गन्ना किसानों के अच्छे दिन, बंद पड़ी चार चीनी मिले चालू होंगी

Ashwani NigamAshwani Nigam   28 April 2017 7:13 PM GMT

गन्ना किसानों के अच्छे दिन, बंद पड़ी चार चीनी मिले चालू होंगीचीनी मिल। (फाइल फोटो)

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश में सालों से बंद पड़ी चार चीनी मिलों के खोलने को फिर से चालू करने की तैयारी हो रही है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के आयुक्त् विपिन कुमार दि्वेदी ने बताया '' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर विभाग की एक टीम को बंद पड़ी चीनों मिलों को दौरे पर भेजा गया था। वहां से लौटकर इस टीम ने रिपोर्ट जमा की है।

'' उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सहकारी क्षेत्रे की गोरखपुर जिले की पिपराइच चीनी मिल, बस्ती जिले की मुण्डेरवा चीनी मिल, बलिया जिले की रसड़ा चीनी मिल और पीलीभीत जिले की मझौला चीनी मिल को दोबारा चालू करने को लेकर तैयारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड इन चीनी मिलों का संचालन करेगा।

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गन्ना आयुक्त ने बताया कि इन चार चीनी मिलों को उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी निगम और उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड मिलकर चीनी मिलों के विकास के लिए काम करेंगे। चारों चानी मिलों के खुलने पर इन क्षेत्रों किसानों ने खुशी जाहिर की है। पिपराइच ब्लाक के चिउटवां गांव के गन्ना किसान सतीश प्रसाद ने बताया '' साल 2008 में पिपराइच चीनी मिल बंद हो गई थी।

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इसके बाद से इस क्षेत्र के गन्ना किसानों को बहुत दूर महराजगंज जिले की मिल में गन्ना लेकर जाना पड़ता था। इस परेशानी के कारण अधिकतर किसानों ने गन्ना की खेती छोड़ दी। '' पिपराइच चीनी मिल 1932 में स्थापित हुई थी। वर्ष 1974 में इसे उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने खदीदा था। उसके बाद साल 2008 तक यह चीनी मिल चली। साल 2013 में 7.27 करोड़ में प्लांट औरी मशीनरी का स्क्रैप बेचा गया था। निगम ने 20.6460 हेक्टेयर रकबे का अधिग्रहण कर लिया है, जबकि 12.1360 क्विंटल जमीन का मामला अभी भी चल रहा है।

बस्ती जिलों में कभी गन्ना किसानों के बीच शान रही मुण्डेरवा चीनी मिल पिछले 18 साल से बंद पड़ी है। इस चीनी मिल को 1932 में स्थापित किया था और 1984 में उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने इसका अधिग्रहण कर लिया था। 15 साल चलने के बाद 1999 में यह मिल बंद हो गई। 30.3610 हेक्टेयर पर स्थापित इस चीनी मिल की निगम ने 17.0190 हेक्टेयर जमीन खरीद ली थी, जबकि 13.3420 हेक्टेयर जमीन विवादित है।

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बलिया जिले की इकलौती चीनी मिल रसड़ा चीनी मिल पिछले तीन साल से बंद है। इस चीनी मिलों के बंद होने से जहां इस क्षेत्र के हजारों मिल मजदूर भूखमरी की कगार पर है वहीं इस जिले के लाखों गन्ना किसानों ने गन्ने की खेती से मुंह मोड़ लिया। रसड़ा चीनी मिल से जुड़े गन्ना किसान राधेश्यात सिंह ने बताया ''सरकार ने अगर रसड़ा चीनी मिले को दोबारा चालू करने का फैसला किया है तो यह यहां के किसानों के लिए बहुत राहत की खबर है। इससे इस जिले में गन्ने की खेती बढ़ेगी वहीं नगदी फसल होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति भी बदलेगी। ''

सहकारी चीनी मिल मझोला पिछले नौ साल से बंद है। 1965 में स्थापित यह चीनी मिल कभी रूहेलखंड के गन्ना किसानों का बड़ा सहारा थी। इस चीनी मिले के बंद होने से एक यहां के 500 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी बेरोजगार हो गए। इस चीनी मिले के बंद होने से इस क्षेत्र में गन्ना किसानों पर भी बहुत ज्यादा असर पड़ा और उन्होंने गन्ना की खेती करना छोड़ दिया।

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