देश में छुट्टा जानवरों की वजह से मर रहे लाखों लोग 

Diti BajpaiDiti Bajpai   12 Dec 2017 11:54 AM GMT

देश में  छुट्टा जानवरों की वजह से मर रहे लाखों लोग छुट्टा जानवर की वजह से देश के कई राजमार्गोँ में दुघर्टनाएं बढ़ रही हैं।

लखनऊ। "अगस्त में मेरा दोस्त अपने पूरे परिवार के साथ लखनऊ से कानपुर आ रहे थे। तभी बीच रास्ते में सांड की लड़ाई में उनकी गाड़ी पलटने की वजह से दोस्त की वहीं मौत हो गई। परिवार के लोगों को बहुत चोट आई थी।" ऐसा बताते हैं, कानपुर जिले के स्वरूप नगर में रहने वाले अशोक शुक्ला।

अशोक शुक्ला के दोस्त ही नहीं बल्कि देश में छुट्टा जानवरों की वजह हर साल लाखों लोग मर जाते हैं। देश के कई राज्यों में सड़कों पर कूड़ा खाते, डिवाइडर पर बैठे या फिर राजमार्गों के किनारे झुंड में नजर आ जाते हैं। इन छुट्टा जानवर की वजह से देश के कई राजमार्गोँ में दुघर्टनाएं बढ़ रही हैं। इनकी खरीद-बिक्री कम होना भी दुघर्टनाएं बढ़ने का कारण है।

सड़कों पर चोटिल हो रहे आवारा पशुओं को बेहतर चिकित्सीय सुविधा देने पर काम कर रही चेन्नई की संस्था ब्लू क्रॉस ऑफ इंडिया के अनुसार, "भारत में हर साल लाखों की संख्या में छुट्टा जानवरों की वजह से लोग चोटिल होते हैं और कई मामलों में तो जानवरों से टकराकर गाड़ियां गहरे गड्ढ़ों में गिर जाती हैं। इसमें से 75 फीसदी मामले में जानवरों की मौत हो जाती है।"

खरीद-बिक्री कम होना भी दुघर्टनाएं बढ़ने का कारण

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देश में आवारों जानवरों को रखने के लिए बनी गोशालाओं की स्थिति भी काफी दयनीय है। बड़ी संख्या में खुले छोड़े गए इन जानवरों को किसी गोशाला में भी नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इन के लिए चारा-पानी और रखने की जगह नहीं है। जो आवारा जानवर गोशालाओं में है वो लचर प्रबंधन और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते उनकी मौत हो जाती है।

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राजमार्गों में ऐसे हादसे अब आम हो गए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के विभिन्न राजमार्गों और कई रास्तों पर छुट्टा गोवंशीय पशुओं के विचरण और उनके कारण होने वाले हादसों की समस्या के समाधान के लिए हर जिले में गोशालाएं खोलने के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में बुन्देलखण्ड के सात जिलों और 16 नगर निगम क्षेत्रों में एक हजार पशुओं के रखरखाव की क्षमता वाली गोशालाओं की स्थापना कर उनमें गोवंशीय और छुट्टा पशुओं को रखा जाएगा। उसके बाद अन्य जिलों में भी ऐसी गोशालाएं स्थापित की जाएंगी। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई गोशालाओं का स्थापित नहीं हुई है। इन पर काम चल रहा है।

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आए दिन राजमार्गों में होने वाले इन हादसों को आधिकारिक रिकार्ड नहीं है। पिछले 14 वर्षों से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए काम कर रही संस्था एराइव सेफ के अध्यक्ष हरमन सिंह सिद्दू बताते हैं “ हाईवे पर सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं छुट्टा जानवरों को बचाने या उनके अचानक बीच में आ जाने के कारण होते हैं, लेकिन इन हादसों का पुलिस के पास कोई रिकार्ड नहीं है। इसलिए आज तक ऐसा कोई आंकड़ा नहीं मिला की कितने हादसे आवारा जानवरों की वजह से होते है। इनका एक रिकार्ड बनाना बहुत जरूरी है।"

्टा जानवरों को बचाने या उनके अचानक बीच में आ जाने के कारण ही हादसे होते

पंजाब गोसेवा आयोग के चेयरमैन कीमती लाल भगत ने हाल ही में एक सर्वे कराया था, जिसमें पता चलास कि दो साल में 290 लोगों की मौत घुमंतू जानवरों (गाय, बछड़ों और सांडों) की वजह से हुई है। भगत के मुताबिक करीब 20 फीसदी गायें प्रदेश की सड़कों पर बेसहारा घूम रही हैं। इसको सख्ती से लेते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाएंगे, जिसकी पावर नगर निगम एक्‍ट में नगर निगमों को है। सभी जिलों में 25-25 एकड़ में गोशालाओं के शेड बनाए जा रहे हैं।

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लखनऊ की सड़कों पर भी आए दिन हादसों को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। लखनऊ के अपर नगर आयुक्त पीके श्रीवास्तव बताते हैं, "शहरों के अंदर छुट्टा जानवरों की लगातार बढ़ रही संख्या को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत एक महीने में हजारों की संख्या में छुट्टा जानवरों को पकड़कर गौशाला पहुंचाया गया है।"

अपनी बात को जारी रखते हुए श्रीवास्तव बताते हैं, " छुट्टा गायों को रखने के लिए लखनऊ की गोशालाओं में उनके रखने की जगह को बढ़ाया गया है। जल्द ही गोशालाओं का भी विस्तार किया जाएगा। हाइवे घूम रही गाय नगर निगम में नहीं आती है तो नहीं हम लोग उनको नहीं उठाते है।"

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ी खरीद-बिक्री कम होना भी दुघर्टनाएं बढ़ने का कारण

हरियाणा में करीब 25 हजार पशु सड‍़कों पर घूम रहे है। इनकी सबसे बड़ी वजह गोशालाओं की कमी है। हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला के मुताबिक जिन गोशालाओं में छुट्टा जानवरों को रखा जाता है। उनमें जगह और उनके चारे पानी की ही उचित व्यवस्था नहीं है।

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