रेप पीड़िता ने कहा- ‘दीदी मुझसे मत पूछना उस दिन क्या हुआ था ? 

रेप पीड़िता ने कहा- ‘दीदी मुझसे मत पूछना उस दिन क्या हुआ था ? दो रेप पीड़िताओं और एक रेप पीड़िता की माँ (बीच में) की व्यथा, इनकी आपबीती जानकर आपको भी तकलीफ़ होगी।  

सीतापुर। हाल में देश में कठुआ और उन्नाव गैंगरेप मामलों की पूरे देश में चर्चा है। दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग हो रही है। लेकिन कई मामले ऐसे होते हैं जो सुर्खियां नहीं बन पाते। गांव कनेक्शन ने ऐसी ही तीन पीड़ित परिवारों से बात की है, जो घुट-घुट कर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

देश में जब भी कोई बच्ची या महिला दरिंदगी का शिकार होती है, उसके रेप की ख़बर आती है। इन परिवारों का दर्द और घुटन वैसे ही बढ़ जाती है। नीचे दिए गए तीनों मामले यूपी के सीतापुर जिले के हैं। इनमें से दो पीड़िताएं जिंदा हैं और न्याय के इंतजार में हैं,जबकि तीसरी की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी, बच्ची का परिवार उसके लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है।

‘वो सिर्फ 15 साल की थी, दरिदों को न जाने क्या सूझा था’

“गाँव में हर कोई हमारी बिटिया की तारीफ़ करता था। सिर झुकाकर अपने रास्ते जाती और अपने रास्ते वापस आती। पता नहीं उन दरिंदों को क्या सूझा, गलत काम भी किया और हमारी बिटिया को मार भी डाला। उसका एक हाथ काम नहीं करता था, अगर उसके दोनों हाथ ठीक होते तो शायद वो अपना बचाव भी कर पाती। हमारी बेटी भी चली गई और समाज का कलंक भी लग गया।“ ये माँ अपनी 15 वर्षीय बेटी चंदा (बदला हुआ नाम) की तमाम यादों के साथ आज घुटन भरी जिन्दगी जी रही है।

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ये है वो माँ, जिसने अपनी 15 साल की बेटी को खोया है

चंदा हर सुबह की तरह पिछले साल 30 जून को भी सुबह छह बजे शौच के लिए घर से गई थी। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान इसी गांव के दो युवकों ने रेप के बाद उसकी हत्या कर दी। चंदा की मां बताती हैं, “गांव के मान सिंह (25 वर्ष) और अनुज कुमार (20 वर्ष) चंदा को पास के गन्ने के खेत में खींच ले गये, गैंगरेप के दौरान दुपट्टे से गला दबाकर हत्या कर दी।” दोनों आरोपी फिलहाल जेल में हैं। चंदा अपने गांव के प्रधान की बेटी थी।

ग्राम प्रधान बताते हैं, “घटना के दो दिन पहले मान सिंह के घर खाने को गेहूं तक नहीं था, तब हमने अपने घर से 20 किलो गेहूं उधार दिया था। हमें नहीं पता था कि ये लोग गाँव में रहकर हमारी बिटिया के साथ ऐसा करेंगे।“ आगे कहा, “अगर इन्हें फांसी की सजा नहीं मिली तो गाँव में इन्हें सरेआम घूमते हुए बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा। हमारी बेटी तो अब कभी वापस नहीं आएगी, मगर दोषियों को फांसी की सजा मिले तो बस इतनी तसल्ली रहेगी कि ऐसी घटना करने से पहले लोग 100 बार सोचेंगे।"

दिल्ली के निर्भया केस के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार आवाजें उठी, कई नियम बनें। बेटियों के बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ अभियान शुरु हुआ। पॉस्को एक्ट आया, यूपी में एंटी रोमियो स्क्वायड बनी और महिला हेल्पलाइन की शुरुआत की, लेकिन सरकार की इन तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद लगातार महिलाओं के साथ होने वाले अपराध जारी हैं।

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ये है 11 वर्षीय रेप पीड़िता,जिसने अब खुद को कमरे में कैद कर लिया है ।

दूसरी कहानी- दीदी मुझसे मत पूछना उस दिन क्या हुआ था ?

यूपी के सीतापुर जिले में ही ऐसी ही एक 11 वर्षीय रेप पीड़ित से जब गांव कनेक्शऩ संवादादाता मिलने पहुंची तो उसका चेहरा उतर गया. उसे डर था एक बार उससे रेप की आपबीती पूछी जाएगी। बहुत मुश्किल से संवाददाता खुद नेहा (बदला नाम) से बात करने की हिम्मत जुटा पाई।

नेहा ने झुकी नजरों से कहा, “दीदी, मुझसे कुछ मत पूछना। वो दिन मैं कभी याद नहीं करना चाहती। अब तो घर से बाहर निकलने का मन नहीं करता, स्कूल जाने का भी मन नहीं करता। कोई मुझसे बात न करे, मैं सिर्फ अकेले रहूं यही चाहती हूँ।” इतना बताते बताते उसकी आंखें डबडबा आई थीं।

भर्राए गले से वो आगे बताती है, “मुझसे कोई कुछ कहता तो नहीं है, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि लोग हमारी ही गलती मान रहे हैं। सब कहते हैं, बिटिया की जाति है, शादी कैसी होगी। जो आता है यही पूछता है क्या-क्या हुआ उस दिन। गुस्सा आता है मुझे बताने में, पर घर वाले कहते हैं, बता दो... शायद कुछ न्याय मिल जाए, इसलिए मजबूरी में बताना पड़ता है।” वो चुपचाप उठकर घर के अंदर चली गयी।

नेहा 15 अगस्त 2017 को स्कूल से घर वापस आई। शाम को बकरी के लिए खेत पर घास लेने गई थी, तभी गाँव के एक लड़के ने उसके साथ रेप किया और धमकी दी अगर किसी को बता दिया तो जान से मार डालेंगे। नेहा को जब होश आया तो वह बमुश्किल अपने घर पहुंच पाई। उसकी धमकियों से डरी नेहा ने ये बात घर में कुछ देर तक किसी को नहीं बताई, पर लगातार हो रही ब्लीडिंग से वो हार गई।

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रेप की घटना ने इस मासूम का बचपन छीना है, इसकी मुस्कराहट छीनी है, पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने, सपने गढ़ने की उम्र में समाज ने नेहा को बंद कमरे में रहने को विवश किया है। ये घटना उस गरीब परिवार की है, जहां पर पांच भाई, दो बहनों के रहने के लिए सिर्फ एक छोटा सा कमरा और गर्मी और बारिश से बचने के लिए फूस का टूटा छप्पर रखा हुआ है।

नेहा के बड़े भाई ने बताया, “हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम हर बार वकील और पुलिस को पैसे दे पाएं। मेहनत मजदूरी करके दो वक़्त की रोटी का इंतजाम हो पाता है। आरोपी के घर वाले पैसे वाले हैं, नाबालिग का सर्टिफिकेट दिखाकर लड़का पांच छह महीने जेल रहा, फिर छूट कर आ गया।”

पीड़िता के भाई ने अपनी बेबसी जताते हुए कहा, “गाँव में उसे घूमता हुआ देखता हूँ तो बहुत तकलीफ होती है। खुद को लाचार पाता हूं और कोसता हूं कि मैं कैसा भाई हूं जो अपनी बहन को इंसाफ नहीं दिला पा रहा हूं।”

सीतापुर में आशा ज्योति केंद्र की सुगमकर्ता रामलली पटेल बताती हैं, “जिले में 15 केस पाक्सो एक्ट के और तीन गैंगरेप के हैं। ये वो केस हैं, जिनकी हमें किसी तरह से जानकारी मिली है या फिर केस सीधे हमारे पास आते हैं। रेप के कई ऐसे मामले हैं, जिसमें पीड़ित पक्ष गरीबी और समाज के डर से अपनी बात पुलिस तक नहीं पहुंचा पाते।”

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इस पीड़िता के साथ पांच लोगों ने गैंगरेप किया, दो को पुलिस ने पांच महीने बाद भी नहीं पकड़ा

दरिंदगी की तीसरी कहानी- दवा दिलाने का झांसा देकर दर्द दिया

पिछले साल 19 नवंबर का दिन उत्तर प्रदेश के सीतापुर में ही रहने वाली नजमा (बदला हुआ नाम) के लिए काला दिन था। पांच साल पहले ससुराल छोड़ आई नजमा की मानसिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी। आज उसके आठ साल की बेटी है। उस दिन नजमा अपनी दवाई लेने के लिए बाजार गई थी। उस दौरान गाँव के एक आदमी ने उसे झांसा दिया कि हमारी जानकारी में एक डॉक्टर है जो उसे अच्छी दवा देगा और वो ठीक हो जाएगी। मगर थोड़ी दूर जाते ही पांच लोगों ने उसे पकड़कर उसके साथ गैंगरेप किया।

पुलिस में शिकायत भी की, मगर अभी तक पुलिस सिर्फ तीन दोषियों को पकड़ सकी है, जबकि दो दोषी पांच महीने बाद भी पुलिस की गिरफ़्त से दूर हैं। इस गैंगरेप की घटना के बाद नजमा पूरी तरह से अपनी जिन्दगी से टूट चुकी है।

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बातचीत में नजमा अपने गिरे हुए घर की तरफ इशारा करते हुए बताती है, “घर की स्थिति आप देख रही हैं। हमारे अब्बू के पास इतने रुपए नहीं हैं, जिससे वो पुलिस की जेब भर पाएं। पांच लोगों ने हमारे साथ गैंगरेप किया जो एक-दूसरे को जानते हैं पर पुलिस ने दो को अभी तक नहीं पकड़ा है।” आगे बताया, “पुलिस का कहना है कि उनको हम पहचाने। हमारी तो दुर्दशा कर दी थी, उन्होंने, हमने उनके चेहरे नहीं देखे थे। पुलिस कह रही है जब तक हम नहीं पहचानेंगे, तब तक उन्हें नहीं पकड़ा जाएगा।”

उसने कहा, “लोग मुझे कम दिमाग का कहते थे, ये तो हमने सहन कर लिया, लेकिन अब लोग कानाफूसी करते हैं कि इसी के साथ गैंगरेप हुआ है, ये मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं।”

नजमा की माँ ने कहा, “हमारी बिटिया बहुत सीधी है इसलिए ससुराल वाले उसे कम दिमाग का समझते थे। रोज मारपीट होती थी, मुझसे देखा नहीं गया तो उसे घर बुला लिया। एक दुःख तो वो झेल ही रही थी, दूसरा इन दरिंदो ने दे दिया। हम तो अपनी बिटिया से कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन फिर भी अब ये किसी से ज्यादा नहीं बोलती है।”

वहीं, नजमा के पिता ने कहा, “हम गरीब हैं तो क्या हुआ, हमारी बेटी के साथ बुरा हुआ है, हमें न्याय चाहिए। दो चार लोग हमारे घर रोज आते हैं, कहते हैं समझौता कर लो। पर हम मरते दम तक अपनी बेटी को न्याय देने के लिए लड़ेंगे। उसे न्याय मिला तो मेरे मन को कुछ तसल्ली जरूर मिल जाएगी।”

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