सुप्रीम कोर्ट ने दी ममता सरकार को राहत, नहीं होंगे दोबारा पंचायत चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने दी ममता सरकार को राहत, नहीं होंगे दोबारा पंचायत चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने सीपीएम और बीजेपी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें राज्य की उन 20 हजार से ज्यादा सीटों पर चुनाव रद्द करने की मांग की गई थी जिन पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का प्रत्याशी निर्विरोध चुना गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बड़ी राहत देने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य चुनाव आयोग इन सीटों के नतीजे घोषित कर सकता है।


इन सीटों के बारे में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि टीएमसी ने उनके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र भरने से रोका गया था। इन आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि असंतुष्ट उम्मीदवार संबंधित अदालतों में पंचायत चुनावों को चुनौती देने वाली चुनाव याचिकाएं दायर कर सकते हैं। इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस ने स्वागत किया है।

शुक्रवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस ए एम खानवल्किर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए चुनाव याचिकाएं दायर करने के लिए पंचायत चुनाव नतीजों की अधिसूचना की तारीख से 30 दिन तक समय दिया है। पश्चिम बंगाल में यह चुनाव मई में हुए थे। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है, "हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हैं। हम अगले लोकसभा चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लड़ेंगे। राज्य के लोगों का फैसला अंतिम होगा।"

इस फैसले के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के ईमेल से नामांकन दाखिल करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट के मुताबिक, कानून के अनुसार ईमेल या व्हाट्सऐप्प से नामांकन नहीं हो सकता।

पश्चिम बंगाल में मई में ग्राम पंचायतों में 48,650 पदों, जिला परिषदों में 825 पद और पंचायत समितियों में 9, 217 पदों के लिए चुनावों में चुनाव हुए थे। ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए कुल 58,692 सीटों में से 20,158 पर टीएमसी के उम्मीदवार निर्विरोध जीते थे। इन्हीं सीटों के बारे में सीपीएम और बीजेपी की ओर से कहा गया था कि हमारे उम्मीदवारों को पीटा गया और नामांकन दाखिल करने से रोका गया।

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