इंजीनियर ने 12 हजार रुपए में शुरू किया था शू लॉन्ड्री का बिजनेस, टर्नओवर सुन रह जाएंगे हैरान

Astha SinghAstha Singh   30 May 2018 6:06 AM GMT

इंजीनियर ने 12 हजार रुपए में शुरू किया था शू लॉन्ड्री का बिजनेस, टर्नओवर सुन रह जाएंगे हैरानसंदीप गजकस ने इंजीनियरिंग छोड़ शुरू किया लॉन्ड्री का बिज़नेस।

कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि विचार छोटे या बड़े होते हैं। जूते पॉलिश व रिपेयर करने के जिस काम को अकसर लोग छोटा समझते हैं, उसे ही मुंबई के एक युवा ने अपना बड़ा व्यवसाय बना लिया है।

संदीप गजकस आज "द शू लांड्री" चलाते हैं। उन्होंने अपने यूनिक बिज़नेस आईडिया के कारण शानदार सफलता पाई और देखते ही देखते आज उनकी कम्पनी देश के 10 राज्यों में पंहुच चुकी है। इतना ही नहीं संदीप की कंपनी कई मशहूर बड़े ब्रांड प्यूमा, रीबॉक, नाइक और फिला समेत कई बड़ी कम्पनियां जुड़ी हुई है।

विदेश जाने का फैसला बदलकर शू लॉन्ड्री का बिज़नेस किया शुरू

गाँव कनेक्शन से बातचीत के दौरान संदीप गजकस (36 वर्ष) बताते हैं, "नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फायर इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग करने के बाद मैं जॉब के लिए गल्फ (खाड़ी देश) जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसी समय अमेरिका में 9/11 का आतंकवादी हमला हुआ जिसके बाद मैंने विदेश जाने का इरादा छोड़ दिया और शू लांड्री बिज़नेस शुरू करने का फैसला किया।"

बिजनेस चल पड़ा तो शोहरत भी मिली। फोटो- साभार- फेसबुक

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घर वाले नहीं थे खुश

उन्होंने बताया कि," जब मैंने यह फैसला अपने परिवार को सुनाया तो, घर वाले इस बात से बिल्कुल खुश नहीं थे। जाहिर है वे खुश भी कैंसे होंगे, क्यूंकि कौन से माता-पिता ऐसे होंगे जो अपने बेटे को इंजीनियरिंग छोड़ कर जूता रिपेयरिंग और पॉलिशिंग करते हुए देखना चाहेंगे।"

कैसे की शुरुआत

लेकिन फिर भी मैंने पूरी दुनिया की आवाज को अनसुना करके अपने दिल की सुनी। मैंने 12000 रुपये खर्च कर बिज़नेस शुरू किया और बाथरूम को वर्कशॉप बना कर दोस्तों और रिश्तेदारों के जूते पॉलिश और रिपेयरिंग करने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत संघर्ष की और बढ़ने लगी। मैंने संघर्ष जारी रखा और धीरे-धीरे संघर्ष सफलता में बदल गया।

संदीप गजकस

पुराने जूतों को बिल्कुल नया बनाने के इनोवेटिव तरीके खोजे

संदीप कहते है, "मैंने सबसे ज्यादा समय अपनी रिसर्च पर दिया, क्योंकि मैं कुछ ऐसे इनोवेटिव तरीके खोज रहा था, जो पुराने जूतों को एकदम नया बना दे, इसलिए मैंने पहले असफल होना सीखा और वो तरीके खोजे जो मुझे नहीं करने चाहिए थे, और आखिरकार मैंने 2003 में देश की पहली "द शू लांड्री कंपनी" शुरू की।

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सालाना टर्नओवर 2 करोड़ से ज्यादा

संदीप ने यह कम्पनी 2003 में शुरू की थी। संदीप की मेहनत और काबिलियत के कारण आज उनकी कम्पनी का सालाना टर्नओवर 2 करोड़ से ज्यादा है।

मुंबई के अँधेरी इलाके से शुरू हुई संदीप गजकस की कंपनी के आज कई शहरों में दफ्तर हैं। इतना ही नहीं वो अपनी फ्रेंचाइजी को भी बेच रहे है। आज उनकी फ्रेंचाइजी मुंबई, पुणे, गोरखपुर समेत कई शहरों में खुल चुकी हैं और ये तेजी से बढ़ती भी जा रही है। रोज़ एक नई इन्क्वारी आ रही है।

कैसे काम होता है?

संदीप बताते हैं, "जूता लांड्री एक ऐसी सेवा है जो ग्राहक के पास खुद आती है, जहां वे चाहते हैं। मैं सारे कर्मचारियों को खुद ही ट्रेनिंग देता हूं, जिससे काम की पारदर्शिता बनी रहे। संदीप गजकस दावा करते हैं कि यह भारत की पहली शू लांड्री सेवा है।

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लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं

संदीप बताते हैं, यह एक कम पैसे लगने वाला व्यवसाय है। इससे लोगों को रोज़गार के अवसर मिल रहे हैं। उनका नज़रिया बदल रहा है इस व्यवसाय की तरफ। अभी हाल में ही लखनऊ से भी इन्क्वारी आई है जिसपर विचार-विमर्श चल रहा है।

ये है संदीप का कारोबार।

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