World Blood Donor Day: आप रक्तदान कर रहे हैं फिर भी खून की कमी झेल रहे हैं, आखिर क्यों?

World Blood Donor Day: आप रक्तदान कर रहे हैं फिर भी  खून की कमी झेल रहे हैं, आखिर क्यों?हर साल तीन मिलियन रक्त की कमी झेलता है भारत

लखनऊ। इसी साल अप्रैल में यह खबर आई थी कि पिछले पांच साल में भारत में करीब छह लाख लीटर रक्त ब्लड बैंक में बर्बाद हुआ है।

यह जानकारी नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के कार्यकर्ता चेतन कोठारी ने रक्तदान की जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन किया था जिससे भारत के ब्लड बैंक की बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। पिछले पांच वर्षों में पूरे भारत भर में करीब 28 लाख यूनिट रक्त और इसके तत्व बैंकों द्वारा बर्बाद हुआ है।

अगर लीटर में गिनती करें तो तकरीबन छह लाख लीटर से भी ज्यादा रक्त पांच साल में बर्बाद हुआ है जिससे 53 टैंकर भरे जा सकते हैं। इनकी वजहें अलग-अलग हैं। लखनऊ के केजीएमयू में पिछले साल 1300 यूनिट रक्त वेस्ट हुआ है।

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खून की कमी से बढ़ रही मौतें

भारत हर साल करीब तीन मिलियन यूनिट रक्त की कमी झेलता है। खून की कमी, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की कमी के चलते मातृ मृत्यु दर और दुर्घटना में लोगों की मृत्यु के मामले काफी बढ़ रहे हैं।

एक्सपाइरी डेट से पहले खून का इस्तेमाल नहीं

देश में रक्त की बर्बादी की आंकड़ें बेहद भयानक हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में न सिर्फ पूरा रक्त बल्कि ब्लड सेल्स और प्लाज़्मा जैसे रक्त के तत्व भी एक्सपाइरी डेट से पहले इस्तेमाल में नहीं लाए जाते हैं। साल 2016-17 में 6.57 लाख यूनिट से ज्यादा रक्त और उसके तत्व बर्बाद हो चुके हैं।

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बर्बाद करने में आगे है महाराष्ट्र

भारत में सिर्फ एक ही राज्य है महाराष्ट्र जिसने एक मिलियन ब्लड डोनेशन का आंकड़ा छुआ है और रक्त बर्बाद भी उतना ही किया है। इसके बाद प. बंगाल और आंध्र प्रदेश का नाम आता है।

सबसे चिंताजनक ये था कि इन बेकार ब्लड यूनिट में 50 फीसदी हिस्सा प्लाज्मा का था, जिसकी शेल्फ लाइफ एक साल की होती है। फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा कई फार्मा कंपनियों द्वारा एल्बुमिन को निर्मित करने के लिए आयात किया जाता है। उसमें भी आश्चर्य जनक यह है कि तीन लाख से ज्यादा यूनिट पिछले साल बर्बाद हो गई।

तमिलनाडु में करीब 56,000 लीटर ब्लड और उसके तत्व पिछले पांच वर्षों में बर्बाद हुआ जो कुल डोनेशन का पांच फीसदी है।

बर्बादी के क्या कारण है

केजीएमयू ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा बताती हैं कि बल्ड बैंक में रक्त की बर्बादी की सबसे बड़ी वजह संक्रमित रक्त है और संक्रमित रक्त किसी के भी इस्तेमाल में नहीं आ सकता।

केजीएमयू में ब्लड टेस्ट की टेक्नोलॉजी काफी अत्याधुनिक है जो महीन संक्रमण को भी पकड़ लेती हैं। डॉ. तूलिका बताती हैं कि पिछले साल केजीएमयू के ब्लड बैंक में करीब 60,000 यूनिट ब्लड स्टोर किया गया था जिसमें 1300 यूनिट ब्लड संक्रमित था जिसका इस्तेमाल नहीं हो सकता।

‍डॉ. तूलिका आगे कहती हैं कि एचआईवी के मरीज को खुद शुरुआत के कुछ महीनों में लक्षण मालूम नहीं पड़ते। इसी तरह हेपेटाइटिस ए, बी व सी से संक्रमित रक्त बर्बादी की वजह बनता है।

रक्त के सभी तत्व जैसे प्लेटलेट्स, प्लाज़्मा को निकाल लिए जाने के बाद भी वह पूरी तरह बर्बाद होता है।

ब्लड कैंप में भी बर्बाद होता है रक्त

इसी तरह ब्लड डोनेशन कैंप में भी रक्त की बर्बादी होती हैं। इस बारे में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की जरीन भरूचा ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में बताया था कि जहां 500 यूनिट ब्लड को स्वीकार और मैनेज किया जा सकता है लेकिन इससे ऊपर की मात्रा को कैंप में स्टोर करने की जगह नहीं होती है। ऐसे में अगर हर तीन महीने में लोग रेगुलर रक्त दान करते हैं तो फायदा होगा।

ब्लड बैंक में कैसे सुरक्षित हो रक्त


डॉ. तूलिका कहती हैं कि अगर व्यक्ति फिट नहीं है तो वो रक्तदान न करें।

ब्लड को स्टोर रखने के लिए स्टोरेज प्रोसेस सही होना चाहिए।

ब्लड को सही तरीके से रेफ्रिजरेट करके रखना चाहिए।

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