नई प्रणाली से भारतीय मानसून के पूर्वानुमान में सुधार आएगा   

नई प्रणाली से भारतीय मानसून के पूर्वानुमान में सुधार आएगा   मानसून की सटीक जानकारी मिलेगी।

वाशिंगटन (भाषा)। वैज्ञानिकों ने भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून की शुरुआत और इसकी समाप्ति को सटीक जानकारी देने वाला उपकरण विकसित किया है। देश में मौसम की प्रणाली के कारण सालाना लाखों लोग प्रभावित होते हैं।

अमेरिका की फ्लोरिडा स्टेट यूनविर्सटी के शोधार्थियों ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की है, जो भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून (आईएसएम) की अवधि का आकलन करने के लिये उस इलाके में हुई कुल बारिश के आकलन का इस्तेमाल करती है। वैज्ञानिक लंबे समय से मानसून की अवधि की सटीक गणना करने वाला मॉडल तैयार करने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। शोधार्थियों ने बताया कि अभी तक विश्वसनीय ढंग से मानसून का सटीक आकलन करने वाली कोई प्रणाली नहीं है।

फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर वासु मिश्रा ने कहा, मौजूदा समय में मौसम का पूर्वानुमान एवं निगरानी करने वाली कोई भी प्रणाली किसी एक विशेष स्थान पर मानसून की शुरुआत के बारे में केंद्रित रही है। इसका प्रयोग विशेष रुप से देश के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर स्थित केरल राज्य के लिये किया जाता है, जबकि इसके बाद देश के शेष हिस्सों के बारे में अनुमान लगाया जाता है।

शोधार्थियों ने कहा कि देश के सभी हिस्सों में मानसून (आईएसएम) की शुरुआत और इसकी समाप्ति के बारे में स्पष्ट एवं सटीक अनुमान की कमी के कारण लंबे समय से लोगों में मानसून को लेकर भय रहा है।

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