‘काश, घर में शौचालय होता तो आज बिटिया जिन्दा होती’

‘काश, घर में शौचालय होता तो आज बिटिया जिन्दा होती’खुले में शौच के दौरान हो रही ज्यादातर घटनाएं।

उसकी उम्र यही कोई 14-15 साल की थी। सुबह घर से शौच के लिए निकली थी, उसे क्या पता होगा आज वो वापस घर जिन्दा नहीं पहुंच पाएगी। काफी देर तक उसके वापस न आने पर घर वाले उसे ढूढ़ने निकले तो उसकी लाश गांव के बाहर बगिया के पीछे गन्ने के खेत में मिली। उत्तर प्रदेश में ही नहीं, पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, युवतियों व किशोरियों के साथ होने वाले रेप, गैंगरेप और हत्या जैसी ज्यादातर घटनाएं खुले में शौच जाने के दौरान हो रही हैं।

"उस दिन जो मेरी बेटी के साथ हुआ उसकी सपने में भी उम्मीद नहीं थी, घर में अगर शौचालय होता तो शायद मेरे बेटी की ये दुर्दशा नहीं होती।” उत्तर प्रदेश राज्य के सीतापुर जिले की ग्राम पंचायत बेलवा बहादुरपुर गांव की सुजाता (काल्पनिक नाम ) फफक कर रो पड़ती है।

... तो बहुत छटपटाहट होती है

सुजाता ने बताया " जब मैं उस जगह गई तो मुझमें इतनी ताकत नहीं थी कि मैं खड़ी रह सकूं। मैं गश खाकर गिर गई, मेरी फूल जैसी बच्ची, उसने किसी का क्या बिगाड़ा था, उसके दोनों हाथ उसी की सलवार से पीछे बंधे हए, मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ, उसका एक हाथ जो पहले से कमजोर था, उसे भी तोड़ दिया, चेहरा भी खराब कर दिया।”

आगे बताती हैं, “घटना का एक साल पूरा होने को है, लेकिन मैं उसे एक भी पल के लिए भूल नहीं पाई हूं, हर समय उसका चेहरा आंखों के सामने नाचता है, उसकी कदकाठी की उसकी ही उम्र की कोई बिटिया देखती हूं तो मन में अजीब सी छटपटाहट होती है, पति भी मुझे समझाते हैं पर खुद दिन पर दिन कुढ़ते जा रहे हैं।”

डॉक्टर बनने का सपना था

सुजाता अागे बताती हैं, "मेरी बिटिया को किसी से ज्यादा घुलना-मिलना पसंद नहीं था, नशेड़ियों से उसे नफ़रत थी, कोई दरवाजे पर नशा करके आ जाता तो उसे दिक्कत होती और वो नाराज हो जाती थी, हो सकता है कभी वो नशेड़ी दरवाजे पर आए हों और बिटिया ने कुछ कह दिया हो, जिसका उन लोगों ने मेरी बिटिया से बदला लिया हो।”

आगे बताती हैं, “हमारी बिटिया पढ़ने में बहुत अच्छी थी, उसका सपना डॉक्टर बनने का था, गांव के ही दो नशेड़ियों ने उसके साथ गलत काम करके उसे बेरहमी से मार डाला, बिटिया हमेशा कहती थी घर में शौचालय बनवा लो बाहर जाने में शर्म आती है, काश उसकी बात मान ली होती तो बिटिया आज जिन्दा होती।”

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दूसरी ओर, पिछले साल इटावा के जसवंत नगर में शौच के लिए गई एक मजदूर की नाबालिग को एक दरिंदे ने अपनी हवस का शिकार बना लिया। ऐसी अनगिनत घटनाए हैं, जो हमें सोचने पर विवश कर देती हैं। देश के ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे अपराधों के आंकड़े पर गौर करें तो ऐसे मामलों में ज्यादातर घटनाएं खुले में शौच जाने के दौरान घटित हो रही हैं।

ऐसी घटनाएं दु:ख पहुंचाती हैं

इस बारे में स्वच्छ भारत मिशन, उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक योगेन्द्र कटियार बताते हैं, “खुले में शौच जाने के सामाजिक और शारीरिक नुकसान तो हैं ही, लेकिन इस तरह की घटनाएं तकलीफ पहुंचाती हैं। ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं और उसका असर भी अब दिखने लगा है।”

योगेन्द्र आगे बताते हैं, "स्वच्छ भारत मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 2014 से अब तक 63,33,548 शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है, इसमें से 47,28,708 शौचालयों के फोटो अानलाइन अपलोड कराए जा चुके हैं। वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 78,86,237 शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य था, जिसमें से 54,77,836 शौचालयों का निर्माण इस वित्तीय वर्ष में पूरा किया गया है।"

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