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सभी प्रवासी मजदूरों को 15 दिन में घर पहुंचाएं राज्य : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फँसे प्रवासी मजदूरों को 15 दिनों के अन्दर उनके घर पहुँचाने के आदेश सभी राज्य सरकारों को दिए हैं।

सभी प्रवासी मजदूरों को 15 दिन में घर पहुंचाएं राज्य : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फँसे प्रवासी मजदूरों को 15 दिनों के अन्दर उनके घर पहुँचाने के आदेश सभी राज्य सरकारों को दिए हैं।

प्रवासी मजदूरों के मामले में आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजदूरों की घर वापसी लम्बे समय से चल रही है। ऐसे में इन प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए हम 15 दिन का समय देते हैं, इसके अलावा सभी राज्यों को जिलेवार इन मजदूरों का रिकॉर्ड भी तैयार करना होगा। साथ ही राज्य सरकार यह भी स्पष्ट करें कि इन मजदूरों के लिए रोजगार और अन्य राहत कैसे प्रदान करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस संजय किशन कॉल की खंडपीठ ने राज्य सरकारों से जवाब माँगा। इससे पहले 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी राज्य सरकारों को प्रवासी मजदूरों से ट्रेन या बस का किराया न लेने और उनके लिए भोजन का प्रबंध करने का आदेश दिया था।

केंद्र सरकार की ओर से जवाब दे रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन जून तक श्रमिकों की वापसी के लिए 4,228 ट्रेनें चलायीं जा चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए गयी हैं। अब तक लगभग एक करोड़ प्रवासी मजदूर अपने गंतव्य तक पहुँच चुके हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि अभी कितने प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में फँसे हुए हैं? इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि हम राज्यों के लगातार संपर्क में हैं और अभी तक फँसे प्रवासी मजदूरों का सही आंकड़ा राज्य ही दे सकते हैं। हमसे अभी भी 171 ट्रेन चलाये जाने का अनुरोध राज्यों द्वारा किया गया है और अगर कोई राज्य ट्रेन चलने के लिए अनुरोध करता है तो हम 24 घंटे के अन्दर उन तक ट्रेन मुहैय्या कराते हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों के वकीलों से सवाल-जवाब भी किये। इस बीच वरिष्ठ वकील कोलिन गोंसाल्वेस ने रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन सिस्टम काम नहीं कर रहा है, इस वजह से भी मुश्किलें सामने आ रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इसका उपाय के बारे में सवाल किया।

वकील कोलिन गोंसाल्वेस ने जवाब में कहा कि फँसे हुए प्रवासी मजदूर पास के पुलिस स्टेशन और अन्य स्थानों में ट्रेन से घर वापसी के लिए पंजीकरण फॉर्म भर सकते हैं। इस बीच राज्यों की ओर से सुप्रीम कोर्ट को एक चार्ट के माध्यम से लौटे प्रवासियों के बारे में जानकारी दी गयी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को यह निर्देश दिए कि हर एक गाँव को यह पता होना चाहिए कि कहाँ से कितने प्रवासी आए हैं ताकि रोजगार उत्थान योजनाएँ भी शुरू हों। हम सभी राज्य सरकारों को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 दिन का समय देते हैं।

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