आखिर क्यों जलते हैं चिप्स प्लास्टिक की तरह

आखिर क्यों जलते हैं चिप्स प्लास्टिक की तरहवायरल विडियो में आलू का चिप्स आसानी से जलने लगता है

आज के युग में सोशल मीडिया ज्ञान का सागर है और जिसके फोन में सोशल मीडिया ऐप हैं उससे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं है। कम से कम व्हट्सऐप व फेसबुक पर बंटते ज्ञान और उस पर भाई लोगों के अटूट विश्वास को देखकर तो ऐसा ही लगता है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया अफवाहों का ऐसा बाजार बन चुका है जहां हर किस्म की अफवाह मिल जाती है। अपने ही अपनों के फोन पर इसे फॉरवर्ड करते हैं, सिलसिला चलता जाता है, बिना यह परवाह किए कि इसका असर क्या होगा या इससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी। इस सब पर तुर्रा यह कि यह सब नेकनीयती से किया जाता है।

काफी समय से सोशल मीडिया पर एक विडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक सज्जन लेज आलू के चिप्स को गैस पर जलाकर दिखा रहे हैं और बता रहे हैं कि देखिए यह आलू का चिप्स आग पकड़ रहा है क्योंकि इसमें प्लास्टिक भरा पड़ा है। इसलिए प्लास्टिक वाले चिप्स मत खाइए।

अब सवाल यह है कि अगर प्रोसेस किए हुए आलू का पापड़ आग पकड़ रहा है तो क्या इसका मतलब यह है कि उसमें प्लास्टिक है? क्या, साइंस लैब की जगह किचन में किए गए इस प्रयोग को गंभीरता से लिया जा सकता है? इन सवालों का जवाब पाने के लिए फर्जी विडियोज की असलियत खोलने वाली साइट बूम लाइव ने लेज चिप्स बनाने वाली कंपनी पेप्सिको से संपर्क किया।

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पेप्सिको ने चिप्स में प्लास्टिक मिलने के दावे को नकारते हुए बताया कि आलू के चिप्स में स्टार्च होता है और जब आप स्टार्च को आग की लपट के ऊपर रखते हैं तो वह इसी तरह जलता है। चिप्स में दूसरे स्टार्च वाले खाद्य पदार्थों की तरह कर्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट होता है और ये सभी आग पकड़ते हैं। लेज पूरी तरह सुरक्षित व शाकाहारी है। इसलिए किसी भी अफवाह का शिकार मत बनिए।

मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नॉलजी में डिपार्टमेंट ऑफ फूड इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलजी के हेड उदय अन्नपुरे ने भी इस बयान का समर्थन किया। उनका कहना है, आरोप लगाने वाला विडियो बेबुनियाद है।

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आखिर आलू के चिप्स प्लास्टिक की तरह क्यों जलते हैं, इस सवाल पर उदय कहते हैं, चिप्स या कुरकुरे जैसी चीजें प्लास्टिक की तरह जलती हुई दिखती जरूर हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उनमें प्लास्टिक है। साइंस की भाषा में प्लास्टिक ढेर सारे मोनोमर से बना पॉलिमर है। आलू के चिप्स में 80 फीसदी स्टार्च होता है, स्टार्च भी पॉलिमर है जो खूब सारे ग्लूकोज के अणुओं से मिलकर बनता है। मतलब प्लास्टिक ऐसा पॉलिमर है जिसे खाया नहीं जा सकता वहीं स्टार्च ऐसा पॉलिमर है जिसे खाया जा सकता है। प्लास्टिक और आलू में बस इतनी सी समानता है इसीलिए दोनों आग के साथ एकजैसा बर्ताव करते हैं। लेकिन लोग यह तो जानते हैं कि प्लास्टिक कैसे जलती है पर यह नहीं जानते कि स्टार्च कैसे आग पकड़ता है। उदय पूछते हैं, चीनी भी तो प्लास्टिक की तरह जलती है, तो क्या मान लिया जाए कि चीनी में भी प्लास्टिक है?

इसलिए अगली बार कोई आपसे कहे कि पैकेट बंद चिप्स या कुरकुरे में प्लास्टिक है तो उसकी बात पर आंख बंद करके भरोसा मत कीजिएगा, बल्कि उसको असलियत बताइएगा।

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