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अब आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्‍मीदवारों की पार्टी वेबसाइट पर होगी प्रोफाइल: सुप्रीम कोर्ट

Ashwani DwivediAshwani Dwivedi   13 Feb 2020 2:16 PM GMT

अब आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्‍मीदवारों की पार्टी वेबसाइट पर होगी प्रोफाइल: सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च अदालत ने भाजपा के प्रवक्ता और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हालाकिं इस संदर्भ में एक बार भी सर्वोच्च न्यायालय साल 2018 में गाइड लाइन जारी कर चुका है। देश के सभी राजनितिक पार्टियों की लिए राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए निर्देश जारी किये हैं और इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को सौपी गयी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राजनितिक पार्टियों को ये आदेश दिया है, "आपराधिक इतिहास वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के 48 घंटे के अन्दर उनका पूरा विवरण सम्बंधित पार्टी के वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। फैसला सुनाने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीति में अपराधीकरण बढ़ता जा रहा है। यदि राजनितिक दल अपराधिक इतिहास वाले व्यक्ति को टिकट देते हैं तो उन्हें इसे वेबसाइट, सोशल मिडिया प्रकाशन कराना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा की किसी साफ़ छवि वाले उम्मीदवार को पार्टी ने टिकट में प्राथमिकता क्यों नही दी।

जस्टिस रोहिंटन नरीमन और एस रविन्द्र भट वाली बेंच ने राजनितिक पार्टियों को ये भी निर्देश दिया है कि आपराधिक इतिहास वाले उम्मीदवारों का विवरण वेबसाइट, सोशल मीडिया पर डालने के साथ ही एक स्थानीय व एक राष्ट्रीय अखबार में इसका प्रकाशन कराएं।

कोर्ट ने आगे कहा कि आपराधिक इतिहास वाले उम्मीदवार के चयन के 72 घंटे के अंदर राजनितिक पार्टी को उम्मीदवार के लंबित मुकदमे का विवरण चुनाव आयोग को भेजना होगा।

भाजपा के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय को आम तौर पर "पीआईएल मैंन" भी कहा जाता है। अश्विनी उपाध्याय ने इसके पहले भी जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर जनहित याचिकाएं दायर की हैं।

आज उपाध्याय की याचिका जिसमे कहा गया था कि साल 2018 का सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजनीति में अपराधीकरण रोकने सम्बन्धी निर्देशों के राजनितिक दलों के के द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी सहमती व्यक्त की और सभी राजनितिक दलों और और चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

देश में नया नहीं है राजनीति और अपराध का गठजोड़ ...

नैतिक पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के गवर्नर के पूर्व सलाहकार व सेवानिवृत्त न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय बताते हैं कि उत्तर प्रदेश हो या देश की राजनिति हो अपराधियों की पहली पसंद राजनीति रही है, यही नही देश में आपराधिक छवि वाले नेताओं का एक लम्बा दौर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला स्वागत योग्य है कि राजनितिक दलों द्वारा आपराधिक छवि वाले नेताओं की जानकारी चुनाव आयोग को न देने पर इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। इससे राजनीती में साफ छवि वाले लोगों को हिस्सेदारी बढ़ेगी और उन्हें राजनीति में आने का अवसर मिलेगा।

चुनाव आयोग से अपराधी नेताओं की जानकारी छिपाना होगी कोर्ट की अवमानना ...

दिल्ली में पत्रकारों को जवाब देते हुए याची अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि ये ऐतिहासिक फैसला है, सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है उसमे कहा गया है कि जो राजनितिक दल अपने उम्मीदवारों का आपराधिक विवरण चुनाव आयोग को नहीं देगा तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। उपाध्याय ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में बताया की राजनितिक दलों को अपने सारे उम्मीदवारों की जानकारी चुनाव आयोग को देना होगा जिन उम्मीदवारों के ऊपर कोई आपराधिक मामले नही है उसमे एक लाइन की जवाब राजनितिक दलों को दाखिल करना होगा की इस उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और इसके विपरीत अगर किसी उम्मीदवार पर आपराधिक मामला दर्ज है तो उसका पूरा ब्यौरा राजनितिक दलों को चुनाव आयोग को देना होना।

चुनाव सम्बन्धी मामलों पर विश्लेषण करने वाली संस्था " एसोसिएशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक अलायंश ( एडीआर ) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में लोकसभा में चुनकर आये 542 सांसदों में से 233 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है, जिनमें 159 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है और लंबित है। रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा चुनाव 2009 के बाद लोकसभा में दागी सांसदों की संख्या में 44 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है ।

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