'मैं एक सेक्स वर्कर हूं, ये बात सिर्फ अपनी बेटी को बताई है ताकि...'

मैं एक सेक्स वर्कर हूं, ये बात सिर्फ अपनी बेटी को बताई है ताकि...सेक्स वर्कर की असली कहानी। फोटो- प्रतीकात्मक

उस सेक्स वर्कर की कहानी, जिसने अपने परिवार को चलाने के लिए कई वर्षों तक जिस्मफरोशी की.. और एक दिन उसने एक दिन ये बात अपनी बेटी को बताई.. फिर

"हमें बुलाने वाले ज्यादातर लोग उम्रदराज, रिटायर्ड लोग होते हैं, लेकिन सबकी चाहत 16 साल की लड़की की होती है। यहां लड़की की उम्र, उसकी फिटनेस और रंग के हिसाब से पैसे मिलते हैं। औसतन 200 से 2000 तक रुपए एक बार के मिलते हैं।" किरन, धंधे की परते खोलती हैं। (किरन की पहचान छुपाने के लिए उनका नाम बदला गया है)

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कभी नौकरी के झूठे वादे, तो कभी प्यार का झांसा, पति का धोखा और कई बार खुद उनकी मजबूरी किसी बंद दरवाजे के पीछे कपड़े उतारने को मजबूर करती है, जिसके बाद बाहर की दुनिया उनके लिए सिमट जाती है।

जिस्मफरोशी की दुनिया रहस्यों जैसी है, ज्यादातर लोग अपने-अपने हिसाब से अंदाजा लगाते हैं। कहा जाता है जो यहां एक बार आ गया वो इसकी काली साया से निकल नहीं पाता। कभी नौकरी के झूठे वादे, तो कभी प्यार का झांसा, पति का धोखा और कई बार खुद उनकी मजबूरी किसी बंद दरवाजे के पीछे कपड़े उतारने को मजबूर करती है, जिसके बाद बाहर की दुनिया उनके लिए सिमट जाती है।

दिल्ली में रहने वाली किरन इनमें से एक हैं। घर वालों ने गरीबी के चलते 17 साल की उम्र में शादी कर दी थी, मजदूर पति शराब के नशे में ऐसे खोया कि खुद किरन ईंटा-गारा ढो कर एक बेटा और बेटी का पेट नहीं पाल पा रही थीं, मजबूरी में वो सेक्स वर्कर बन गईं।

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किरन अब अपने काम से खुश हैं, पैसे इतने कमाए कि बेटा और बेटी दोनों को दिल्ली के अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हैं। पति को मतलब नहीं, लेकिन मोहल्ले और रिश्तेदारों के लिए वो घरेलू महिला है, और कुछ पार्टटाइम काम करती हैं। वो चाहती भी नहीं दुनिया को उनके काम के बारे में पता चले।

फिर बेटी को क्यों बताया पूछने पर वो कहती हैं, " मैं नहीं चाहती थी मेरी तरह बेटी की भी जिंदगी बर्बाद हो, उसे पता होना चाहिए था जिन पैसों से उसके स्कूल की फीस जाती है, वो कितनी मुश्किल से आए हैं, अगर वो पढ़-लिखकर बन गई तो मैं सब भूल जाऊंगी।"

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इस तरह का पेशा और परिवार को कैसे संभालती हैं, पूछने पर किरन का गला भर्रा आया। मायूसी के साथ वो बताती हैं, "हर वक्त डर बना रहता है, कोई देख न किसी को पता न चल जाए। अगर किसी को पता चला तो लोग क्या कहेंगे। बच्चों का क्या होगा। लोग क्या बोलेंगे ? इसी लिए हमारा संगठन चाहता है कि हमारे काम (सेक्स वर्कर) को कानून का दर्जा मिले। कामकाजी महिला की तरह माना जाए। ताकि परिवार को कुछ पता चलने पर परिवार को भी गलत नजरिए से न देखा जाए।"

किरन ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स से जुड़ी हैं। इस संगठन में पूरे देश की 2 लाख से ज्यादा सेक्स वर्कर हैं। इस संगठन की अध्यक्ष ने पिछले दिनों में दिल्ली हुई एक कॉन्फ्रेंस में इस पेशे की मुसीबतों, सेक्स वर्कर की मांगों और जरुरतों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि या तो सरकार इस पेशे को कानूनी अपराध के दायरे से बाहर निकाले और रोजगार का दर्जा दे या फिर इन लड़कियों को नौकरी या रोजगार के दूसरे विकल्प दिए जाएं।

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एक सेक्स वर्कर की कामकाजी उम्र कुछ ही वर्षों की होती है। किरन की उम्र ज्यादा तो नहीं लेकिन उनके मुताबिक शरीर अब वैसा 'बिकाऊ' नहीं रहा है। अब वो ग्राहकों की पहली पसंद नहीं हैं।

कुछ देर चुप रहने के बाद वो कहती हैं, "हर आदमी को तो सुंदर और कम उम्र की लड़की चाहिए। फिर मनमाने पैसे नहीं मिलते, वैस भी ग्राहक हर बार नई लड़की चाहता है। हां कुछ लोगों को हमसे प्यार हो जाता है, वो जरुर लगातार आते रहते हैं।"

सीरीज का अगला भाग- सेक्स एक्टिविस्ट का इंटरव्यू- घुटन भरे पेशे से निकलना क्यों नहीं चाहती ये लड़कियां ?

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