गूगल की नौकरी छोड़ समोसे बेचने से की शुरुआत, अब कई रेस्त्रां के मालिक, फोर्ब्स मैगजीन ने कवर पेज पर दी जगह

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   28 Oct 2017 3:42 PM GMT

गूगल की नौकरी छोड़ समोसे बेचने से की शुरुआत, अब कई रेस्त्रां के मालिक, फोर्ब्स मैगजीन ने कवर पेज पर दी जगहमुनाफ कपाड़िया

लखनऊ। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद ज्यादातर लोगों का सपना होता है कि उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्‍पल में काम करने का मौका मिले। अगर मेहनत से मौका मिल जाए तो कोई इसे छोड़ने का सपने में भी नहीं सोच सकता है, लेकिन मुंबई के मुनाफ कपाड़िया (28 वर्ष) की कहानी कुछ अलग ही है। दरअसल ये एक ऐसे भारतीय इंजीनियर हैं जिन्होंने गूगल की नौकरी छोड़ कर सबसे पहले समोसे का बिजनेस शुरू किया। जो आज 'दि बोहरी किचेन' नामक कई बड़े शहरों में रेस्टोरेंट के मालिक हो चुके हैं।

ये कहानी फेमस फूड वेबसाइट 'दि बोहरी किचेन' के फाउंडर मुनाफ कपाड़िया (28 वर्ष) की है। उन्हें महज 25 वर्ष की उम्र में गूगल कंपनी में नौकरी मिली थी, लेकिन उन्होंने वह नौकरी छोड़कर बोहरी खाने का बिजनेस शुरू किया। एक रेस्टोरेंट से शुरू यह बिजनेस आज विदेशों में भी जाना जाता है।

गाँव कनेक्शन से बातचीत में मुनाफ बताते हैं कि जून 2011 में उन्होंने गूगल में सेल्स डिपार्टमेंट में ज्वाइन किया था, लेकिन इस नौकरी को छोड़ दिया। 2015 में शुरू हुए इस बिजनेस को 'दि बोहरी किचेन' के नाम से जाना जाता है। इसका शुरुआती टर्नओवर एक साल में 50 लाख था जो अब बढ़ कर तीन करोड़ हो गया है।

फोर्ब्स मैगजीन ने कवर पेज पर दी जगह

महज 28 साल की उम्र में मुनाफ ने मुकाम हासिल किया है। उनके इस अचीवमेंट के लिए इंडिया फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें अपनी '30 अंडर 30' सिरीज में पहले स्थान पर रखा है। मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक मुनफ ऐसे पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने होम शेफ के बिजनेस को इतना बड़ा किया है। मुनाफ अपनी कंपनी के सीईओ हैं। मुनाफ के रेस्टोरेंट में इतनी भीड़ होती है कि यहां खाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ता है। मुनाफ अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हैं। क्योंकि उनके बगैर यह संभव नहीं हो पाता।

विदेश में भी खोली ब्रांच

'दि बोहरी किचेन' के फाउंडर का नाम मुनाफ कपाड़िया है। 28 साल के मुनफ ने मुंबई में रहते हैं और वहीं से अपने बिजनेस की शुरुआत की। आज 'दि बोहरी किचेन' के नाम के रेस्टोरेंट मुंबई के अलावा दिल्ली और बेंगलुरु में भी हैं। इतना ही नहीं इसकी एक ब्रांच न्यूयॉर्क में भी है।

ऐसे आया आईडिया

मुनाफ ने एमबीए की पढ़ाई की थी और उसके बाद उन्होंने कुछ कंपनियों में नौकरी की और फिर चले गये विदेश। विदेश में ही कुछ कंपनियों में इंटरव्‍यू देने के बाद मुनाफ को गूगल में नौकरी मिल गई। कुछ सालों तक गूगल में नौकरी करने के बाद मुनाफ को लगा कि वह इससे बेहतर काम कर सकते हैं। मुनाफ कपाड़िया ने बताया कि उन्हें यह आईडिया घर में छुट्टी के दिन टीवी देखते हुए आया। बस फिर क्‍या था, दिमाग में बिजनेस का नया आईडिया लेकर वह घर लौटे और उन्‍होंने यहां अपना बिजनेस शुरू कर दिया।

मां को ऐसे दिलाया विश्वास

मुनाफ जिस इलाके में रहते है वहां मध्यमवर्गीय परिवार ज्यादा रहते हैं। लेकिन जिसतरह का आइडिया मुनाफ ने सोचा था उस हिसाब से उन्हें यहां ग्राहक मिलना मुश्किल था। इसलिए मुनाफ ने प्रयोग के तौर पर अपने 50 दोस्तों को ईमेल और मैसेज किया और उन्हें खाने पर बुलाया। अपनी मां के हाथों का बना खाना लोगों को खिलाया। सबने उनके खाने की तारीफ की। इससे मुनाफ को बल मिला और वह इस सपने को पूरा करने में लग गए।

नौकरी छोड़ने के लिए घरवालों को मनाना

मुनाफ ने बताया कि इस बिजनेस को शुरू करने के लिए उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी, गूगल की नौकरी छोड़ना। वह डर रहे थे कि जब घर में नौकरी छोड़ने की बात कहेंगे तो कोई मानेगा नहीं। लेकिन उन्होंने सबको यकीन दिलाया और बिजनेस शूरू किया।

'दी बोहरी किचेन' क्यों

बोहरी दाऊदी बोहरा सुमदाय का प्रचलित खाना है। इसका मुंबई से कोई ताल्लुक नहीं है। मुनाफ ने इसका फायदा उठाया और आज लोग बोहरी क्यूजिन खाना पसंद करते हैं।

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