देश के छोटे से राज्य ने बनाया अनोखा बिजनेस प्लान, किराए पर जेल देकर करेगा कमाई

देश के छोटे से राज्य ने बनाया अनोखा बिजनेस प्लान, किराए पर जेल देकर करेगा कमाईप्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ। कमरा या घर किराए पर लेकर रहना तो पूरी दुनिया में आम बात है लेकिन भारत के सबसे छोटे और सबसे नए राज्य तेलंगाना (2014 में आंध्र प्रदेश से टूट कर बना) में एक नई योजना शुरू होने वाली है।

इस अनोखी योजना से तेलंगाना अच्छा राजस्व कमा सकता है। भारत में तेलंगाना ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां दूसरे राज्यों के कैदियों को किराए पर रखा जाएगा। यह योजना तेलंगाना में अगले साल से लागू की जाएगी और इसके लिए हर कैदी के हिसाब से प्रति माह 10,000 रुपये किराया लिया जाएगा।

तेलंगाना के जेल महानिदेशक ने बताया, ' नॉर्वे एक ऐसा देश हैं जहां पिछले कुछ समय से अपराध में काफी कमय आई है। नॉर्वे ने अब अपने पड़ोसी देशों को जेल किराए पर देना शुरू किया है। ख़बर के मुताबिक, तेलंगाना में यह ऑफर सबके लिए नहीं है। जेल शेयर स्कीम के तहत सिर्फ उन कैदियों को रखा जाएगा जिन पर ज़्यादा गंभीर आरोप न हों। उन अपराधियों को किराए पर जेल में नहीं रखा जाएगा जिन पर गंभीर आपराधिक मुक़दमे दर्ज़ हैं।

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तेलंगाना की 50 जेलों में 6,848 कैदियों को रखने की क्षमता है जबकि अभी यहां 6,037 क़ैदी हैं। यानि यहां लगभग 800 कैदियों को रखने की जगह है। जेल महानिदेशक वीके सिंह ने कहा कि कम से कम 2,000 किरायेदार कैदियों के लिए जगह बनाने के बाद अगले साल यह योजना शुरू हो सकती है।

धीमी न्यायायिक प्रक्रिया के कारण हमारे देश में कई सालों तक मुक़दमे लंबित रहते हैं जिससे जेल में कैदियों की संख्या बढ़ती जाती है। देश में ऐसे कई बड़े राज्य हैं जहां की जेलों में क्षमता से ज़्यादा कैदी हैं।

25 करोड़ रुपये का होगा लाभ

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों के क़ैदियों को तेलंगाना की जेलों में भेजा जा सकता है। वीके सिंह का कहना है कि हम क़ैदियों के रहने, खाने, सुरक्षा, लोगों से मिलने और उनकी ट्रेनिंग पर होने वाले ख़र्च के लिए हर महीने 10,000 रुपये प्रति कैदी लेंगे। वह कहते हैं कि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर सरकार ने इस योजना को मंजूरी दे दी तो राज्य को हर साल इससे लगभग 25 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।

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इस रकम का प्रयोग हम जेलों को निर्भर बनाने में कर सकते हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की जेलों में कैदी पर औसत दैनिक खर्च 120 रुपये है यानि एक साल में एक कैदी पर 48,300 रुपये का खर्च आता है। सिर्फ खाने पर ही यहां हर कैदी पर 80 रुपये हर दिन खर्च होते हैं और हर रविवार व छुट्टी वाले दिन खाने पर 100 रुपये प्रति कैदी खर्च होते हैं क्योंकि इन दिनों में यहां मांसाहारी खाना भी मिलता है।

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जेल महानिदेशक का कहना है कि महा परिवर्तनवादी, विद्या दानम और उन्नीति जैसे कई गैर सरकारी संगठनों ने पिछले तीन सालों में ऐसे कई सुधार कार्यक्रम चलाए हैं जिससे राज्य में अपराधों की संख्या कम हुई है।

उत्तर प्रदेश की जेलों में हैं क्षमता से 50 प्रतिशत ज़्यादा क़ैदी

30 अप्रैल को ज़ारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नैनी (इलाहाबाद), वाराणसी, फतेहाबाद, बरेली तथा आगरा में पांच केंद्रीय कारागार हैं, इनमें मात्र नैनी में 60 महिला और 120 अल्प-व्यस्क कैदियों के रखे जाने की व्यवस्था है और शेष कारागारों में मात्र पुरुष कैदी रखे जाते हैं। सबसे अधिक क्षमता नैनी की 2060 कैदियों की है, जिसके बाद बरेली में 2053 कैदियों की व्यवस्था है, जबकि वाराणसी के केंद्रीय कारागार में सबसे कम 996 कैदियों की क्षमता है। इन पांच केंद्रीय कारागारों में कुल क्षमता 7438 पुरुष, 60 महिला और 120 अल्प-व्यस्क कैदियों की है।

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इसके विपरीत 30 अप्रैल को इन पांच केंद्रीय कारागारों में 9353 सजायाफ्ता कैदी थे, जिसमें 9290 पुरुष, 29 महिला, सात अल्पव्यस्क और 27 विदेशी थे। इसके साथ कुल 2117 विचाराधीन कैदी भी थे, जिसमें 1921 पुरुष, 67 महिला, 119 अल्पव्यस्क तथा 10 अन्य कैदी थे। साथ ही महिला कैदियों के साथ दो पुरुष और एक महिला शिशु भी थे। इस प्रकार उस तिथि को इन केंद्रीय कारागारों में कुल 11,470 कैदी थे, जिसमें 11,211 पुरुष, 96 महिला, 126 अल्पव्यस्क, 27 विदेशी तथा 13 अन्य थे, जो इन कारागारों की क्षमता से 50 प्रतिशत अधिक है।

महाराष्ट्र की जेलों में 29,000 कैदी

महाराष्ट्र की जेलों में फिलहाल करीब 29 हजार कैदी हैं, जिनमें से करीब 5 हजार सजायाफ्ता हैं। 24 हजार विचाराधीन कैदियों में 5 हजार से ज्यादा ऐसे कैदी हैं जिन पर गंभीर अपराध के आरोप नहीं हैं और उन्हें तुरंत छोड़ा जा सकता है। यहां की सरकार ने हाल ही में ये फैसला भी किया है कि इन पांच हज़ार क़ैदियों को रिहा कर दिया जाएगा।

पूरे देश का हाल बुरा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के 2014 के आंकड़ों के मुताबिक, अगर बात की जाए तो भारत में कैदियों की संख्या 4, 11, 992 है जिनमे विचाराधीन कैदियों की संख्या 2, 78, 508 है। इसका मतलब यह हुआ कि जेलों में बंद 67.6 फ़ीसदी लोगों के मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। विचाराधीन कैदी का मतलब होता है ऐसा कैदी जिसे अदालत ने दोषी क़रार नहीं दिया हो और उसके खिलाफ चल रहा मामला अदालत में लंबित हो। इन कैदियों में से 3,113 ऐसे हैं जिन्हें स्थानीय सुरक्षा क़ानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया है। मगर सबसे गंभीर पहलू यह है कि 4, 11, 992 कैदियों की यह आबादी सिर्फ 1391 जेलों में ही रह रही है जिनकी क्षमता सिर्फ 3,47,859 कैदियों को रखने की है।

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