यूपी: किसानों का आरोप- प्रदेश में बिचौलिए उठा रहे MSP पर सरकारी खरीद का फायदा

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस 55 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। सरकार ने किसानों के फायदे के लिए ऑनलाइन सिस्टम अपनाया लेकिन कई जिलों में खरीद को लेकर किसान लगातार सवाल उठा रहे हैं। खरीद में लापरवाही पर 500 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है, बाजवूद इसके किसान परेशान हैं।

Arvind ShuklaArvind Shukla   15 Dec 2020 12:50 PM GMT

अरविंद शुक्ला/ मोहित शुक्ला

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। लखीमपुर खीरी में नया गांव के किसान संजीव कुमार 6 नवंबर को अपना 142 क्विंटल 49 किलो धान लेकर मैगलगंज मंडी आए थे। करीब 20 दिन पहले उनका 50 क्विंटल धान तौला गया था, लेकिन बाकी इंतजार में खराब होने लगा, दोबारा अंकुरण शुरू हो गया। 14 दिसंबर को मीडिया में फोटो आने के बाद उनका बाकी धान खरीदा गया।

गांव कनेक्शन से बात करते हुए संजीव कहते हैं, "डेढ़ महीना हो गया, लेकिन तौल नहीं हो रही थी। मेरा धान खराब होने लगा। कई बार तौल नहीं होती है, होती है मेरा नंबर ही नहीं आ रहा था।" संजीव कुमार का गांव लखीमपुर जिले के मितौली तहसील के पसगवां ब्लॉक में आता है।

मैगलगंज लखनऊ-दिल्ली हाईवे के किनारे बसा एक कस्बा है, जहां के गुलाब जामुब बहुत प्रसिद्ध हैं लेकिन इस बार धान के सीजन में यहां के किसानों के मुंह का स्वाद कसैला हो गया है। संजीव कुमार के अलावा मैगलगंज मंडी में कई और किसान थे जिनका धान खराब हुआ है। इन्हीं में से एक हैं सत्य प्रकाश जमुनिया। मंडी समिति में टीन शेड के नीचे रखे रखे उनका धान काला पड़ने लगा था, जमाव शुरू हो गया था।

लखीमपुर जिले की राजापुर मंडी, जहां तौल के इंतजार में धान में दोबारा अंकुरण शुरु हो गया। फोटो- अरेंजमेंट

गांव कनेक्शन से बात करते हुए 14 एकड़ में धान की खेती करने वाले सत्य प्रकाश कहते हैं, "मेरे पास 150 क्विंटल धान है। लगभग डेढ़ महीने पहले लाए थे, लेकिन आज तक तौला नहीं गया। मैंने जिलाधिकारी से भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंडी तक लाने, पलटा कराने, सुखाने और अब दोबारा ले में करीब 25 हजार खर्च हो जाएग। बाहर धान ले जा रहे, जो 900-1200 का भाव मिलेगा बेच देंगे। सरकार कह रही आदमनी दोगुनी करेंगे, हमारा तो एक लाख का नुकसान हो गया।" 14 तारीख को सत्यप्रकाश का एक ट्राली धान सरकारी के दूसरे केंद्र गोला में तौला गया तो दूसरी ट्राली 1,100 रुपए क्विंटल में खुले बाजारी में उन्हें बेचना पड़ा। इसी मंडी में कृष्ण कुमार का ट्राली भर धान खबर लिखे जाने तक तौला नहीं गया था।

लखीमपुर जिले की मैगलगंज मंडी में मंडी प्रवेश की अपनी रसीद दिखाते किसान संजीव कुमार। ये तस्वीर 13 दिसंबर को ली गई। फोटो- मोहित शुक्ला, गांव कनेक्शन

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इऩ किसानों का धान खरीदने में क्या अड़चन थी, इस सवाल के जवाब में मैगलगंज मंडी के विपणन अधिकारी और केंद्र प्रभारी सुनील त्यागी ने गांव कनेक्शन को बताया, "ये खरीद केंद्र 15 साल बाद पहली बार शुरु किया गया था इसलिए मंडी में पावर फैन, धान सुखाने के लिए मशीन, शेड आदि व्यवस्था नहीं है। ज्यादा से ज्यादा किसानों का धान खरीदा जाए इसलिए एसडीएम साहब ने हर किसान से 50 क्विंटल शुरुआत में लेने की व्यवस्था की थी। बाकी धान दोबारा नंबर आने पर लिया जाता है। शुरुआत में यहां 4 कांटे (तौल केंद्र) जिसमें से दो बंद हो गए। और किसानों की संख्या ज्यादा है इसीलिए किसानों के पूरे अनाज की तौल नहीं हो पा रही है।"

उत्तर प्रदेश में धान खरीद के लिए खाद्य एवं रसद विभाग की देखरेख में 11 सरकारी एजेंसियों के माध्यम से 4341 खरीद केंद्र संचालित हैं। किसानों के मुताबिक उनकी सबसे बड़ी समस्या ये है कि उनके आसपास खरीद केंद्र नहीं है और जहां जा रहे हैं वहां काफी भीड़ रहती है। कई-कई दिन लाइन लगाना पड़ता है।

खरीद केंद्र संचालकों का कहना है कि धान की खरीद में रफ्तार इसलिए नहीं आ पाती क्योंकि मिलर्स धान की उठान समय पर नहीं करते हैं। खरीदे गए माल में कमियां निकालकर वापस कर देते हैं। किसानों का आरोप है कि खरीद केंद्रों के कर्मचारी, अधिकारी, बिचौलिए और मिल वाले मिलकर किसानों का हक मार रहे हैं और व्यापारियों का धान तौला नहीं जा रहा।

तीन कृषि कानूनों में कई चरण की वार्ता के बाद सरकार लगातार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जारी रखने की बात कह रही है। अपने दावों के समर्थन में केंद्र सरकार पंजाब में हुई बंपर धान खरीद का हवाला भी दे रही है, लेकिन कई राज्यों में किसान धान बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा देशभर में 13 दिसंबर तक 375.72 लाख मीट्रिक टन (LMT) की धान की खरीद हुई है, इसमें राज्यवार बात करें तो इस खरीद में 202.77 लाख मीट्रिक टन का योगदान पंजाब (53.94 फीसदी) से है, जबकि उत्तर प्रदेश की भागीदारी महज 9.1 फीसदी है।

पीआईबी द्वारा जारी Ministry of Consumer Affairs, Food & Public Distribution की विज्ञप्ति के अनुसार 13 दिसंबर तक देश में धान खरीद।

उत्तर प्रदेश सरकार ने चालू खरीद सीजन में 55 लाख मीट्रिन टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है। उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट से 15 दिसंबर तक (सुबह तक) प्रात्त आंकड़ों के मुताबिक अब तक 35.62 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई है। यानी लक्ष्य के सापेक्ष में सरकार ढाई महीने में सरकार 64.75 फीसदी खरीद कर चुकी है। प्रदेश में धान बेचने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है, चालू खरीद वर्ष (KMS) में 11,72,082 किसानों से आवेदन किया था, जिनमें से सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 6,62,018 किसानों से धान की खरीद हो चुकी है। इसके एवज में किसानों को 6,659.40 करोड़ रुपए उनके खातों में भेजे जा चुके हैं। पंजीकरण कराने वाले बाकी किसान या तो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं या फिर खेती और घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1000-1300 रुपए कुंतल में धान बेच चुके हैं या बेच रहे हैं।

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में 60 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है और सालाना 169 लाख मीट्रिक चावल (एक कुंतल धान में 67 से 64 किलो चावल सरकारी मानक) का उत्पादन होता है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की वर्ष 2017-18 की रिपोर्ट के धान उत्पादन के मामले में पश्चिम बंगाल, पंजाब के बाद उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर आता है।

लखीमपुर खीरी में ही मैगलगंज से 100 किलोमीटर दूर पलिया तहसील में ढाका फार्म के अमनप्रीत सिंह ने अपना 68 क्विंटल धान 1,200 रुपए के भाव में बेच दिया। अमनप्रीत सिंह फोन पर बताते हैं, "22 अक्टूबर को मैं धान की ट्राली लेकर मंडी गया था, 13 नवंबर तक इंतजार किया। इस बीच धरना प्रदर्शन सब हुआ। अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। दिवाली में खरीद केंद्र के लेबर गए तो वापस नहीं आए। आखिर में दिवाली के दो दिन बाद मैंने 1,200 रुपए कुंतल में धान बेच दिया। तीन बार पंखा लगाया, चमकता हुआ हमारा धान था।"

अमनप्रीत सिंह से गांव कनेक्शन की मुलाकात 3 नवंबर को लखीमपुर खीरी जिले की पलिया मंडी के गेट पर हुई थी। गांव कनेक्शन टीम यूपी के कई जिलों में धान खरीद का जायजा लेने के बाद लखीमपुर खीरी पहुंची थी। मंडी के गेट पर बहुत सारे किसानों की एक शख्स से बहस हो रही थी। शख्स का नाम हरिओम शुक्ला था, जो पलिया मंडी में लगे दो में से एक केंद्र के प्रभारी थे। किसानों के मुताबिक कई दिन से तौल नहीं हो रही है और केंद्र संचालक एक कुंतल धान पर 300-400 रुपए प्रति क्विंटल का कमीशन मांग रहा है। सवाल जवाब करने पर यहां से भाग रहे थे।

जवाब में हरिओम शुक्ला ने कहा, "हमारे यहां मिल (राइस मिल) हमारा धान नहीं उठा रहे हैं। अगर मैं किसानों से तौल करा लूंगा और मिल नहीं लेंगे तो मैं इसकी भरपाई कहां से करूंगा। मैं अपनी जमीन बेचकर भी यह अदा नहीं कर पाऊंगा।" मामला एसडीएम तक पहुंचा था, जिसमें कई किसानों ने खुले तौर पर कमीशन मांगने और धान में नमी ज्यादा बताने, किसानों का धान न लेकर कारोबारियों का धान खरीदने समेत कई आरोप लगाए।

गुरुपयार सिंह के पास 170-180 कुंतल धान रहा होगा लेकिन वो मंडी से अपना धान वापस ले जा रहे थे, जिसके लिए उन्होंने 300 रुपए दिहाड़ी पर 7 लेबर धान भरने में लगा रखे थे। वह कहते हैं, "20 दिन हो गए, रात-दिन यहां रहते हैं। खरीदी करने वाले कर्मचारियों ने पहले कहा कि धान गीला है, फिर सुखाया गया है। फिर बोले बारदाना (बोरे) नहीं है। फिर कहते हैं हमारे पास मिल वाले इनसे 300-400 रुपए मांग रहे हैं। हमारी रिश्तेदारी में पंजाब में शादी है मुझे वहां जाना है। यहां से धान ले जा रहा है मार्केट में जो 1000-1200 का रेट मिलेगा बेच दूंगा।"

पलिया के ही किसान सुरेंद्र सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया, 28 अक्टूबर को उन्होंने अपना 160 कुंतल धान बेचा था लेकिन 82 कुंतल 80 किलो धान रजिस्टर पर चढ़ाया था, बाकि 78 कुंतल धान वो चढ़ा नहीं रहे थे। पीसीएफ के ठेकेदार 300 रुपए कुंतल कमीशन मांग रहे थे तो ही धान चढ़ाएंगे। पलिया मंडी में कई और किसानों ने ठेकेदार, तौल संचालक पर पैसे मांगने का आरोप लगाया।

लखीमपुर जिले में मेढईपुरवा के प्रगतिशील किसान अचल मिश्रा, जो अपना 300 कुंतल धान बेचने के लिए अपने इलाके के केंद्र संचालक से लेकर कमिश्नर तक से अरदास लगा चुके थे, गांव कनेक्शन को बताते हैं, "मैंने खाद्य विभाग की वेबसाइट पर जो डाटा फीड किया जाता है वो और केंद्र में जो धान आ रहा है उस पर लगातार नजर रखे हूं। मैंने कई जगह देखा है कि दिन-दिन भर किसान की कोई ट्राली नहीं आती है, जब कोई किसान आता है तो बहाने बाजी करते हैं लेकिन रात में कहीं से ट्रालियां आती हैं और उसे ये लोग चढ़ा लेते हैं।" इन तमाम किसानों के आरोपों का सार ये था कि केंद्र पर किसानों का धान न तौलकर बाजार से बिचौलियों का धान आता है तो किसी न किसी किसान की खतौनी के नाम पर चढ़ाया जा रहा है।

शाजहांपुर में तिलहर तहसील में रतनपुरा गांव के किसान राजीव कुमार शर्मा को भी अपना धान बेचने में काफी पापड़ बेलने पड़ा। शर्मा का कहना था कि मानकों पर खरा उतरने के बाद भी उनके धान की खरीद नहीं हो रही। शिकायत करने पर तिहलर मंडी में जायजा लेने एसडीएम से उन्हें डांट भी खानी पड़ी। थाने पर बैठाने का अल्टीमेटल भी मिला लेकिन आखिर में उनका धान तुल गया।

लखीमपुर की राजपुर मंडी में धान खराब होने के बाद किसान की आंखों से आंसू छलक आए। फोटो अरेंजमेंट

पलिया से 225 किलोमीटर दूर बाराबंकी जिले के गन्ना संस्थान में दर्जनों किसान अपनी बारी आने का दिन रात इंतजार कर रहे हैं। ललित कुमार (38 वर्ष) पिछले 10 दिनों से अपना एक ट्राला धान बेचने के लिए यहां कतार में लगे थे। झंझरा गांव के ललित कुमार के मुताबिक उनका धान आज तौला जाएगा, कल तौला जाएगा कहके टरकाया जा रहा है। "इस कड़ाके की सर्दी में एक हफ्ते से ट्रैक्टर ट्राली लेकर खड़े हैं। रात में बहुत ठंड है। न कहीं ठहरने का इंतजाम है, न खाने का ना ही पानी। अलाव तक नहीं है पूरी रात ट्रैक्टर पर लेट कर या फिर टहल कर गुजार देते हैं।"

उत्तर प्रदेश में धान तौल केंद्रों पर समस्याओं और शिकायतों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार केंद्र प्रभारियों और दूसरे कर्मचारियों, ठेकेदारों पर कार्रवाई भी की है। 14 दिसंबर तक प्राप्त सरकारी जानकारी के अऩुसार अब तक 504 अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और मिलर्स पर निलंबन, जेल भेजने, प्रतिकूल प्रविष्टि और कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

लखीमपुर खीरी में 2 खरीद केंद्रों के प्रभारी जसवंत सिंह के मुताबिक सरकार 5 बिंदुओं को ध्यान में खरीद करती है लेकिन हम लोगों को ट्रेनिंग सिर्फ नमी और साफ सुथरे धान की दी जाती है, लेकिन मिलर्स उनके कमियां निकालते हैं। वे कहते हैं, हम लोगों की पोस्टिंग के वक्त परिवहन ठेकेदार की नियुक्ति होनी चाहिए जो नहीं हुई। वह हमें ही मैनेज करना पड़ता है। मैंने पिछले दिनों 6 लाख रुपए का धान खरीदा लेकिन मिल ने रिजेक्ट कर दिया। अब ये पैसे मेरे मत्थे मढ़ गए हैं। इसके लिए मुझे कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी, वर्ना इसकी रिकवरी होगी।"

धान खरीद मिलीभगत पर गांव कनेक्शन को लखीमपुर के एक किसान ने अपने मोबाइल में आए मैसेज को दिखाते हुए कहा, "देखिए मैंने अपना धान बेचा तो एक मिल मालिक को था लेकिन ये मेरे पास पैसा सरकारी खरीद केंद्र से आया है। जो पैसा आया है वो 124 कुंतल धान का 1868 रुपए के हिसाब से आया है लेकिन मैंने उन्होंने दिया था 180 कुंतल के आसपास। हम अपना और मिल मालिक का नाम इसलिए नहीं बताना चाहते क्योंकि हमें जब जरूरत होती है बिना ब्याज के हम तीन-चार लाख रुपए उनसे ले सकते हैं। हम ऐसे ही धान और गेहूं बेचते हैं, वे हमें मार्केट से ज्यादा देते हैं, लेकिन बाकी क्या होता है मुझे नहीं पता।"

सवालों के कठघरें में चावल मिल संचालक भी हैं। लेकिन वो ना सिर्फ खरीद केंद्रों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हैं बल्कि पूरे सिस्टम में धान माफिया के सक्रिय होने और किसानों से पैसे वसूले और सरकार को चूना लगा रहे हैं।

राइस मिल एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट और पीलीभीत जिले के पूरनपुर में कई धान मिलों के मालिक अजमेर सिंह छीना कहते हैं, "कोई भी मिल मालिक ना खुद से खरीद कर रहा है न ही केंद्र द्वारा खरीदे गए धान को वापस भेज रहा है। जहां से जो धान भेजा जा रहा है उसे कूटकर एफसीआई को भिजवा रहे हैं उल्टा हमारा चावल एफसीआई वाले फेल कर रहे हैं। हम 24 गाड़ी माल भेज रहे हैं तो 12 गाड़ी ही उतरा रहे, क्योंकि इसमें जो ठेकेदार हैं, ज्यादातार इसमें माफिया इनवॉल्व हैं। वो 200-300 रुपए लेकर घटिया धान खरीद रहे हैं। हमारे यहां दो दिन पहले ही 4 लोग पकड़े गए हैं।"

यूपी की सीतापुर मंडी में धान की ढेरी पर लगी पर्ची, जिसमें लिखा है कि धान 1110 रुपए क्विंटल बिका है। फोटो- अरविंद शुक्ला

राइस मिल एसोसिएशन ने नमी, रिकवरी और एफसीआई के साथ समस्याओं को लेकर खाद्य आयुक्त और मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है।

धान खरीद को लेकर रिपोर्टिंग के दौरान पीलीभीत जिले में प्रशासन सक्रिय दिखा। पीलीभीत के जिलाधिकारी का एक वीडियो भी काफी वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने मंडी में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को खुलेआम फटकार लगाई थी। पीलीभीत ने सिर्फ किसानों से धान खरीद कई प्रयोग भी किए हैं, जिसमें मंडियों के गेट पर रजिस्ट्रेशन टोकन के साथ सिर्फ किसान से ही धान खरीद सुनिश्चित करने को कागजात अनिवार्य कर दिए हैं।

गांव कनेक्शन से बाचचीत में पीलीभीत के जिलाधिकारी ने पुलकित खरे कहते हैं, "सरकार की प्राथमिकता है कि छोटे किसान से खरीद प्राथमिकता तो उसे एमएसपी मिले, तो सबसे पहले उसकी तौल होती है। केंद्र प्रभारियों पर नजर रखी जा रही है। लेखपाल की जिम्मेदारी है कि किसान की तौल कराए और एमएसपी दिलाए। हमने ये भी किया है कि तौल के वक्त किसान खुद आए ताकि बिचौलिए किसी तरह हावी न हो जाए। अगर कोई किसान बाहर है या आने में असमर्थ है तो उसका भी इताजम किया है है। खरीद केंद्र केंद्रो के साथ मिलर्स पर नजर है और कई पर कार्वराई की गई है।'

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उत्तर प्रदेश में धान खरीद को लेकर अलग-अलग समस्याएं हैं। लेकिन मुख्य समस्याओं की बात करें तो धान की नमी और रिकवरी है। सरकार के नियमों के अनुसार मोटा मोटी एक कुंतल धान से 67 किलो चावल निकलना चाहिए, जबकि हाइब्रिड धान की स्थिति में रिकवरी घटकर 64 फीसदी हो जाती है। लेकिन जिस अनुपात में हाइब्रिड की खेती बढ़ी है वो भी एक समस्या है।

सोनभद्र जिले में दुद्धी के पास एक खरीद केंद्र के प्रभारी दिवेंद्र सिंह ने बताया, "खरीद तो लगातार जारी है लेकिन कुछ समस्याएं भी हैं। पूरे सीजन में सरकार सिर्फ 35 फीसदी हाइब्रिड धान की खरीद हो सकती है लेकिन इस इलाके (दुद्धी आदि) में 90 फीसदी धान हाइब्रिड आ रहा है। अगर सब वो खरीद लिया तो रिकवरी कहां से होगी। लेकिन हम लोग कोशिश कर रहे कि ज्यादा से ज्यादा किसानों का धान खरीदा जाए।" 35 फीसदी हाइब्रिड का आशय है कि एक खरीद केंद्र अगर पूरे सीजन में 100 कुंतल धान खरीदता है तो उसमें से 35 क्विंतल धान ही हाइब्रिड हो सकता है। लेकिन ज्यादा पैदावार, कम दिनों में पकने और दूसरी फसल के लिए ज्यादातर किसान यही धान उगाते हैं।"

धान खरीद को लेकर सरकारी पक्ष जानने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग में आयुक्त मनीष चौहान और दूसरे अधिकारियों कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष मिलते ही खबर में अपडेट किया जाएगा।

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