सपेरा समुदाय का अस्तित्व खतरे में, भीख मांगकर भर रहे पेट

सपेरा समुदाय का अस्तित्व खतरे में, भीख मांगकर भर रहे पेटसपेरा समुदाय के लोग।

अरविन्द्र सिंह परमार , स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

ललितपुर। "पूरी बस्ती झोपड़ियों में रहती है। बरसात में बैठे-बैठे रात गुजर जाती है। इतने पैसे नहीं है कि पक्की छत बना सकें।" चेहरे पर उदासी का भाव लाकर जब यह बात पचौड़ा गांव के पूर्व प्रधान सपेरा समुदाय के दया नाथ कहते हैं तो सूबे में गरीबों के उत्थान के लिए चल रहीं सरकारी योजनाओं के दावे खोखले नजर आते हैं और एक कड़वी सच्चाई सामने आती है।

पचौड़ा गाँव जिला मुख्यालय से 45 किमी. दूर महरौनी ब्लॉक में पड़ता है। इस गाँव में सपेरा समुदाय के करीब 200 परिवार रहते हैं, लेकिन किसी भी परिवार को सरकारी आवास का लाभ नहीं मिल पाया है। यही नहीं इस गाँव में रहने वाले सपेरा समुदाय की हकीकत को देखकर यही लगता है कि "विकास" इस गाँव से कोसो दूर है।

सामान्य श्रेणी में आता है समुदाय

बता दें कि यह समुदाय सामान्य जाति में आता है। जिसकी वजह से इस समुदाय के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। दया नाथ कहते हैं कि "आरक्षण कि वजह से एससी, एसटी को लाभ मिल जाता है, लेकिन हमारे समुदाय के लोग इस लाभ से वंचित हैं।"

भीख मांगकर जीवन जी रहे हैं लोग

गाँव के पूर्व प्रधान दया नाथ कहते हैं कि "100 साल पहले हमारे पूर्वज यहां आए थे। जिले के 12 गाँवों में पांच हजार नाथों (सपेरा) की आबादी रहती है। मौत के मुंह में जाकर हम सांपों को पकड़ते हैं, फिर बीन बजाकर, सांप दिखाकर और भीख मांगर परिवार चलाते हैं। इसी के सहारे हमारे परिवार का भरण पोषण होता है।"

खाना बनाती बड़ी बहू ।

आवास दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी

यही नहीं इस समुदाय के लोगों के साथ धोखधड़ी भी हुई है। आवास दिलाने के नाम पर वर्तमान प्रधान ने इस समुदाय के लोगों से रुपये ले लिए, लेकिन आवास उपलब्ध नहीं कराया। समुदाय के धीरजनाथ बताते हैं कि "हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, हमारी पक्की छत बनाने की हैसियत नहीं है। प्रधान ने आवास के नाम पर हमसे पैसे मांगे, मां के गहने गिरवी रखकर और 10 हजार रुपये ब्याज पर उठाकर प्रधान को पैसे दिये। आशा थी कि आवास मिल जायेगा, लेकिन नहीं मिला, अब उसका ब्याज बढ़ रहा है।" इसी प्रकार रूपलाल, रामलाल, भूरा नाथ, सुखनन्दन नाथ से प्रधान ने आवास दिलाने के नाम पर 10-10 हजार रुपये ले लिया, लेकिन अभी तक किसी को आवास नहीं मिल पाया है।

झोपड़ी में रहते लोग।

कैसे सफल होगा स्वच्छता अभियान?

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ स्वच्छ भारत अभियान में तेजी लाने की बात कह रहे हैं। वहीं इस गांव के सैकड़ों परिवारों के बीच एक भी शौचालय नहीं है। पूरा गांव शौच के लिए खेतों में जाने को मजबूर है।

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यहां मनरेगा भी नहीं दे पा रहा है रोजगार

इस समुदाय के लोगों को मनरेगा के तहत भी काम नहीं मिलता है। समुदाय की राधाबाई कहती हैं कि "मनरेगा में 100 दिन काम करने का नियम-कानून है, लेकिन काम नही मिलता, कभी कभार मिल जाता है, तो समय पर पैसे नहीं मिलते है, खर्च चलाना मुश्किल है।" वह बताती हैं कि समुदाय के 60 पुरुषों एवं महिलाओं ने 6 माह पहले बंदी निर्माण पर एक-एक सप्ताह काम किया, लेकिन आज तक किसी को पैसा नहीं मिला है।

बेटी पाढ़ओ, बेटी बढ़ाओ अभियान भी हुआ फेल

इस गांव में बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ अभियान भी फेल हो गया है। सपेरा समुदाय की कोई भी लड़की आज तक हाईस्कूल पास नहीं कर पाई है। इसी गांव की राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज महरौनी में कक्षा 10 में पढ़ने वाली छात्रा रागनी नाथ बताती है कि "समुदाय की कोई भी लड़की कक्षा 10 तक नहीं पहुंची, समुदाय के 6 लड़के ही हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में पढ़ रहे हैं। बाकी नहीं पढ़ पाए, परिवार की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण कोई भी नहीं पढ़ पाता है।" वह कहती है कि "समुदाय के लोग कम पढ़े लिखे हैं, इसलिए कोई भी उनकी नहीं सुनता है।

नहीं मिल पाता वृद्धा पेंशन का लाभ

बड़ी बहू (70 वर्ष) हाथ जोड़कर कहती है “हमारी कोई नही सुनता, समुदाय मै लगभग 60 साल से 90 साल तक के वृद्ध है, 60 वृद्ध जनो मे से 6-7 को छोड़कर किसी को पेंशन नही मिलती, खर्चा पानी के लिए बच्चों को मुंह ताकना पड़ता है।” बड़ी बहू आगे बताती हैं, "वृद्धा पेंशन का फार्म तो कई बार भरा, लेकिन कोई नहीं सुनता, जबकि हम लोग पात्रता श्रेणी में आते है, फिर भी लाभ नहीं मिलता।" वह बताती है कि "कोई अधिकारी हमारी बस्ती को देखने नहीं आता, क्योकि हम सामान्य जाति में आते हैं।" वो आगे कहती है कि "हमारी स्थिति सहरिया समुदाय से भी दहनीय है।"

क्या कहते हैं अधिकारी

इस बारे में खण्ड विकास अधिकारी, महरौनी प्रदुम्म नारायण द्विवेदी कहते हैं कि "सपेरा समुदाय सामान्य जाति में आता है, शासन से योजनाएं जातिगत आधार पर आती हैं, इस वजह से इस समुदाय के लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता हैं।" वो आगे कहते हैं कि "मामला संज्ञान में आया है, अब ज्यादा से ज्यादा सपेरा जाति के लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जायेगा।"

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