कार्टोसैट-2 समेत 31 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण, ‘तीसरी आंख’ देगी कृषि क्षेत्र की तत्‍काल जानकारी 

कार्टोसैट-2 समेत 31 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण,  ‘तीसरी आंख’ देगी  कृषि क्षेत्र की  तत्‍काल जानकारी श्रीहरिकोटा में पीएसएलवी-सी 440

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) (आईएएनएस)। नए साल 2018 में स्वामी विवेकानंद की जयंती (12 जनवरी 1863) पर इसरो ने 31 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया और कार्टोसैट-2 कक्षा में स्थापित हुआ। 44.4 मीटर ऊंचे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) ने 28 घंटों की उल्टी गिनती के बाद शुक्रवार सुबह 9.29 बजे उड़ान भरी थी। भारत का यह 100वां उपग्रह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इसरो को 100वें उपग्रह के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी।

प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट और 18 सेकंड के बाद 320 टन वजनी रॉकेट से एक-एक करके उपग्रह अलग होते गए और पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हुए।

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उपग्रह कार्टोसैट-2, जिसे 'आई इन द स्काई' कहा जा रहा है, इस उपग्रह के जरिए धरती की बड़ी शानदार तस्वीरें ली जा सकती हैं। सीमा पर आतंकियों की गतिविधियों पर नज़र रखने में अब भारत को और आसानी होगी, यह एक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है जो कि दुश्मन पर नज़र रखने के काम आएगा। इस उपग्रह की मदद से हम सीमा पार भी पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं। कार्टोसैट 2 से कृषि क्षेत्र की तत्‍काल जानकारी मिलेगी।

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इससे पूर्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपनी वेबसाइट पर लिखा, "शुक्रवार की सुबह 9.28 बजे प्रक्षेपास्त्र के प्रक्षेपण के लिए यहां मिशन नियंत्रण में सुबह 5.29 बजे 28 घंटों की उल्टी गिनती शुरू हुई।"

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इसरो ने अपनी वेबसाइट पर गुरुवार को लिखा, "पीएसएलवी-सी 440 के चौथे चरण के प्रणोदक को भरने का काम चल रहा है।" चौथे चरण के पीएसएलवी-सी-40 की ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 320 टन होगा।

पीएसएलवी के साथ 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह एकीकृत किए गए हैं ताकि उन्हें प्रेक्षपण के बाद पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में तैनात किया जा सके। कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैं: कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका।

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सैटेलाइट केंद्र निदेशक एम. अन्नादुरई ने बताया, "माइक्रोउपग्रह अंतरिक्ष में भारत का 100वां उपग्रह होगा।"

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं।

कुल 28 अंतर्राष्ट्रीय सह यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था। पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है।

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अन्नादुरई ने कहा, "पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था। पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।" अन्नादुरई ने कहा, "हमने विस्तार से अध्ययन किया है कि क्या गलत हो सकता है और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि यह दोबारा न हो। पीएसएलवी-सी 40 के साथ हम खेल में वापस आ गए हैं।"

प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो को 100वें उपग्रह के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को 100वें उपग्रह के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी।

मोदी ने ट्वीट किया, "मैं आज पीएसएलवी के सफल प्रक्षेपण पर इसरो और उसके वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं। नए साल में यह सफलता एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश के तेजी से बढ़ते कदम हमारे नागरिकों, किसानों और मछुआरों के लिए लाभकारी होंगे।"

मोदी ने कहा, "इसरो द्वारा 100वें उपग्रह का सफल प्रक्षेपण संगठन की शानदार उपलब्धियों और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के उज्‍जवल भविष्य को दर्शाता है।" उन्होंने कहा, "भारत की सफलता के लाभ हमारे साझेदारों के लिए भी उपलब्ध हैं! आज लॉन्च किए गए कुल 31 उपग्रहों में से 28 उपग्रह अन्य छह देशों के हैं।"

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