सुंजवान आर्मी कैंप : 35 घन्टे बाद भी ऑपरेशन जारी, फायरिंग में 5 जवान शहीद,  5 आतंकी ढेर   

सुंजवान आर्मी कैंप : 35 घन्टे बाद भी ऑपरेशन जारी, फायरिंग में 5 जवान शहीद,  5 आतंकी ढेर   कैंप के फैमिली क्वार्टर में एक या दो आतंकियों के छिपे होने की आशंका है

जम्मू स्थित सुंजवान आर्मी कैंप में घुसे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के खिलाफ अभियान रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। इस हमले में अब तक पांच जवान शहीद हो गए हैं और एक जवान के पिता की फायरिंग में मौत हो गई। गोलीबारी में 11 लोग घायल हुए हैं। सेना का सर्च ऑप्रेशन अभी भी जारी है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक फैमिली क्वार्टर में एक या दो आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। मारे गए आतंकियो से भारी मात्र में गोला बारूद भी बरामद हुआ है।

जम्मू में सेना के पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा, हमारा पूरा ध्यान आवासीय परिसर से लोगों को बाहर निकालने पर है। कई परिवार अब भी कैंप में हैं और सेना का मकसद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है, शिविर के सामने जम्मू-लखनपुर बाइपास पर वाहनों की आवाजाही जारी है जबकि बुलेट प्रूफ वाहनों में सवार सैन्य कर्मी आर्मी कैंप के पीछे की ओर आवासीय परिसर से लोगों को निकालने के अभियान में जुटे हैं।

सैन्य कर्मी आर्मी कैंप के पीछे की ओर आवासीय परिसर से लोगों को निकाल रहे हैं

सीआरपीएफ और पुलिस के दल शिविर की दीवार के बाहर तैनात हैं। जम्मू में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और शहर में तथा आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आतंकवादियों के खिलाफ सेना के इस अभियान की निगरानी थल सेना प्रमुख बिपिन रावत कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने रविवार को दिल्ली में गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर राज्य के सुरक्षा हालात पर चर्चा की। ऑपरेशन की प्रगति पर राजनाथ सिंह ने कहा, मुझे लगता है कि ऑपरेशन जारी रहने के दौरान टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। मुझे भरोसा है कि हमारे जवान अभियान को सफलतापूर्वक खत्म करेंगे। इस बीच, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सेना हस्पताल में पहुंच कर घायल सेना के जवानों का हालचाल जाना।

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गौरतलब है कि भारी हथियारों से लैस जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर लाइट इनफैंट्री की 36 ब्रिगेड के शिविर पर शनिवार तड़के हमला कर दिया था। खुफिया एजेंसियों ने अफजल गुरू की बरसी के मद्देनजर जैश-ए-मोहम्मद द्वारा सेना या सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले की चेतावनी दी थी। अफजल गुरू को 9 फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी।

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