पुराने नोट जमा करने के लिए मौका देने से केंद्र का इनकार 

पुराने नोट जमा करने के लिए मौका देने से केंद्र का इनकार सुप्रीम कोर्ट।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नोटबंदी मामले में दोबारा पुराने नोट बदलने के लिए मौका देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट जमा कराने का फिर से मौका नहीं दिया जा सकता। केंद्र का कहना है कि अगर ऐसा किया गया, तो कालेधन पर काबू पाने के लिए की गई नोटबंदी का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। केंद्र का तर्क है कि अगर ऐसा किया गया तो बेनामी लेनदेन और नोट जमा कराने में दूसरे व्यक्ति का इस्तेमाल करने के मामले बढ़ जाएंगे।

यही नहीं, सरकारी विभागों को ये पता लगाने में परेशानी होगी कि कौन से मामले वास्तविक हैं। सरकार ने 65 पेज का ताजा हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि 1978 में हुई नोटबंदी में नोट जमा कराने के लिए सिर्फ 6 दिन दिए गए थे। इस तरह देखा जाए तो इस बार सरकार ने 51 दिन दिए हैं, जो पर्याप्त है। सरकार ने इन छूट के दिनों में भी पेट्रोल पंप, रेलवे, एयरलाइंस बुकिंग व टोल प्लाजा के माध्यम से जमकर कालेधन के इस्तेमाल किए जाने की बात स्वीकार की है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं में इस बात का तर्कसंगत कारण नहीं बताया है कि 51 दिनों में स्वयं या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति उनके 500 व 1000 के पुराने नोट क्यों नहीं जमा करा पाए।

नोटबंदी 28 फरवरी से कानून गजट भी

आपको बता दें कि सरकार ने नोटबंदी के लिए सारी परिस्थितियों पर विचार करके 31 दिसंबर से पुराने नोट जमा कराने पर रोक लगाने का अध्यादेश लाई। अध्यादेश आरबीआई के सभी आदेशों और 8 नवंबर की अधिसूचना से ऊपर था। ये अध्यादेश बाद में कानून बन गया और 28 फरवरी से कानून गजट भी हो चुका है। अब कानून बनने के बाद याचिकाकर्ता किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता। सरकार ने अपने हलफनामें में छापों के दौरान बरामद नकदी व दर्ज किए गए मामलों का भी ब्योरा दिया है।

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