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यूपी में इंजीनियरों को मिला छुट्टा जानवरों को पकड़ने का आदेश

Divendra SinghDivendra Singh   29 Jan 2020 7:36 AM GMT

यूपी में इंजीनियरों को मिला छुट्टा जानवरों को पकड़ने का आदेश

लखनऊ। आवारा गोवंश के लिए गो आश्रय स्थल तो बना दिए गए, लेकिन अभी भी इनकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। तभी मिर्जापुर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कार्यालय की ओर से एक आदेश जारी करके 9 इंजीनियरों को आवारा पशुओं की पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन बाद में ये आदेश वापस भी ले लिया गया।

जारी किए गए आदेश में कहा गया है, '27-01-2020 से 31-02-2020 तक होने वाली प्रस्तावित गंगा यात्रा में हिस्सा लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे की संभावना है। इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस लाइन मिर्जापुर से बिरोही तक अवर अभियंता की ड्यूटी लगाई जाती है।' साथ ही कहा गया है कि ये अवर अभियंता अपनी गैंग के साथ 29 जनवरी को 8-10 रस्सियां लेकर वहां पहुंचे। अगर आवारा पशु सड़क पर आएं तो उनका बांध कर रखें। ताकि मुख्यमंत्री के आवागमन में कोई दिक्कत ना हो। वहीं मीडिया में खबरें आने के बाद मिर्जापुर के डीएम ने सफाई देते हुए कहा कि यह आदेश गलती से जारी हो गया था।

इस बारे में जब मिर्जापुर के मुख्य अभियंता सिविल युगल किशोर शर्मा ने फोन बताया, "हमें ऐसे किसी आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं है, नीचे स्तर से ऐसा कोई आदेश जारी हुआ होगा। आदेश जारी हुआ है तो इंजीनियर आवारा पशुओं को क्यों पकड़ेंगे।"


जबकि अधिशासी अभियंता देव पाल ने फोन पर बताया, "अब हमने आदेश वापस ले लिया है, अब आदेश कर दिया तो कर दिया, अब तो वापस ले लिया है।"

उत्तर प्रदेश में हो रही गंगा यात्रा में 29 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मिर्जापुर पहुंचे हैं, 27 जनवरी से शुरू हुई इस यात्रा की शुरूआत बिजनौर से हुई। पांच दिवसीय गंगा यात्रा में केन्द्र सरकार के आठ मंत्री और जिलों के प्रभारी मंत्रियों को शामिल होना है। गंगा यात्रा दो मार्गों से निकाली जा रही है। यात्रा बिजनौर से कानपुर तक और बलिया से कानपुर तक निकाली जा रही है। पांच दिन चलने वाली गंगा यात्रा में इसके रास्ते में पड़ने वाले सभी 27 जिलों के प्रभारी मंत्री भी मौजूद रहेंगे।

इस संबंध में मिर्जापुर के इंजीनियर एसोसिएशन ने पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि उनके इंजीनियर पशुओं को पकड़ने में ट्रेंड नहीं है और अगर किसी भी कर्मचारी को चोट लगती है तो उसकी जिम्मेदारी इंजीनियर एसोसिएशन की नहीं होगी। बेहतर है कि प्रशासन किसी दूसरे एजेंसी से इस काम को कराएं।


छुट्टा गोवंश की समस्या उत्तर प्रदेश में बढ़ती ही जा रही है, जबकि इनके लिए गोशालाएं भी बनाई गईं हैं, लेकिन कभी सर्दी से तो कभी गर्मी में भूख-प्यास से गोवंश की मौत हो रही है। इन छुट्टा जानवरों की संख्‍या को लेकर पशुपालन विभाग ने एक सर्वे भी कराया था, जिसके मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 7 लाख 303 छुट्टा जानवर थे।

प्रदेश में छुट्टा जानवर की बढ़ी इस संख्‍या और किसानों की परेशानी के मद्देनजर यूपी सरकार ने जनवरी 2019 में छुट्टा जानवरों को रखने के लिए अस्‍थाई गोवंश आश्रय स्थल बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद से ही प्रदेश भर में 4954 अस्‍थाई गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं, इसमें 4 लाख 20 हजार 883 पशुओं को रखा गया है।

बात करें ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश के रख-रखाव और गोशाला निर्माण के लिए जारी बजट की तो उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 के लिए 247.60 करोड़ रुपए जारी किए थे। वहीं शहरी क्षेत्रों में कान्‍हा गोशाला एवं बेसहारा पशु आश्रय योजना के लिए 200 करोड़ रुपए की व्‍यवस्‍था की गई थी।

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से होकर बहने वाली गोमती नदी में पिछले एक सप्ताह में 50 से अधिक गायों का शव मिला है। पिछले सप्ताह 18 जनवरी को नैमिषारण्य स्थित शमशान घाट पर करीब 20 से 25 गायों का शव नदी में तैरते हुए मिला था, जिनकी अभी तक कोई जांच पड़ताल नही हो पाई है। वहीं मंगलवार को हरदोई-सीतापुर सीमा पर बने लोहराघाट पुल के किनारे लगभग फिर से 20 से 25 गायों के शव नदी में तैरते हुए मिले।

मौके पर जांच करने पहुंची एसडीएम, सिधौली किंशुक श्रीवास्तव ने कहा कि यह क्षेत्र हरदोई जनपद के थाना अतरौली में पड़ता है, यह हमारे क्षेत्र की घटना नहीं है। वहीं हरदोई के जिलाधिकारी पुलकित खरे से जब इस प्रकरण में बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नही है, पता कर के बताऊंगा।

उधर सीतापुर स्थित चडरा गौशाला से 50 से अधिक गायों को गायब बताया जा रहा है। हाल ही में महोली विधायक शशांक त्रिवेदी ने गौशाला का निरीक्षण किया तो पाया कि मौके पर सिर्फ 125 गायें ही मौजूद हैं, जबकि गौशाला में 185 गायों का पंजीकरण है। इसलिए आशंका जाहिर की जा रही है कि गोमती में मृत मिली गायें इसी गौशाला की हैं।

हालांकि गायों की मौत कैसे हुई, इसकी जांच होना अभी बाकी है। विधायक शशांक त्रिवेदी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि निरीक्षण के दौरान कई गायों के शव जमीन में दफन मिले, जबकि कई जिंदा और कमजोर गायों को कौवे और कुत्ते नोच के खा रहे थे। इसको लेकर विधायक ने सूबे के मुख्यमंत्री से शिकायत की है।


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