सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई मुलायम-अखिलेश की बढ़ाई मुसीबत

सत्ता का दुरूपयोग कर गलत ढंग से संपत्ति जुटाने के 14 साल पुराने मामले में सीबीआई से मांगा स्टेटस अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई मुलायम-अखिलेश की बढ़ाई मुसीबत

लखनऊ। लोकसभा चुनावों से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से 14 साल पुराने एक मामले में स्टेटस अपडेट मांगा है, जिसमें मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और उनके परिवार पर सत्ता का दुरूपयोग कर गलत ढंग से संपत्ति जुटाने का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद समाजवादी पार्टी के लोकसभा चुनावों की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। इसे लेकर विपक्षी दल खासकर बीजेपी यूपी में समाजवादी पार्टी को घेरने की कोशिश करेगी। इससे उत्तर प्रदेश में हुए सपा-बसपा गठबंधन की लोकप्रियता पर भी असर पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला?

मामला 2005 का है जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। तब राजनीतिक कार्यकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, डिम्पल यादव और प्रतीक यादव पर सत्ता का दुरूपयोग कर आय कमाने का आरोप लगाया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने 2007 में इस मामले में पहला स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में जमा भी किया था। लेकिन उसके बाद से इस मामले में कोई स्टेटस रिपोर्ट नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से अब जाकर इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर करते हुए मांग की थी कि कोर्ट अब सीबीआई से इस मामले पर रिपोर्ट तलब करे 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी जांच के बारे में किसी को कुछ पता क्यों नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 2007 में सीबीआई ने अपने स्टेटस रिपोर्ट में कहा था कि इस मामले में प्रथमदृष्टया मुकदमा बनता है इसलिए मुकदमा दर्ज हो कर जांच होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट जानना चाहता है कि इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ या नहीं, अगर मुकदमा दर्ज हुआ है तो क्या प्रगति हुई?

मुलायम सिंह के वकील ने अदालत में दलील दी कि ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसी याचिकाओं से उनके मुवक्किल की लोकप्रियता पर असर पड़ेगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट समय नहीं देखता, उसे जानना है कि इस मामले में क्या हुआ। इसके बाद सीबीआई को निर्देश देते हुए कहा कि सीबीआई जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट या फिर मजिस्ट्रेट अदालत में इस मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश करे।

आप को बता दें कि इस मामले में मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और प्रतीक यादव ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने डिंपल यादव की पुनर्विचार याचिका को मंजूरी दे दी थी।

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