NGT के बाद सुरेश प्रभु ने भी पराली पर जताई चिंता, कृषि क्षेत्र की कंपनियों को दी सलाह

Ranvijay SinghRanvijay Singh   16 Nov 2018 11:01 AM GMT

  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • koo
NGT के बाद सुरेश प्रभु ने भी पराली पर जताई चिंता, कृषि क्षेत्र की कंपनियों को दी सलाह

नई दिल्‍ली। वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु का कहना है कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाली स्टार्टअप कंपनियों के पास बड़े होने के व्यापक अवसर मौजूद हैं। उन्‍होंने पराली प्रबंधन के लिए कृषि क्षेत्र में नए विकास करने पर जोर दिया। सुरेश प्रभु के मुताबिक, ''जलवायु परिवर्तन ने कृषि क्षेत्र के लिए कई चुनौतियां खड़ी की हैं और स्टार्टअप कंपनियां इस ओर ध्यान देकर समाधान पेश कर सकती हैं।'' गौरतलब है कि गुरुवार को ही एनजीटी ने पराली जलाने वाले पंजाब के किसानों को लेकर सख्‍त आदेश दिया है।

सुरेश प्रभु ने कहा, ''हम कृषि क्षेत्र में नए विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। स्टार्टअप के नए विकास और नए विचार इस क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं।'' प्रभु ने जानकारी दी कि उनका मंत्रालय इस बारे में सात दिसंबर को वैश्विक कोषों और स्टार्टअप कंपनियों के साथ एक बैठक करने जा रहा है। उन्होंने कहा, ''स्टार्टअप कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए हम एक समग्र रणनीति पर काम कर रहे हैं।''



बता दें, पंजाब हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश में फसल अवशेषों का प्रबंधन बड़ी समस्‍या है। इसके तहत एनजीटी ने भी दिल्ली एनसीआर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर गुरुवार (16 नवंबर) को सख्‍त फैसला लिया। एनजीटी ने कहा कि पराली जलाने वाले पंजाब के किसानों को खेती के लिए मिलने वाली फ्री बिजली नहीं मिलेगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एनजीटी ने यूपी, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों को पराली जालने वाले किसानों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने का आदेश दिया। ऐसे में सुरेश प्रभु का कृषि क्षेत्र में काम करने वाली स्टार्टअप कंपनियों को पराली प्रबंधन के लिए काम करने की सलाह देना इस समस्‍या के प्रति सरकार की चिंता को भी जाहिर करता है।

इससे पहले पर्यावरण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्‍त रुख को देखते हुए केंद्र सरकार ने 'प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्‍चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्‍ड्यू योजना' को लागू किया था। इसके तहत फसल अवशेष को नष्ट करने वाले कृषि यंत्रों पर किसानों को सब्सिडी दी गई।

केंद्र सरकार ने इसके लिए राज्‍यों को बजट जारी किया था। सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए कुल 591 करोड़ का बजट आवंटित किया था। इसमें से पंजाब को 269 करोड़, हरियाणा को 137 करोड़ और उत्‍तर प्रदेश को 185 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। इस बजट को 7 नवंबर तक खर्च करना था। ऐसे में पराली प्रबंधन के लिए कृषि उपकरण खरीदने वाले किसानों को यूपी सरकार ने छूट भी दी थी, ताकि बजट का अधिक से अधिक इस्‍तेमाल हो सके।


इसे लेकर यूपी सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि कुंभ के समापन अवसर पर इस अनुदान की घोषणा की थी। उन्‍होंने कहा था, ''प्रदेश के किसानों की आमदनी तेजी से बढ़े, किसानों को तकनीक का साथ मिले यही सरकार की मंशा है। किसानों ने जो कृषि उपकरण यहां देखे हैं, अगर वो 6 नवंबर तक उन्हें खरीदेते हैं तो उसपर बिना इंतजार के सब्सिडी मिलेगी। ये छूट 8 उपकरणों पर है, जिनमें एक उपकरण खरीदने पर 40 फीसदी, तो वहीं पराली प्रबंधन से जुड़े तीन उपकरण लेने पर 80 फीसदी तक छूट दी जाएगी।"

बता दें, पंजाब और हरियाणा देश में धान का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले प्रदेश हैं, इस हिसाब से यहां पराली भी सबसे ज्यादा होती है। अकेले पंजाब में हर साल लगभग 2 करोड़ टन पराली खेतों में रह जाती है। इनमें से लगभग 1.5 करोड़ टन पराली में आग लगाई जाती है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने पराली से निबटने के लिए 665 करोड़ रुपए का बजट भी निर्धारित किया लेकिन हालात में खास बदलाव नहीं दिखाई देता।

  

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.