड प्रेशर को शहरी लोगों की बीमारी कहा जाता था, लेकिन इधर के कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में ये बीमारियां बहुत तेजी से पैर पसार रही हैं। ग्रामीणों में इन रोग के होने का सबसे बड़ा कारण उनकी जीवनशैली में बदलाव और तनावपूर्ण जीवनशैली भी काफी हद तक जिम्मेदार है।

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सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि ऐसे लोगों की संख्या गांव में अधिक है जिन्हें मालुम भी नहीं है कि वे मधुमेह या उच्च रक्तचाप की बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि इस बीमारी का शुरुआत में कोई विशेष लक्षण नहीं दिखता।

शुगर और बीपी के इलाज में आने वाले खर्च को लेकर शशि देवी काफी परेशान रहती हैं। एक बेटा है जो पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली में रहता है। शशि देवी बताती हैं," हर माह बेटा कुछ रुपए भेज देता है उसी से दवा और घर का खर्चा चलता है। दो बीघे खेती है उससे भी कुछ मदद मिल जाती है। बीमारी ने शरीर और इलाज के रुपयों ने कंगाल बना दिया है। पता नहीं इस बीमारी से कब छुटकारा मिलेगा।"

आईसीएमआर और आईएनडीआईआई ने सितंबर 2012 से जुलाई 2015 के बीच मधुमेह के विस्तार पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन में 14 राज्यों पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, झारखंड, असम, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय और मणिपुर के अलावा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को शामिल किया गया।

खेती का ज्यादातर काम अब मशीनों से होेन लगा है।

करीब 57 हजार लोगों पर किये गए सर्वे से जो नतीजे निकले हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। अध्ययन में शामिल 7 राज्यों के शहरी इलाकों के गरीब वर्गों में मधुमेह की तादात अमीरों से ज्यादा पाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार इन 15 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में कुल आबादी के 7.3 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए। इसमें शहरी क्षेत्रों में 11.2 फीसदी जबकि ग्रामीण इलाकों में 5.2 फीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण इलाकों में मधुमेह का तेजी से विस्तार हुआ है। पंजाब की 8.7 फीसदी ग्रामीण आबादी मधुमेह की चपेट में है। तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में 13.7 फीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में डायबिटीज तकरीबन 130 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है। भारत की शहरी आबादी का करीब 14 फीसदी और ग्रामीण आबादी का 7.5 फीसदी डायबिटीज से पीड़ित है। आम तौर पर 45 से 55 की उम्र के लोगों में मधुमेह होने की आशंका ज्यादा होती है।

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ग्रामीणों में इन बीमारी होने की वजह के बारे में राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ फीजिशियन डॉक्टर एससी मौर्य का कहना है, " ग्रामीणों में विभिन्न तरह के दबाव के कारण भी मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी तेजी से फैल रही है। ग्रामीणों की जीवनचर्या में हुए बदलाव के कारण इन रोगियों की संख्या बढ़ रही है। खाने-पीने की चीजों में कीटनाशकों का इस्तेमाल भी कहीं न कहीं इन बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी शारीरिक श्रम करने का चलन कम हुआ है, इसलिए अब गांवों में भी मधुमेह रोगी बढ़ रहे हैं। "


" ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्ति पहले अपने हाथों से सभी काम करते थे, जिससे उन्हें बीमारियां कम होती थी। खेतों में फावड़ा चलाना, कुएं से पानी खींचना और पशुओं के लिए चारा खुद काटते थे। इस काम से उनकी काफी कैलोरी खर्च होती थी। अब कृषि संबंधित ज्यादातर काम मशीन से होने लगा है। मशीन आ जाने से लोग आराम तलब भी हो गए हैं, जो लोगों को बीमार बनाने का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है।" डा. मौर्य ने आगे बताया।

मधुमेह क्या है इस बारे में सेंट जोसफ हॉस्पिटल लखनऊ के डॉक्टर सैफुदिन ने बताया, " जब हमारे शरीर की अग्न्याशय (पेंक्रियाज) में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण खून में ग्लूकोज स्तर समान्य से अधिक बढ़ जाता है तो उस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है। इंसुलिन एक हॉर्मोन है जो पाचक ग्रन्थि द्वारा बनता है और जिसकी जरूरत भोजन को एनर्जी बदलने में होती है। इस हार्मोन के बिना हमारा शरीर शुगर की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा लेने में काफी कठिनाई होती है। जब ग्लूकोज का बढ़ा हुआ स्तर हमारे रक्त में लगातार बना रहता है तो यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है जिसमें आंखें, मस्तिष्क, हृदय, धमनियां और गुर्दे प्रमुख हैं।"

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" डायबिटिज और हाई ब्लड प्रेशर में बहुत ज्यादा गहरा संबंध है। डायबिटीज के रोगियों में उच्च रक्तचाप होने का खतरा बना रहता है। डायबिटीज के मरीज मुश्किल से ही बीपी का शिकार होने से बच पाता है। 60 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों में ऐसा देखा गया है कि शुगर के मरीज उच्च रक्तचाप के शिकार हो जाते हैं। इसके लिए डायबिटीज होने पर सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है।" डॉ. सैफुदिन ने आगे बताया।


लैनसेट डायबिटीज एंड एंटोक्रोनोलाजी जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में न सिर्फ अमीर लोग बल्कि गरीब लोग भी तेजी से डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। गांवों का तेजी से शहरीकरण होता जा रहा है। गांव के लोग शहर में आते जा रहे हैं और जब गांव वापस जाते हैं तो अच्छी चीजें ले जाते हैं तो बुरी चीजें भी ले जाते हैं। गांव में बीमारियां भी उसी तरह से जा रही हैं ।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कम्युनिटी मेडिसीन के डॉक्टर ने बताया, " बीपी और शुगर की बीमारी इस समय ग्रामीण लोगों को भी बहुत तेजी से अपने गिरफ्त में ले रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गाँव और ग्रामीण पहले की तरह रहे नहीं। गाँव के लोग भी अब पहले की तरह शारीरिक श्रम नहीं कर करते हैं। पहले पैदल या साइकिल से लोग कई किलोमीटर तक चले जाते थे। लेकिन अब लोग बाइक और कार से आने-जाने लगे हैं। इस वजह से लोगों में मोटापा बढ़ रहा है जो शुगर व बीपी का कारण बनता है।"

बीपी और शुगर की मुख्य वजह

-पर्यावरण प्रदूषण

-फसलों में पेस्टीसाइड का प्रयोग

-मानसिक तनाव

-फास्ट फूड व अन्य प्रकार का खानपान

-खेलों से दूरी

-शारीरिक मेहनत व घूमने की आदत न होना

- वजन का लगातार बढऩा

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जंक फूड का चलन ग्रामीण क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।

गोरखपुर के पिपराइच ब्लॉक के गाँव रक्षवापार निवासी रामराज (40वर्ष) हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। रामराज बताते हैं, " मुझे तो पता ही नहीं था कि मुझे बीपी की बीमारी है। एक दिन बैठे-बैठे चक्कर आने लगा, बेचैनी होने लगी और बहुत पसीना निकलने लगा। घर वाले आनन-फानन में डाक्टर के पास ले गए। जहां जांच के बाद पता चला कि मुझे हाई बीपी है। मुझे तो यकीन नहीं होता यह बीमारी मुझे कैसे हो गई।"

खान-पान विशेषज्ञ डॉक्टर सुरभि जैन का कहना है, " गांव और शहर में अब ज्यादा अंतर रह नहीं गया है। गाँवों का बहुत तेजी से शहरीकरण होता हो रहा है। मधुमेह एक वंशानुतगत बीमारी है। इसके साथ-साथ खान-पान और दिनचर्या भी इस पर असर डालती है। गांव के लोग भी अब शहरी लोगों की दिनचर्या को अपना रहे हैं, देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना। वहीं फास्ट फूड की पहुंच अब गांवों तक हो चुकी है। मैगी और बर्गर लगभग हर बड़े चौराहे पर मिलने लगा है। यह सब कहीं न कहीं ग्रामीणों में बढ़ती मधुमेह की बीमारी के कारण हैं। आज की तारीख में मधुमेह की स्थिति गांव और शहरों में लगभग बराबर ही है।"

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