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किसान आंदोलन: 11वें दौर की बैठक भी बेनतीजा, सरकार ने अगले दौर की बैठक के लिए रखी शर्त

किसान संगठनों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच शुक्रवार को हुई वार्ता में किसान आंदोलन को लेकर कोई हल नहीं निकला है। बैठक की अगली तारीख भी तय नहीं है। पढ़िए आज की बैठक में क्या क्या हुआ

Arvind ShuklaArvind Shukla   22 Jan 2021 11:53 AM GMT

तीन कृषि कानूनों और किसान आंदोलन को लेकर केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसान संगठनों के साथ 11वें दौर की वार्ता तल्ख माहौल में हुई। वार्ता में न तो कोई नतीजा निकला है और ना ही अगली बैठक के लिए कोई तारीख तय हुई है।

शुक्रवार की बैठक को लेकर मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, "किसान आंदोलन के मुद्दों के समाधान हेतु, भारत सरकार ने 11 दौर में लगभग 45 घंटे किसान यूनियनों के साथ विमर्श किया। दोनों पक्षों में सहमति के अभाव के कारण वार्ता आज स्थगित हो गई, इसका मुझे दुःख है। आशा है किसान संगठन बड़े मन से प्रस्ताव पर पुनर्विचार करेंगे।"

बैठक के बाद बाहर निकले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, "सरकार ने कहा कि हम कृषि कानूनों Farm Laws को 2 साल तक होल्ड रखने को तैयार है। अगर किसान संगठन इस प्रस्ताव पर तैयार होते हैं तभी अगले दौर की वार्ता होगी।" राकेश टिकैत के मुताबिक 26 जनवरी की परेड अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी। भारतीय किसान महासंघ से जुड़े किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा- "सरकार ने जो प्रस्ताव दिया है वो किसानों को मंजूर नहीं, अगली बैठक की तारीख भी तय नहीं। हम चाहते हैं कि सरकार 80 करोड़ किसान परिवारों की सुने। जब किसान चाहते हैं कानून वापस हों तो वापस हों, उन्हें एमएसपी पर दिया जाए तो उसकी मांग पूरी होनी चाहिए।"

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अगली बैठक के लिए कोई तारीख तय नहीं गई है। सरकार ने किसान संगठनों (यूनियन) से कहा कि उन्होंने अपनी तरफ से सभी संभावित विकल्प किसानों को दिए हैं। अब किसान संगठनों को अपने स्तर पर कृषि कानूनों के डेढ़ साल तक निलंबित रखने पर चर्चा करनी चाहिए।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के किसान संगठनों ने कहा- सरकार एक और बैठक के लिए तैयार है अगर किसान संगठन कृषि कानूनों के डेढ़ साल निलंबित रखने के प्रस्ताव पर चर्चा को तैयार हों।

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शिवकुमार कक्का ने शाम करीब पौने पांच बजे मीडिया को बताया कि सरकार और किसानों की वार्ता लंच के बाद शुरु नहीं हो पाई है। दोनों पक्षों की बैठक करीब 12-30 मिनट चली जिसके बाद तीनों केंद्रीय मंत्री चर्चा के लिए बाहर गए हैं अब तक वापस नहीं आए हैं।

शुक्रवार को दोपहर करीब 12.40 बजे के आसपास किसान और तीन केंद्रीय मंत्रियों कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग में राज्य मंत्री सोम प्रकाश के साथ किसान संगठनों की वार्ता शुरु हुई। वार्ता की शुरुआत में किसान नेताओं ने सरकार को बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा की बोर्ड बैठक में किसान संगठनों ने सरकार के डेढ़ साल तक कानूनों को स्थगित करने और साझा कमेटी बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

विज्ञान भवन के बाहर गांव कनेक्शऩ से बात करते हुए किसान नेता शिवकुमार कक्का ने बैठक में जाते हुए कहा था, किसान संगठनों में सरकार के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन पाई इसलिए प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। हमारे यहां सारे काम सर्वसम्मति से होते हैं। हमारी अब दो ही मांगे हैं कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी पर गारंटी वाला कानून बनाया जाए।"

किसानों की हत्या की बात करने वाला युवक पुलिस के सामने बयान से पलटा

इसी बीच सिंघु बॉर्डर किसानों ने एक शख्स को पकड़ा, किसानों के मुताबिक ये 4 किसान नेताओं को मारने और 26 की परेड में हिंसा फैलाने आया था। आरोपी युवक हरियाणा का रहने वाला है। आरोपी ने सिंघु बॉर्डर पर किसान और मीडिया के सामने इस संबंध में बयान दिया था उसे एक हरियाणा के एक एसएचओ ने भेजा है।

बाद में वो शख्स ने पुलिस के सामने मीडिया को दूसरा बयान दिया और कहा कि वो बयान उसने किसानों के दबाव में दिया था। न्यूज चैनल आजतक के मुताबिक आरोपी ने कहा कि किसानों ने मुझे मारने के बाद खाना खिलाया, शराब पिलाई और जिसके बाद मेरा वीडियो भी बनाया। अब मैंने सही पुलिस के सामने सही बात सबको बताई है।

विज्ञान भवन से अमित पांडे के इऩपुट के साथ

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