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2040 तक इन देशों में बैन हो जाएगी पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री

लखनऊ। ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी पर ऊर्जा का स्त्रोत सीमित है। बावजूद इसके ऊर्जा स्त्रोंतों के अत्यधिक दोहन हो रहा है। लेकिन इसको लेकर कई देश अब चिंतित दिख रहे हैं। इसी को देखते हुए ब्रिटेन की सरकार यह घोषणा कर सकती है कि 2040 से देश में पेट्रोल और डीजल कारों (जीवाश्म ईंधन से चलने वाली कारें) पर पूरी तरह प्रतिबंध लग जायेगा।

द टाइम्स समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक ब्रिटेन में 2040 तक पेट्रोल और डीजल कारें बंद कर दी जाएंगी। वहां की सरकार एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए जल्द ही इस प्रतिबंध की घोषणा भी कर सकती है। ब्रिटेन के पर्यावरण मंत्री माइकल गोवे ने घोषणा की सरकार की यह बहुप्रतीक्षित योजना है। यह प्रतिबंध उन इलेक्ट्रिक मोटर वाले हाइब्रिड वाहनों पर भी लगेगा जो पेट्रोल या डीजन इंजन के साथ आती हैं।

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इससे पहले ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने सरकार से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते NO2 तत्वों की कमी के लिए सरकार से प्लान पेश करने को कहा था। सरकार लोकल काउंसिल्स को 255 मिलियन पाउंड मुहैया कराएगी जिसके तहत हवा में NO2 के लेवल को कम करने के प्रयास करने होंगे। इसमें ट्रैफिक लाइट्स की री-प्रोग्रामिंग से लेकर रोड के लेआउट तक बदलना शामिल है। एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो वायु प्रदूषण को साफ रखने की योजना के
तहत ब्रिटेन में 2040 के बाद महज बिजली चलित कारें ही बेची जा सकेंगी।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में हर साल तकरीबन 40,000 लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है। इसमें सबसे ज्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड तत्वों की मौजूदगी रहती है। वहीं दूसरी तरफ नॉर्वे एक ऐसा मुल्क बनने की कोशिश में है जहां 2025 तक ईंधन चलित वाहनों को पूरी तरह बैन करने का लक्ष्य है। वहां इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स में छूट दी जा रही है।

फ्रांस, भारत और जर्मनी का भी प्रस्ताव

पर्यावरण को स्वच्छ बनाने और पेरिस समझौता के प्रति प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देने के लिए फ्रांस साल 2040 तक देश में पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने जा रहा है। बीबीसी के अनुसार, फ्रांस के पर्यावरण मंत्री निकोलस उलो ने जीवाश्म ईंधन से चलने वाली गाड़ियों पर प्रतिबंध की घोषणा को पेरिस पर्यावरण समझौते के प्रति फ़्रांस की नई प्रतिबद्धता बताया है। उलो ने कहा कि फ़्रांस ने 2050 तक कार्बन तटस्थ बनने की योजना बनाई है।

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उल्लेखनीय है कि फ़्रांस के कार बाज़ार में हाईब्रिड कारों की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत है, जिसमें विशुद्ध इलेक्ट्रिक वाहन 1.2 प्रतिशत हैं। हालांकि यह अभी साफ़ नहीं हो पाया है कि 2040 में मौजूदा पेट्रोल-डीज़ल वाहनों का क्या होगा।

उलो एक वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता है, जिन्हें फ़्रांस के नए राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने पर्यावरण मंत्री बनाया है। वैसे मैक्रों पर्यावरण को लेकर अमरीकी नीति की खुलेआम आलोचना कर चुके हैं और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस ग्रह को सुरक्षित करने में सहयोग की अपील भी कर चुके हैं। उलो ने कहा, “अमरीकी फैसले के बाद फ़्रांस ने 2050 तक कार्बन तटस्थ बनने का फैसला किया है। ”उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को बदलने में सरकरी मदद दी जाएगी।

कार निर्माता कंपनी वोल्वो ने कहा था कि 2019 तक उसकी सभी कारें कम से कम आंशिक रूप से इलेक्ट्रिक हो जाएंगी, जबकि अभी भी यूरोपीय कार बाज़ार में डीज़ल-पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है।

इसके अलावा फ़्रांसीसी सरकार ने 2022 तक अपने सभी कोयला आधारित उर्जा संयंत्रों को बंद करने का भी फैसला लिया है। साथ ही सरकार ने परमाणु आधारित बिजली निर्भरता को भी कम करने का फैसला लिया है और कहा है कि 2025 तक परमाणु आधारित बिजली के कुल उत्पादन में 50 प्रतिशत तक कमी की जाएगी।

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इतना ही नहीं सरकार तेल और गैस खोजने के लिए लाइसेंस देना भी बंद कर देगी, क्योंकि फ़्रांस के कई शहर वायु प्रदूषण से बहुत बुरी तरह जूझ रहे हैं। पिछले मार्च महीने में पेरिस में वायु प्रदूषण अपने चरम पर पहुंच गया था। उधर, यूरोप में इलेक्ट्रिक कार के इस्तेमाल में सबसे अग्रणी रहने वाला देश नॉर्वे 2025 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा में बढ़ना चाहता है। नीदरलैंड्स भी इसी ओर आगे बढ़ रहा है। जर्मनी और भारत ने इसी तरह के उपायों के लिए 2030 तक का लक्ष्य प्रस्तावित किया है।

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