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Lockdown: मांग घटने से बढ़ीं पशुपालकों की मुश्किलें, नहीं बिक रहा है दूध

21 दिनों के लॉकडाउन का असर सब्जी और फलों के किसानों के साथ ही पोल्ट्री और डेयरी व्यवसाय पर भी पड़ा हैं। दूध की खपत कम होने से डेयरी संचालकों के सामने यही परेशानी है कि दूध का क्या करें।

Divendra SinghDivendra Singh   3 April 2020 5:59 AM GMT

Lockdown: मांग घटने से बढ़ीं पशुपालकों की मुश्किलें, नहीं बिक रहा है दूधकेरल में दूध न बिक पाने के कारण सैकड़ों लीटर दूध फेक दिया

हर दिन नेमीचंद अपनी डेयरी के दूध के साथ ही गांव के दूसरे कई पशुपालकों का भी दूध इकट्ठा कर के शहर लेकर जाते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद से उनके सामने समस्या है कि अब इतने दूध का क्या करें।

नेमीचंद मध्य प्रदेश के भोपाल ज़िले के चन्देरी गांव में 50 गाय-भैंसों की डेयरी चलाते हैं और दिन भोपाल में हलवाईयों के साथ दूसरी दुकानों पर भी दूध सप्लाई करते हैं। वो बताते हैं, "हमारे ज्यादातर ग्राहक होटल और चाय की दुकान वाले ही हैं, लेकिन अब सब बंद हो गए हैं, एक तो पशुओं के चारे की कमी से पहले से ही परेशान हैं और महंगे दाम में पशु आहार मिल रहा है और दूध भी नहीं बिक रहा।"

21 दिनों के लॉकडाउन का असर सब्जी और फलों के किसानों के साथ ही पोल्ट्री और डेयरी व्यवसाय पर भी पड़ा हैं। दूध की खपत कम होने से डेयरी संचालकों के सामने यही परेशानी है कि दूध का क्या करें।

कर्नाटक के बेलगावी जिले में लॉकडाउन के चलते दूध न बिकने से परेशान होकर हजारों लीटर दूध नहर में बहा दिया। उनके गांव की समिति ने दूध खरीदने से इनकार कर दिया, इसलिए उन्हें दूध फेंकना पड़ा।


केरल के पलक्कड़ में डेयरी किसानों ने भी दूध फेंक दिया। 140 गायों की डेयरी चलाने वाली राज्य पुरुस्कार से सम्मानित ललिता रामकृष्णन कहती हैं, "हमने आस-पास के अनाथालय में भी पता किया कि दूध बिक जाए, लेकिन वहां पहले से किसानों ने दूध दे दिया था। इसलिए हमें दूध फेकना पड़ा।"

ललिता की 140 गायों में से 60 दुधारू गाय हैं, जिनसे सुबह लगभग 330 लीटर और शाम को लगभग 250 लीटर दूध मिल जाता है। लेकिन लॉक डाउन के बाद से उनके सामने समस्या है कि दूध का क्या करें।

लगभग 18 करोड़ टन दूध उत्पादन के साथ भारत विश्व के 20% दूध का उत्पादन करता है और पिछले दो दशकों से प्रथम स्थान पर बने हुए हैं।

दुग्ध उत्पादन में लगभग 75% हिस्सेदारी लघु, सीमांत और भूमिहीन किसानों की है। ऐसे में उनके लिए खुद दूध बेच पाना मुश्किल होता है। लगभग 10 करोड़ डेयरी किसान हैं यानी लगभग 50 करोड़ लोग दुग्ध उत्पादन से होने वाली आमदनी पर निर्भर हैं। हमारे देश में लगभग 28 लाख करोड़ रुपए मूल्य का कृषि उत्पादन होता है। इसमें 25% हिस्सा यानी लगभग 7 लाख करोड़ रुपए मूल्य का दूध का उत्पादन होता है।


कोरोना वायरस को लेकर सरकार ने द्वारा लॉकडाउन के चलते लघु उद्योग-धंधे व व्यापार के साथ इसका असर दूध व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है। ढाबे, मिष्ठान भण्डार, मावा फैक्ट्रियां बंद होने से दूध कारोबार लगभग ठप सा हो गया है।

20वीं पशुगणना के अनुसार देश में 14.51 करोड़ गाय और 10.98 करोड़ भैंसें हैं, जबकि गोधन (गाय-बैल) की आबादी 18.25 करोड़ है। साथ ही दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) की संख्या 12.53 करोड़ है।

दूध की खपत कम होने से सरकारी समितियों ने पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध का दाम भी घटा दिया है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दूध डेयरी चलाने वाली सुधा पांडेय बताती हैं, "हमारी डेयरी का दूध सरकारी समिति में ही जाता है, लेकिन लॉकडाउन के बाद से दूध का दाम ही घटा दिया है, चूनी, चोकर का दाम बढ़ गया, लेकिन दूध का दाम घट गया। सीतापुर में बहुत सी दूध की दुकानें बंद हो गईं हैं, अब दूसरे पशुपालक जो हलवाइयों को दूध देते थे हमारे पास आ रहे हैं कि दूध बिकवा दो। लेकिन समितियां दूध खरीदने को ही नहीं तैयार हैं।"

वो आगे कहती हैं, "अगर पशु पालक दूध का पनीर या खोया भी बना ले तो कितना बना पाएगा, उसे बेचने में भी तो परेशानी होगी, बहुत से छोटे किसान हैं, जिनका हर दिन का खर्च दूध बेचकर चलता है। और भूसा, पशु आहार अलग से खर्च होता है।"

मेरठ के सबसे बड़े पशु पालक मनीष भारती ने गाँव कनेक्शन को बताया हमारे पास 80 गाय हैं जिसमें 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन प्रतिदिन होता है लेकिन हमारे सामने आज सबसे बड़ा संकट खड़ा है पशुओं के चारा महंगा आ रहा है और दूध सस्ता बिक रहा है और खपत भी नहीं है ऐसे में हमें दूध पराग जैसी बड़ी डेयरी ओ को देना पड़ रहा है जो पूरी तरह कौड़ियों के भाव बिक रहा है बड़ा संकट है।

प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, उत्तर प्रदेश में प्रयागराज मंडल के दुग्ध संघ के इंचार्ज डीके सिंह कहते हैं, "हमारे यहां प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और कौशांबी इन चारों जिलों से दूध इकट्ठा होता है। लेकिन लॉकडाउन के बाद से दूध की खपत कम हो गई और दूध ज्यादा आने लगा है। अब हम सभी से तो दूध नहीं ले सकते हैं।"

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