गौ-मांस को लेकर तेज हुई राजनीति के बीच वैकल्पिक रास्ता निकालने के सुझाव 

गौ-मांस को लेकर तेज हुई राजनीति के बीच वैकल्पिक रास्ता निकालने के सुझाव गाय। प्रतीकात्मक फोटो

कोच्चि (भाषा)। गौमांस खाने और मवेशियों के व्यापार को लेकर उपजा विवाद राष्ट्रव्यापी मुद्दा बन गया है। जिससे तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुये। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रतिबंध को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताया तथा कहा कि उनकी सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी।

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मद्रास उच्च न्यायालय ने पशुबाजारों में वध के लिये मवेशियों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी अधिसूचना के अमल पर चार हफ्ते के लिये रोक लगा दी थी। यह आदेश उस याचिका पर दिया गया जिसमें इस आदेश को निजी स्वतंत्रता का विरोधी, आजीविका के अधिकार और राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुये चुनौती दी गयी थी। हर्ष वर्धन ने कहा, ‘‘पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम लोगों की खाने-पीने की आदत या बूचड़खानों के कारोबार को प्रभावित करने के लिये नहीं हैं।''

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पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत प्रतिबंध की घोषणा के बाद पर्यावरण मंत्रालय को इस पर कई सुझाव मिले हैं जिसमें सरकार से वैकल्पिक सुझावों पर विचार करने को कहा गया है। इस फैसले से मीट और चमड़े के निर्यात और व्यापार के प्रभावित होने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व में कहा था कि इस प्रतिबंध का राज्यों के गौवध को लेकर बनाये गये कानूनों से कुछ लेना देना नहीं और यह सिर्फ बिक्री की जगह से जुड़ा है।

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