गोरक्षकों और मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को दी चेतावनी

गोरक्षकों और मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को दी चेतावनी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश गोरक्षकों और भीड़ द्वारा की गई हिंसा पर सख्त रुप अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को जारी चेतावनी में कहा है उसके निर्देशों का हर हाल में पालन हो।

सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार ने देश के सभी राज्यों को गो रक्षा और भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या करने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए उसके निर्देशों का पालन करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 17 जुलाई के फैसले पर केवल 11 राज्यों ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है। बाकी राज्य एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि अगर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो राज्य के गृह सचिव को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होना होगा।

'भीड़तंत्र की भीषण करतूतें सहन नहीं होंगी'

देश में एक के बाद एक आ रही भीड़ द्वारा हिंसा की ख़बरों पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को फैसला सुनाया था। देश में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मुख्य न्यायाधीश दीप मिश्रा, जस्टिस ए.एम. खानविलकर और जस्टिस डी.वाई. चन्द्रचूड़ ने राज्यों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट इन हिंसाओं में शामिल आरोपियों को सजा दिलाने के लिए संसद को अलग कानून बनाने का भी सुझाव दिया था। कोर्ट ने कहा था, "कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता है या अपने आप कानून नहीं बन सकता है।' भीड़तंत्र की भीषण करतूतों को सहन न करने की बात करते हुए कोर्ट राज्यों को दंडात्मक कदम उठाने और उनके अनुपालन की रिपोर्ट मांगी थी।

यूपी सरकार ने बताया अपना मास्टर प्लान

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने कहा कि मॉब लिंचिंग रोकने के लिए हर जिले में पुलिस अधिक्षक (एसपी) को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो टास्क फोर्स का गठन करेंगे। ये लोग हिंसा और अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखेंगे। यूपी सरकार की तरफ से ये भी कहा गया कि नेशनल हाईवे पर पेट्रोलिंग की जा रही है। लिंचिंग में शामिल लोगों पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होगी। वहीं राजस्थान सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया की दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। अलवर मामले दे आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई और जुर्माना लगाया गया है।

फेक न्यूज के खिलाफ गांव कनेक्शन का अभियान

मॉब लिंचिंग की कई घटनाओं के पीछे फर्जी ख़बरों की भूमिका रही है। झूठे वीडियो और पोस्ट के जरिए हिंसा भड़काई गई। ऐसी फर्जी ख़बरों को रोकने और सोशल मीडिया पर लोगों को जागरुक करने के लिए गांव कनेक्शन ने फेसबुक के साथ मिलकर मोबाइल चौपाल शुरु की थी। गांव कनेक्शन का मोबाइल रथ गांव-गांव कस्बों और छोटे शहरों में घूम-घूम कर छात्र-छात्राओं और इंटरनेट उपभोक्ताओं को जागरुक कर रहा है। कई वाक्ये हो चुके हैं जब फेसबुक और व्हाट्सअप जैसे सोशल साइट्स पर भड़काऊ पोस्ट, या झूठी पोस्ट के चलते हंगामा हुआ, हत्याएं हुईं। फेक न्यूज भारत समेत पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है।

हाल में हुए लिंचिंग के मामले

21 अगस्त- बिहार के भोजपुर में एक युवक की हत्या के बाद भीड़ ने एक महिला को सरेबाजार निर्वस्त्र कर घुमाया गया

14 जुलाई कर्नाटक के बीदर जिले में 'बच्चा चोरी' के शक में 32 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर और हैदराबाद के मलकपेट निवासी मोहम्मद आजम अहमद की पीट-पीट कर हत्या कर दी।

1 जुलाई को चेन्नई में बिहारी मजदूर बी गोपाल साहू और के विनोद बिहारी को लोगों ने बच्चेक का अपहरण करने के शक में बुरी तरह पीट दिया।

1 जुलाई को ही महाराष्ट्र के धुले में 5 लोगों को बच्चा चुराने के शक में पीट-पीट कर मार दिया गया।

29 जून को त्रिपुरा में यूपी के रहने वाले सब्जी बेच रहे शख्स को बच्चा चुराने के शक में भीड़ ने लिंच कर दिया।

27 जून को मध्य प्रदेश में भीड़ ने इसी शक में एक शख्स को पीट-पीट कर मार दिया। गोवा में रहने वाले नीलोत्पल दास (29) और उनके मित्र अभिजीत नाथ (30) आठ जून की रात असम के कार्बी आंगलांग में बच्चा चुराने के शक में पीट-पीट कर मार दिया गया।

झारखंड के सिंहभूम जिले में हुईं अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 9 लोगों ने ऐसी घटनाओं में अपनी जान गंवा दी थी।

पिछले दो महीनों में भारत में 15 लोगों को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला। असम, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, बंगाल, तेलंगाना में ऐसी दो-दो घटनाएं और गुजरात और कर्नाटक में एक-एक घटना सामने आई है।

2018 में अब तक 21 लोगों को बच्चा चुराने के शक में लिंच कर दिया गया। अकेले ओडिशा में पिछले 30 दिन में हमले की ऐसी 15 घटनाएं हुई हैं, जिनमें कुल 28 लोगों के साथ मारपीट की गई।

महाराष्ट्र में 17 जुलाई तक 14 लिंचिंग की घटनाओं में 9 मौतें हुई हैं और 60 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

गौमांस और बच्चा चुराने के शक में साल 2015 से अब तक लिंचिंग के जरिए 100 से ज्यादा मौतें दर्ज।

मॉब लिंचिंग : हिंसा रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया अलग कानून बनाने का निर्देश


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